बूंद-बूंद के लिए तरसने लगा पाकिस्तान, रावी, सिंधु पर भारत का फुल कंट्रोल, पानी के लिए गिड़गिड़ाने लगा शहबाज शरीफ
Pakistan Water Crisis: भारत ने इस समझौते के तहत पाकिस्तान को ये पानी देने की जिम्मेदारी ली थी. लेकिन, पिछले कुछ सालों में दोनों देशों के रिश्ते तनावपूर्ण हो गए, और भारत ने सिंधु जल समझौते को स्थगित करने का निर्णय लिया. और अभी तक सिंधु बेसिन की तीन नदियों का पानी रोक हुआ हैं.
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भारत ने पकिस्तान को पिछले साल 2023 में सबक सिखाने के लिए सिंधु जल समझौता को स्थगित करने का फैसला किया गया था... यह कदम उस समय लिया गया था जब जम्मू और कश्मीर के पहलगाम इलाके में एक कायराना आतंकवादी हमला हुआ था. यह हमला पाकिस्तान से जुड़े आतंकियो द्वारा किया गया था, जिससे भारत ने पाकिस्तान को सख्त सन्देश देने की जरूरत महसूस की. इस फैसले का असर अब धीरे धीरे पकिस्तान में स्पष्ट रूप से दिखने लगा हैं, और पाकिस्तान की पानी की संकट की स्थिति बढ़ने लगी हैं..आइए जानते हैं सिंधु जल समझौता में क्या था फैसला...?
सिधु जल समझौता में क्या था फैसला?
भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझता 1960 में हुआ था, जिसके तहत पाकिस्तान को सिंधु बेसिन की तीन नदियों- रावी, सतलुज और ब्यास, से पानी मिलता है. इन नदियों का पानी पाकिस्तान के लिए बहुत जरुरी है, क्योंकि इन्हीं नदियों से उसकी सिंचाई और पीने के पानी की जरूरतें पूरी होती थीं. भारत ने इस समझौते के तहत पाकिस्तान को ये पानी देने की जिम्मेदारी ली थी. लेकिन, पिछले कुछ सालों में दोनों देशों के रिश्ते तनावपूर्ण हो गए, और भारत ने सिंधु जल समझौते को स्थगित करने का निर्णय लिया. और अभी तक सिंधु बेसिन की तीन नदियों का पानी रोक हुआ हैं.
भारत का फैसला और पाकिस्तान पर प्रभाव
भारत ने सिंधु जल समझौते को स्थगित किया तो यह पाकिस्तान के लिए एक बड़ा झटका था. इस फैसले के बाद, पाकिस्तान को मिलने वाले जल आपूर्ति में धीरे-धीरे कमी आने लगी. हालांकि, भारत ने तुरंत पानी रोकने का कदम नहीं उठाया, क्योंकि यह एक लंबा और जटिल प्रक्रिया था. लेकिन, पिछले एक साल में भारत ने कई परियोजनाओं पर काम किया और अब इस स्थिति में पहुंच चुका है कि पाकिस्तान के लिए पानी का मिलना एक कठिनाई बन गया है.
भारत में जल विद्युत उत्पादन और सिंधु बेसिन पर नियंत्रण
भारत ने सिंधु बेसिन के जल उपयोग पर बढ़ते हुए नियंत्रण को महसूस किया है और इस पर तेजी से काम करना शुरू कर दिया है. भारत ने कई जल विद्युत परियोजनाओं को बढ़ावा दिया है, जिससे सिंधु बेसिन की नदियों से जल का उपयोग और अधिक प्रभावी रूप से किया जा सकता है. इससे भारत के लिए बिजली उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ पाकिस्तान के लिए जल संकट भी गहरा हुआ है.
मोहरा परियोजना और शाहपुर कंडी बांध
भारत ने जम्मू-कश्मीर में सिंधु, झेलम, और चिनाब नदियों पर परियोजनाओं पर काम शुरू किया है. इन नदियों से पाकिस्तान को मिलने वाले 80% पानी में से लगभग आधे का प्रवाह अब पहले से कम हो चुका है... एक प्रमुख परियोजना, मोहरा परियोजना, इस दिशा में एक अहम कदम है. हालांकि, इस परियोजना से बिजली उत्पादन ज्यादा नहीं होगा, लेकिन यह पाकिस्तान के लिए पानी के प्रवाह को प्रभावित करेगा.
इसके अलावा, पंजाब और जम्मू-कश्मीर की सीमा पर शाहपुर कंडी बांध का निर्माण भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है. इस बांध से रावी नदी के जल पर भारत का पूरा नियंत्रण स्थापित हो गया है. अब, रावी का पानी कठुआ और सांबा के क्षेत्रों की ओर मोड़ा जा रहा है, जिससे पाकिस्तान को इस नदी से पानी की आपूर्ति में कमी आ रही है.
क्या पाकिस्तान के लिए मुश्किलें बढ़ेंगी
सिंधु जल समझौते के स्थगन के बाद, भारत ने धीरे-धीरे पाकिस्तान को मिलने वाले पानी को नियंत्रित करना शुरू कर दिया है. इसके परिणामस्वरूप, पाकिस्तान में जल संकट गहरा रहा है और इसके साथ ही उसकी आर्थिक स्थिति पर भी दबाव बढ़ रहा है. सिंधु बेसिन की नदियों के पानी के उपयोग पर बढ़ती निगरानी और नई परियोजनाओं से पाकिस्तान को आने वाले दिनों में और भी कठिनाइयाँ झेलनी पड़ सकती हैं.
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