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नासिक धर्मांतरण मामला: सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका, सख्त कानून की मांग तेज

अश्विनी उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि वह इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए केंद्र और राज्य सरकारों को उचित निर्देश जारी करे, ताकि धर्म की स्वतंत्रता के नाम पर हो रहे शोषण और धोखाधड़ी को रोका जा सके.

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16 Apr 2026
( Updated: 16 Apr 2026
08:22 PM )
नासिक धर्मांतरण मामला: सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका, सख्त कानून की मांग तेज
Image Credits: IANS/Deepak Kumar
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महाराष्ट्र के नासिक में अवैध धर्मांतरण नेटवर्क के बड़े खुलासे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दायर की गई है.  

याचिकाकर्ता वकील अश्विनी उपाध्याय ने पहले से लंबित एक मामले में अतिरिक्त अर्जी दाखिल की है. इस अर्जी में उन्होंने नासिक की घटना का हवाला देते हुए कहा कि वहां का खुलासा पूरे देश की अंतरात्मा को झकझोर देने वाला है.

क्या है याचिका में मुख्य मांग?

याचिका में कहा गया है कि धोखे, प्रलोभन या छल-कपट से किया जाने वाला धर्मांतरण देश की सार्वभौमिकता, धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र और संवैधानिक स्वतंत्रता के लिए गंभीर खतरा है. याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि अदालत इस प्रकार के जबरन या धोखे वाले धर्मांतरण को देश के खिलाफ अप्रत्यक्ष युद्ध और आतंकवाद की श्रेणी में रखे.

सरकारों के लिए क्या सुझाव दिए गए?

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अश्विनी उपाध्याय ने केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों से आग्रह किया है कि वे जबरन धर्मांतरण को रोकने के लिए तुरंत सख्त कानूनी और प्रशासनिक कदम उठाएं. याचिका में यह भी मांग की गई है कि धर्मांतरण के सभी मामलों की सुनवाई के लिए देश भर में विशेष अदालतें (स्पेशल कोर्ट) गठित की जाएं, ताकि ऐसे मामलों में तेज और प्रभावी न्याय मिल सके.

नासिक मामले का हवाला

याचिकाकर्ता ने कहा कि नासिक में सामने आए अवैध धर्मांतरण नेटवर्क ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि देश में संगठित तरीके से धर्मांतरण की गतिविधियां चल रही हैं. इन गतिविधियों में गरीब, अशिक्षित और आदिवासी समुदायों को निशाना बनाया जा रहा है.

उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो यह समस्या और बढ़ती जाएगी, जो सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता के लिए खतरा बन सकती है.

सुप्रीम कोर्ट से अपील

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अश्विनी उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि वह इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए केंद्र और राज्य सरकारों को उचित निर्देश जारी करे, ताकि धर्म की स्वतंत्रता के नाम पर हो रहे शोषण और धोखाधड़ी को रोका जा सके.

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