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अजित-शरद पवार की NCP का विलय तय, BJP आलाकमान की भी हरी झंडी, 9 फरवरी को ऐलान संभव, मोदी सरकार को मिलेगी मजबूती

अजित पवार के निधन के बाद दोनों NCP के मर्जर की चर्चाएं तेज हो गई हैं. कहा जा रहा है कि विलय तय है, बीजेपी हाईकमान की भी हरी झंडी है. दोनों के साथ आने के बाद केंद्र में मोदी सरकार को मजबूती मिलेगी.

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31 Jan 2026
( Updated: 31 Jan 2026
06:21 AM )
अजित-शरद पवार की NCP का विलय तय, BJP आलाकमान की भी हरी झंडी, 9 फरवरी को ऐलान संभव, मोदी सरकार को मिलेगी मजबूती
Maharashtra NCP Merger Confirmed (File Photo)
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अजित पवार के निधन के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में एनसीपी के नेतृत्व को लेकर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं. ये पूछे जाने लगे हैं कि अब एनसीपी की कमान कौन संभालेगा और क्या अजित पवार गुट और शरद पवार गुट फिर साथ होंगे. सूत्रों के हवाले से दोनों ही सवालों के जवाब मिल गए हैं. सूत्रों के मुताबिक, दोनों पार्टियों के विलय की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है और इसका पूरा रोडमैप खुद अजित पवार ने तैयार किया था. वे लगातार इस मसले पर बैठकें कर रहे थे और उनके निधन के बाद भी इस मुद्दे पर दो बार मीटिंग हो चुकी है.

सूत्र बताते हैं कि 9 फरवरी को जिला परिषद चुनाव के नतीजों के बाद दोनों गुटों के विलय की औपचारिक घोषणा हो सकती है. बताया जा रहा है कि इस पर शरद पवार और बीजेपी हाईकमान—दोनों की सहमति है. विलय के बाद एनसीपी महायुति का हिस्सा बनी रहेगी, जिससे केंद्र में एनडीए को शरद पवार गुट के 8 सांसदों का समर्थन भी मिलेगा. इतना ही नहीं, सुप्रिया सुले को लेकर भी कहा जा रहा है कि वे मोदी सरकार में मंत्री बन सकती हैं. सूत्र ये भी बता रहे हैं कि दोनों पार्टियों के विलय की घोषणा 12 फरवरी को हो सकती है जैसा कि खुद अजित पवार करने वाले थे.

एक ओर जहां अजित पवार के पास सिर्फ एक सांसद है, वहीं एनसीपी-एसपी के 8 सांसद हैं. अगर दोनों एक हो जाती हैं, तो बीजेपी को कुल 9 सांसदों का समर्थन मिल सकता है, जो लोकसभा में नंबर गेम के लिहाज से बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है. वहीं, महाविकास अघाड़ी को इससे बड़ा झटका लग सकता है.

NCP के विलय पर बीजेपी की भी हरी झंडी!

सूत्रों की मानें तो महायुति सरकार में शामिल एनसीपी के शरद पवार वाले गुट के साथ मर्जर को बीजेपी बदले हालात में सकारात्मक तौर पर ले रही है. शरद पवार के लोकल चुनावों और विधानसभा चुनावों के बाद की स्थिति और बढ़ती उम्र को देखते हुए बीजेपी को लगता है कि उसके लिए एनसीपी अब कोई खास चुनौती नहीं है. हां, वह इसे फायदे के तौर पर ही ले रही है. दावा किया जा रहा है कि अजित पवार को पहले ही बीजेपी हाईकमान ने हरी झंडी दे दी थी.

बीजेपी भी दोनों एनसीपी के एक होने के पक्ष में थी, क्योंकि महाराष्ट्र में उसकी सरकार मजबूत है और इस पंचवर्षीय में उसे राज्य में कोई खतरा नहीं है. हां, केंद्र में अगर शरद पवार गुट का भी समर्थन मिल जाए, तो यह सोने पर सुहागा माना जा रहा है. कहा जा रहा है कि केंद्र में बीजेपी को शरद पवार गुट के सांसदों की जरूरत है.

NCP के नेतृत्व पर खींचतान!

इसी सिलसिले में पार्टी की कमान संभालने के लिए अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को आगे किया गया है. हालांकि, प्रफुल्ल पटेल की दावेदारी को लेकर पार्टी के भीतर खींचतान की स्थिति भी सामने आ रही है. ऐसी ही स्थिति तब भी सामने आई थी, जब अजित पवार ने राज्यसभा चुनाव के वक्त नंबर न होते हुए भी सुनेत्रा पवार का नाम आगे कर दिया था और गठबंधन के लिए उन्हें जिताना एक तरह से नैतिक और राजनीतिक रूप से जरूरी हो गया था.

इसी पूरे राजनीतिक घटनाक्रम और सुनेत्रा पवार के महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने की चर्चाओं के बीच एनसीपी-एसपी के सुप्रीमो शरद पवार ने खुद को इस फैसले से अलग कर लिया है.

बारामती में पत्रकारों से बातचीत करते हुए शरद पवार ने कहा कि उन्हें सुनेत्रा पवार के डिप्टी सीएम के तौर पर शपथ लेने के बारे में कोई जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा, “पार्टी (एनसीपी) ने फैसला किया होगा. मुझे लगता है कि कुछ लोगों ने ऐसे फैसले लिए हैं, जैसे प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे. पार्टी ने अंदरूनी तौर पर कुछ तय किया होगा.”

परिवार साथ खड़ा है: शरद पवार

सुनेत्रा पवार की नियुक्ति को लेकर सवाल पूछे जाने पर शरद पवार ने कहा, “पार्टी (एनसीपी) उन्हें चलानी है. प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे जैसे नेताओं के पास ऐसे फैसले लेने का अधिकार है. मैं उनके अंदरूनी फैसलों पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा. हमारे राजनीतिक रास्ते अलग हैं, लेकिन परिवार दुख में एक साथ खड़ा है.” परिवार की एकजुटता पर उन्होंने कहा, “अगर परिवार के अंदर कोई परेशानी होती है, तो परिवार एकजुट रहता है. परिवार में कोई समस्या नहीं है.”

शरद पवार को सुनेत्रा के शपथ ग्रहण की जानकारी नहीं, विलय पर हामी

जब उनसे पूछा गया कि क्या पवार परिवार का कोई सदस्य शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होगा, तो शरद पवार ने कहा, “हमें शपथ ग्रहण के बारे में कोई जानकारी नहीं है. हमें इसके बारे में खबरों से पता चला. मुझे शपथ ग्रहण को लेकर कोई जानकारी नहीं है.”

एनसीपी के दो गुटों के विलय पर शरद पवार ने बताया कि अजित पवार और जयंत पाटिल के बीच दोबारा एक होने को लेकर सकारात्मक बातचीत हुई थी. उन्होंने कहा कि विलय लगभग फाइनल हो गया था और डिप्टी सीएम 12 फरवरी को इसकी आधिकारिक घोषणा करने वाले थे.

शरद पवार ने मानी विलय वाली बात

शरद पवार ने साफ किया कि जब यह बातचीत चल रही थी, तब वे सीधे तौर पर इसमें शामिल नहीं थे. उन्होंने कहा, “यह बातचीत अजित पवार और जयंत पाटिल ने लीड की थी. यह अजित पवार की इच्छा थी कि दोनों एनसीपी एक साथ आएं और यह हमारी भी इच्छा थी.” उन्होंने आगे कहा कि विमान दुर्घटना में अजित पवार के अचानक निधन के बाद इस पूरी प्रक्रिया पर ब्रेक लग गया है और आगे क्या करना है, यह अब दोनों पक्षों के नेताओं पर निर्भर करेगा.

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सूत्रों के मुताबिक, दोनों पार्टियों में विलय की पहल शरद पवार गुट की तरफ से की गई थी. कहा जा रहा है कि अजित पवार भी इससे खुश थे. एनसीपी की अगुवाई खुद अजित पवार कर रहे थे, जबकि शरद पवार गुट का नेतृत्व जयंत पाटिल, अमोल कोल्हे और रोहित पवार कर रहे थे.

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