मनुस्मृति पर बोलना राहुल को पड़ा भारी! अधूरा ज्ञान, गलत हवाला और कथनी-करनी में अंतर ने करवाई कांग्रेस की फजीहत
मनुस्मृति पर Rahul Gandh प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी के बहाने सनातन धर्म को कथित तौर पर टार्गेट करने चले थे, लेकिन उनके अधूरे ज्ञान ने कांग्रेसियों की ही फ़ज़ीहत करा दी. उन्होंने डबल स्टैंड बयान से कांग्रेस को ही लेने के देने पड़ गए हैं.
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जिस सनातन धर्म को हिंदुस्तान की आत्मा बताई जाती है. सनातन धर्म में महिलाओं को शक्ति के रूप में पूजा जाता है, उस सनातन धर्म की संस्कृति और विचारों पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी सवाल उठा रहे है. योंकि उन्हें लगता है कि सनातन धर्म महिलाओं की आजादी पर लगाम लगाता है, उन्हें लगता है कि सनातन धर्म में महिलाओं को पिंजड़े में कैद करके रखा जाता है. इसीलिये सनातनी ग्रंथ मनु स्मृति पर सवाल उठाते हुए महाराष्ट्र के पुणे में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बयान दे दिया कि:“मनुस्मृति में लिखा गया है कि महिला बचपन में पिता के अधीन, युवावस्था में पति के और वृद्धावस्था में अपने बेटों के अधीन रहती हैं, महिला को कभी स्वतंत्र नहीं होना चाहिए.”
राहुल गांधी ने शायद कभी मनुस्मृति पढ़ी नहीं है. इसीलिये उन्हें मनुस्मृति की यहीं तक समझ है कि ये ग्रंथ महिलाओं से उनकी आजादी छीनता है, जबकि हकीकत क्या है. ये खुद कांग्रेस के प्रिय शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने डंके की चोट पर बता दिया कि मनुस्मृति के श्लोक, “पिता रक्षति कौमारे, भर्ता रक्षति यौवने
पुत्रो रक्षति वार्धक्ये न स्त्री स्वातंत्र्यमर्हति”, का असली शास्त्रीय और व्यावहारिक मतलब महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और दायित्व से जुड़ा है और रक्षति शब्द का अर्थ रक्षा करना है. इसे किसी भी तरह से नियंत्रण या अधिकार छीनने से नहीं जोड़ा जाना चाहिए.
ये श्लोक सनातन परंपरा में परिवार और समाज की जिम्मेदारी, स्त्री की सुरक्षा, सम्मान और भरण पोषण से जुड़ी है, लेकिन इतनी सी बात राहुल गांधी को शायद समझ में नहीं आ रही है. या फिर वो समझना नहीं चाहते हैं. इसीलिये मनुस्मृति के इस श्लोक को महिलाओं की आजादी छीनने वाला बता दिया. और मजे की बात तो ये है कि ये बात भी वो राहुल गांधी बोल रहे हैं. जिन्हें सबसे पहले कम से कम अपनी पार्टी को सलाह देना चाहिए कि वो महिलाओं को पूरी भागीदारी दे, क्योंकि
- हिमाचल प्रदेश में साल 2022 से कांग्रेस सरकार है लेकिन इसके बावजूद एक भी महिला नेता को कांग्रेस ने इस लायक नहीं समझा कि उन्हें मंत्री जैसा बड़ा पद दिया जाए.
- कर्नाटक में अभी इसी महीने अगस्त में डीके शिवकुमार ने नए-नए मुख्यमंत्री बने हैं और 33 मंत्रियों के साथ शपथ ली लेकिन हैरानी की बात ये है कि इनमें एक भी महिला मंत्री नहीं हैं.
- केरल और तेलंगाना में भी कांग्रेस की पूर्ण बहुमत की सरकार है लेकिन इसके बावजूद दोनों राज्यों में सिर्फ दो-दो महिलाओं को ही मंत्री बनाया गया है.
कांग्रेस और बीजेपी ने महिलाओं को कितना दिया प्रतिनिधित्व?
इसी बात से समझ सकते हैं कि एक तरफ जहां राहुल गांधी महिलाओं की आजादी की बात करते हैं. तो वहीं दूसरी तरफ उन्हीं की पार्टी सत्ता में आने के बाद महिलाओं को भागीदारी देने से भागती है. इतना ही नहीं. कांग्रेस चाहती तो चारों राज्यों में कम से कम एक राज्य में तो महिला मुख्यमंत्री बना देती. लेकिन नहीं बनाया. क्योंकि यही कांग्रेस की हकीकत है. भाषणों में तो महिलाओं की आजादी की बात करते हैं. और जब सरकार में हिस्सा देने की बात आती है तो कर्नाटक में गायत्री शांतिगौड़ा जैसी नेता का लिस्ट में नाम होने के बावजूद उन्हें मंत्री नहीं बनाया जाता है. कांग्रेस के इस दोहरे रवैये पर यूपी बीजेपी ने भी तंज मारते हुए कहा.
बीजेपी ने 41 तो कांग्रेस ने 4 महिलाओं को ही बनाया मंत्री!
फर्क साफ है, बीजेपी में महिला मंत्रियों की संख्या 41 है जबकि कांग्रेस में सिर्फ 4, नारी शक्ति की बातें तो बहुत, लेकिन सच यही है कि कांग्रेस शासित राज्यों में महिलाएं सिर्फ नाम मात्र की हैं, कागजी नारीवाद और महिला सशक्तिकरण का ढोंग, आंकड़े झूठ नहीं बोलते, बीजेपी ने महिलाओं को सत्ता में असली हिस्सेदारी दी है जबकि कांग्रेस सिर्फ वादे करती है.
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बीजेपी के इस वार से समझ सकते हैं. महिलाओं की आड़ लेकर मनुस्मृति पर हमला बोल कर राहुल गांधी ने कितनी बड़ी गलती कर दी है. क्योंकि बात अगर महिलाओं की आजादी और हक की आएगी तो कांग्रेस के हाथ भी इस मामले में दूध से धुले नहीं हैं. जब भी सरकार में हिस्सेदारी देने की बात आती है तो यही कांग्रेस बैकफुट पर चली जाती है. तो वहीं दूसरी तरफ बीजेपी ने एक महिला को देश के राष्ट्रपति जैसे बड़े पद तक पहुंचाया. जबकि रेखा शर्मा मुख्यमंत्री के तौर पर दिल्ली की सत्ता संभाल रही हैं. इतना ही नहीं. मोदी सरकार में भी सात महिला मंत्री हैं. तो वहीं योगी सरकार में 6 महिला मंत्री हैं. लेकिन इसके बावजूद राहुल गांधी आरोप लगाते हैं कि मनुस्मृति को मानने वाली बीजेपी महिलाओं की आजादी के खिलाफ है.