‘अफगानिस्तान में मासूमों का नरसंहार, आतंक पर कार्रवाई नहीं’, दुनिया के सामने भारत ने की पाकिस्तान की बोलती बंद
UNSC में दहाड़ते हुए भारत ने पाकिस्तान को नफरती करार दिया. भारतीय राजदूत ने कहा, पाकिस्तान ने रमजान के पवित्र महीने में नागरिकों की हत्या की है एक नरसंहार को सैन्य कार्रवाई का नाम देने से अपराधी निर्दोष नहीं हो जाता.
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पाकिस्तान वो देश है जिसे आतंक पर कितनी भी बार आईना दिखाओ, सुधरने का नाम नहीं लेता, क्योंकि पाक में आतंकियों को सेना का ही हिस्सा माना जाता है. खूफिया एजेंसी ISI उन्हें पालती पोषती है. जबकि एक्शन के नाम पर मासूमों की जान लेती है, फिर चाहे वो बलूचिस्तानियों पर हमला करने की बात हो, या अफगान लोगों पर बमबारी. इसी को लेकर भारत ने वैश्विक मंच पर फटकार लगाई है.
भारत ने 8 जून को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में पाकिस्तान को कड़ी फटकार लगाई है. भारत ने कहा है कि पाकिस्तान की ओर से अफगानिस्तान की जमीन पर सैन्य हवाई हमला अंतर्राष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन है. इस दौरान भारत ने अफगानिस्तान तक पहुंचाई गई मानवीय मदद का भी जिक्र किया.
अफगानिस्तान के हालातों पर भारत ने चिंता जताई
दरअसल, UNSC में अफगानिस्तान के मौजूदा विकट हालातों पर चर्चा हुई. जिसमें भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरिश पार्वथानेनी ने पाकिस्तान पर सीधा अटैक करते हुए कहा,
‘पाकिस्तान ने रमजान के पवित्र महीने में नागरिकों की हत्या की है एक नरसंहार को सैन्य कार्रवाई का नाम देने से अपराधी निर्दोष नहीं हो जाता.’
हरिश पार्वथानेनी ने आगे कहा, नागरिकों को मारना, घायल करना और अनाथ बनाना आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई नहीं है. उन्होंने पाकिस्तान के व्यवहार को पाखंड का सबसे अच्छा उदाहरण बताया.
भारत ने UNSC में अफगानी पीड़ितों के आंकड़े दिखाए
भारत ने अफगानिस्तान पर पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाई को न केवल गलत ठहराया, बल्कि आंकड़ों के साथ पाकिस्तानी की करतूत को दुनिया के सामने भी रखा. भारत ने संयुक्त राष्ट्र की संस्था UNAMA के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा, ‘2026 के पहले तीन महीनों में ही 372 नागरिक मारे गए और 397 घायल हुए हैं.’ बताया गया कि कई हमले तो रमजान के दौरान हुए थे.
हरिश पार्वथानेनी ने अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करने की बात कहते हुए पाकिस्तान के कृत्य पर स्वतंत्र जांच की मांग की.
पाकिस्तान ने रोका अफगानिस्तान का व्यापार
भारत ने पाकिस्तान पर ‘व्यापार और पारगमन आतंकवाद’ का आरोप लगाते हुए कहा, पाकिस्तान ने अफगानिस्तान जैसे लैंडलॉक्ड देश को अपने रास्ते से निर्यात के लिए जमीन मार्ग नहीं दिया, पाकिस्तान ने जानबूझकर अफगानिस्तान के व्यापार को रोका.
यह विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों, संयुक्त राष्ट्र के लैंडलॉक्ड डेवलपिंग कंट्रीज के नियमों और UN चार्टर का उल्लंघन है. जबकि भारत ने अफगान के सामानों पर शुल्क मुक्त (टैरिफ फ्री) बाजार पहुंच दी है. दोनों देशों के बीच एक एयर फ्रेट कॉरिडोर भी शुरू किया है.
भारतीय राजदूत पार्वथानेनी ने पाकिस्तान को ‘नफरत का संगठित कारखाना’ कहा. उन्होंने UNSC में कहा, पाकिस्तान सरकार के आधिकारिक निर्देशों में अपने ही देश के कुछ समूहों को ‘फित्ना अल हिंदुस्तान’ कहा जाता है. इसका मतलब भारत के खिलाफ झूठे नैरेटिव, नफरत, Propaganda फैलाने से है. इसके जरिए पाकिस्तान के अंदर ही भारत के खिलाफ दुश्मनी बनाए रखने की रणनीति अपनाई जाती है. ऐसा करके पाकिस्तान आतंक पर अपनी विफलताओं को छुपाता है. भारत ने UNAMA के काम को पूरा समर्थन देने के अपने वादे को दोहराया और कहा, अफगानिस्तान के लिए सिर्फ सजा वाली नीति से आगे बढ़कर ऐसे कदम उठाए जाएं जो आम अफगानों की जिंदगी बेहतर करें और उन्हें और अलग-थलग न करें.
#IndiaAtUN
PR @AmbHarishP delivered 🇮🇳’s statement at the @UN Security Council on the Situation in Afghanistan
Full remarks here: https://t.co/XbbaSowIMN
@MEAIndia @IndianDiplomacy @PMOIndia @PIB_India pic.twitter.com/2E2yGHW1Ci— India at UN, NY (@IndiaUNNewYork) June 8, 2026Advertisement
भारत ने कैसे की अफगानिस्तान की मदद?
हरिश पार्वथानेनी ने UNSC में अफगानिस्तान को पहुंचाई गई भारत की मदद का जिक्र भी किया. उन्होंने बताया, अफगानिस्तान के सभी 34 प्रांतों में 500 से ज्यादा विकास परियोजनाओं से जुड़ी मदद पहुंचाई गई है. जो कि हेल्थ, इंफ्रास्ट्रक्चर और एजुकेशन से जुड़ी हैं. 2021 से लेकर अब तक भारत ने अफगानिस्तान को 50,000 टन गेहूं, 420 टन दवाइयां टीके और 40,000 लीटर कीटनाशक भेजे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, अकेले अप्रैल 2026 में ही भारत ने तीन टन बाढ़ राहत सामग्री और 33 टन बीसीजी और टेटनस-डिप्थीरिया के टीके भेजे हैं.
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इसके अलावा अफगानिस्तान में भारत ने महिला, मां और बच्चों के लिए स्वास्थ्य सेंटर भी खोले हैं. हरिश पार्थवानेनी ने बताया कि दिल की बीमारी से जुड़े अफगानी बच्चों का इलाज भारत में हो रहा है.