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ट्रंप के रास्ते पर चलकर, भारत से लिया पंगा...! अब बुरे फंसे बालेन शाह, विरोध में उतरे लोग, जानें वजह

अपने फैसलों और एक्शन को लेकर दुनियाभर में छाए नेपाल के PM बालेन शाह बड़ी मुसीबत में फंस गए. भारत से जुड़े एक फैसले को लेकर उनका विरोध शुरू हो गया.

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20 Apr 2026
( Updated: 20 Apr 2026
03:16 PM )
ट्रंप के रास्ते पर चलकर, भारत से लिया पंगा...! अब बुरे फंसे बालेन शाह, विरोध में उतरे लोग, जानें वजह
Source- Balen Shah
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Nepal Custom Duty: नेपाल के नए प्रधानमंत्री बालेन शाह ने सत्ता संभालते ही ताबड़तोड़ कई बड़े फैसले लिए. सोशल मीडिया से लेकर अखबार की सुर्खियों तक में उनका नाम नायक की तरह छा गया. नेपाल में जेन जी आंदोलन से सत्ता में आए बालेन शाह के खिलाफ ही अब प्रदर्शन होने लगे.

नेपाल सरकार ने भारतीय सामानों को लेकर ऐसा कदम उठाया है. जिसकी तुलना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ से होने लगी है. भड़के लोगों ने PM बालेन शाह के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन भी किया. दरअसल, नेपाल भारत से लाए जाने वाले 100 नेपाली रुपये से ज्यादा कीमत के सामान पर कस्टम ड्यूटी सख्ती से लागू करने का फैसला लिया गया है. 

क्यों लिया जा रहा भारतीय सामानों पर टैक्स? 

बालेन शाह सरकार ने यह फैसला भंसार नीति यानी कस्टम ड्यूटी के तहत लिया है. जिसे सख्ती से लागू भी कर दिया गया है. भारत से लाए जाने वाले सामान पर टैक्स के इस फैसले ले लोगों में रोष है. उन्होंने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया. 

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दरअसल बीरगंज इलाके में भारत नेपाल की सीमा से दोनों देशों के लोग आवाजाही करते हैं. इस दौरान सीमा पार से सामानों की भी आवाजाही होती है, लेकिन अब सरकार ने राजस्व वसूली का नाम देते हुए 100 रुपए से ज्यादा कीमत वाले भारतीय सामानों पर टैक्स का बोझ लाद रही है, जो लोगों की जेब पर भी बड़ा असर डालेगा. 

मधेश क्षेत्र के लोग खाने-पीने का सामान, कपड़े और जरूरी चीजें भारत से लाते हैं, लेकिन अब सख्ती बढ़ने से उन पर आर्थिक संकट मडरा रहा है. ऐसे में लोग बालेन शाह सरकार के इस फैसले के विरोध में उतर आए. लोग इस फैसले को वापस लेने की मांग कर रहे हैं. लोगों का कहना है कि सदियों से नेपाल और भारत बेटी-रोटी का रिश्ता साझा करते हैं. सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों के साथ ही आर्थिक संबंध भी समानांतर ही चलते हैं. इसलिए नॉन कमर्शियल और घरेलू सामानों के लिए टैक्स में छूट दी जानी चाहिए. 

सीमा क्षेत्रों के लोगों और हितधारकों का कहना है कि यह कदम उनके लिए मुश्किलें बढ़ाने वाला है, क्योंकि वे लंबे समय से सस्ते सामान के लिए भारतीय बाजारों पर निर्भर रहे हैं। उनका कहना है कि यह नियम खासकर कम आय वाले परिवारों को प्रभावित करता है और इसे लागू करना भी मुश्किल है। इसके बजाय घरेलू उपयोग के सामान पर शून्य शुल्क की मांग की गई है।

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क्या है नेपाल की भंसार नीति?

सरकार ने इस फैसले को सख्ती से लागू करना भी शुरू कर दिया है. अधिकारियों ने बताया कि यह नियम नया नहीं है, बल्कि पहले से मौजूद था, जिसे अब सख्ती से लागू किया जा रहा है. इसके तहत सीमा पर कड़ी जांच की जा रही है. 

प्रशासन ने सीमा चौकियों पर निगरानी बढ़ाते हुए यात्रियों के बैग की जांच की, सघन चेकिंग के चलते बॉर्डर पर लोगों की लंबी कतारे लग गईं. न केवल भारतीय सामान बल्कि भारत में रजिस्टर वाहनों के प्रवेश पर भी अब पहले से यादा सख्ती बरती जा रही है. सरकार का कहना है कि बॉर्डर नियमों के उल्लंघन और टैक्स वसूली में ढील के कारण राजस्व को नुकसान हुआ है. इससे तस्करी पर भी लगाम लगेगी और शहर के व्यापारियों को फायदा मिलेगा. 

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सरकार का क्या है तर्क? 

वहीं, सीमा शुल्क विभाग के निदेशक किशोर बरतौला ने इस नियम के सख्ती से पालन का बचाव करते हुए कहा कि यह कदम तस्करी पर नियंत्रण के लिए उठाया गया है। उन्होंने बताया कि तस्कर आम लोगों के जरिए छोटे-छोटे सामान कई बार मंगवाकर बाद में उन्हें बड़ी मात्रा में इकट्ठा कर बेचते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि 100 रुपये से ज्यादा के सामान पर शुल्क लगाने से सरकार को ज्यादा राजस्व नहीं मिलता, लेकिन इससे तस्करी पर अंकुश लगाने में मदद मिलती है, साथ ही, इस सख्ती से नेपाल के सीमावर्ती शहरों के व्यापारियों को भी फायदा होने की उम्मीद है. 

हालांकि लोग और अलग-अलग संगठन इस फैसले का कड़ा विरोध कर रहे हैं. नेपाल-भारत खुली सीमा संवाद समूह ने भी सरकार से कस्टम नीति में तुरंत संशोधन करने की मांग की. संगठन ने चेतावनी दी कि मौजूदा नियम सीमा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों पर बेवजह बोझ डाल रहे हैं. 

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जारी बयान में संगठन ने नेपाल और भारत के बीच सदियों पुराने सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों का हवाला देते हुए सरकार से व्यावहारिक और जनहितैषी कदम उठाने की अपील की, ताकि सीमा पार आवाजाही आसान हो सके और लोगों के बीच संबंध मजबूत हों. 

यह भी पढ़ें- एनर्जी से इकोनॉमी तक… भारत और कतर ने मिलाया हाथ, दोस्ती की नई इबारत लिखने को तैयार दोनों देश

इसके अलावा, संगठन ने सीमा क्षेत्रों में सुव्यवस्थित और सस्ते बाजार विकसित करने की भी मांग की, ताकि लोगों को जरूरी वस्तुएं आसानी से मिल सकें, साथ ही धार्मिक और सांस्कृतिक यात्राओं के लिए विशेष कस्टम-फ्री सुविधा देने का प्रस्ताव रखा गया है, जिसके तहत श्रद्धालु 48 घंटे तक बिना शुल्क सामान ले जा सकें. इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और दोनों देशों के बीच लोगों के रिश्ते और मजबूत होंगे. 

Time मैग्जीन में आया बालेन शाह का नाम? 

बालेन शाह रैपर और म्यूजिशियन भी हैं. नेपाल में जेन जी आंदोलन के बाद चर्चा में आए और अब प्रधानमंत्री हैं. सत्ता में आते ही उन्होंने करप्शन और करप्ट अधिकारियों पर एक्शन लेना शुरू कर दिया, VIP कल्चर को खत्म करने की मुहीम शुरू की, यूनिवर्सिटी चुनाव को खत्म किया. हाल ही में टाइम मैगजीन ने बालेन शाह को Time मैग्जीन में टॉप प्रभावशाली चेहरों में शामिल किया था. 

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