TMC में बड़ी बगावत...ममता के दिल्ली आते ही होगा बड़ा खेला, 16 से ज्यादा सांसदों के फोन बंद! दिल्ली में जमे CM सुवेंदु
Mamata Banerjee को एक बार फिर बड़ा झटका लगने वाला है. ममता जैसे ही दिल्ली आएंगी, उन्हें एक और बड़ी बगावत लोकसभा में झेलने को मिलेगी. करीब 22 सांसदों ने ना सिर्फ अपना अलग गुट बना लिया है, बल्कि करीब 15 से 16 सांसदों ने अपना फोन स्विच ऑफ कर लिया है.
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पश्चिम बंगाल विधानसभा में दो फाड़ हो चुकी ममता बनर्जी की पार्टी TMC में एक बार फिर बड़ी टूट के बादल मंडराने लगे हैं. ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में पहले से ही 58 विधायकों की बगावत और बागी गुट को स्पीकर द्वारा मान्यता दिए जाने के बाद कहा जा रहा है कि ऐसा ही कोई खेला लोकसभा में भी होने जा रहा है. दिल्ली में इस वक्त जो कुछ हो रहा है और जो घटनाक्रम सामने आ रहे हैं, वो कुछ उसी ओर इशारा कर रहे हैं. कहा जा रहा है कि जब ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी विपक्षी इंडिया (INDIA) गठबंधन की बैठक के लिए दिल्ली पहुंचेंगे, तभी उनके साथ खेला हो जाएगा. यानी कि मौका भी होगा और दस्तूर भी.
सूत्र बताते हैं कि करीब 22 सांसद, दोनों सदनों को मिलाकर हैं जो कि ठीक इसी वक्त पाला बदल सकते हैं और एक अलग गुट बना सकते हैं. ऐसा इसलिए कि दलबदल कानून से बचने के लिए करीब दो-तिहाई संख्या चाहिए होती है, जिससे कि उन्हें एक अलग गुट का दर्जा दे दिया जाए.
TMC में होने जा रही एक और बड़ी बगावत
कहा जा रहा है कि ऐसे गुट का नेतृत्व TMC से नाराज चल रहीं बारासात से सांसद काकोली घोष दास्तीदार कर रही हैं. उन्होंने बीते कई दिनों में ना सिर्फ पार्टी के कई फैसलों से खुलकर नाराजगी जताई है, बल्कि ममता बनर्जी द्वारा मुख्य सचेतक के पद से हटाए जाने पर खुलकर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी भी की थी. इसके अलावा लोकसभा में TMC के चीफ व्हिप कल्याण बनर्जी के खिलाफ उन्होंने खुलकर लोकसभा अध्यक्ष को चिट्ठी भी लिखी थी और अपमानजनक-भद्दी भाषा का प्रयोग करने का आरोप भी लगाया था. वहीं उन्होंने पार्टी के मना करने के बावजूद सीएम सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में हुई एक बैठक में भी शिरकत की थी, जिससे पता चलता है कि उनका आने वाले समय में क्या रुख रहने वाला है.
दिल्ली में जमे CM सुवेंदु और समिक भट्टाचार्य
TMC में आगामी बगावत के आसार इससे भी लग रहे हैं कि पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य इस वक्त दिल्ली में ही जमे हुए हैं. आपको बता दें कि समिक भट्टाचार्य ने इस संबंध में हुए सवाल पर कहा कि, "हां, फोन कॉल्स आ रहे हैं. तृणमूल के सांसद लगातार हमसे संपर्क कर रहे हैं. तृणमूल कांग्रेस अब बीते कल की बात हो चुकी है. निकट भविष्य में यह इतिहास के एक छोटे से अध्याय तक सिमट कर रह जाएगी." बीजेपी की राष्ट्रीय महासचिव लॉकेट चटर्जी ने भी इस पर हंसते हुए कहा, "4 मई के चुनावी नतीजों के बाद से ही कई सांसद हमारे साथ लगातार संपर्क में हैं. टेक्स्ट मैसेज, व्हाट्सएप, कॉल्स... क्या कुछ नहीं हो रहा है. वे बस पाला बदलना चाहते हैं."
लोकसभा में भी बंगाल वाला फॉर्मूला
जैसा कि विधानसभा में देखा गया कि टीएमसी के कुल 80 विधायकों में से 58 ने बागी रुख अख्तियार कर पाला बदल लिया और उन्हें एक अलग गुट की मान्यता मिल भी गई. दल-बदल कानून के तहत बागी विधायकों को अपनी सीट बचाने के लिए करीब दो-तिहाई विधायकों यानी कि कुल 54 विधायकों का साथ चाहिए था, जो कि उनके पास 4 ज्यादा यानी कि 58 की संख्या है. इसी तरह लोकसभा में टीएमसी के कुल 28 सांसद हैं, जबकि राज्यसभा में ये संख्या 13 है. इस लिहाज से बागी धड़े को दो-तिहाई बहुमत के लिए कम से कम 19 लोकसभा और 9 राज्यसभा सांसदों का समर्थन चाहिए. हालांकि कहा जा रहा है कि उनके पास फिलहाल 22 की संख्या है, लोकसभा और राज्यसभा मिलाकर. फिलहाल ये नहीं पता चल पाया है कि इन 22 में से लोकसभा सांसदों की संख्या कितनी है.
ममता के दिल्ली आने पर होगा बड़ा खेला
द टेलीग्राफ ने बागी गुट से जुड़े एक सूत्र के हवाले से दावा किया है कि ये बागी सांसद सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन से मिलकर खुद को असली तृणमूल बताने वाले हैं. सूत्र ने कहा, "यह ममता के लिए बेहद दर्दनाक होगा कि जब पिसी-भाइपो (बुआ-भतीजा यानी ममता और अभिषेक) दिल्ली में होंगे, तब वहां बड़ा राजनीतिक धमाका देखने को मिलेगा."
15 सांसदों के फोन बंद
इसी बीच खबर ये भी आ रही है कि बीते दिन से ही करीब 15 सांसदों के फोन लगातार स्विच ऑफ आ रहे थे. TMC में सबसे पहले टूटने वालों में से वे सांसद हैं जो फिल्म, कला, स्टार, खिलाड़ी और फर्स्ट टाइम MP हैं. इतना ही नहीं तीन बागी सांसदों ने राहुल गांधी से भी मिलने से मना कर दिया था. इस संबंध में सबसे बड़ा बयान दिया है टीएमसी के वरिष्ठ राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय ने. उन्होंने संभावित बगावत की पुष्टि करते हुए कहा कि संसदीय दल का बिखराव अब अनिवार्य है. उन्होंने कहा, "यह बस कुछ ही समय की बात है."
टीएमसी संगठन में बड़ा फेरबदल
इसी बीच पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने पार्टी संगठन में बदलाव करते हुए अपने भतीजे और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी को एक बार फिर पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव (जनरल सेक्रेटरी) बनाए रखा है. हालांकि, इस बार उन्होंने राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन और डोला सेन को डिप्टी जनरल सेक्रेटरी नियुक्त किया.
अभिषेक बनर्जी के कटे पर!
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन नियुक्तियों के बाद अभिषेक बनर्जी के लिए संगठनात्मक फैसले पहले की तरह पूरी तरह एकतरफा लेना आसान नहीं होगा, क्योंकि अब उनके साथ दो उप महासचिव भी जिम्मेदारी निभाएंगे.
इसी के साथ तृणमूल कांग्रेस की पश्चिम बंगाल ईकाई का भी व्यापक पुनर्गठन किया गया है. लंबे समय से स्वास्थ्य और उम्र संबंधी कारणों से जिम्मेदारी से मुक्त होने की इच्छा जता रहे वरिष्ठ नेता और प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी को पद से हटा दिया गया है. उनकी जगह पूर्व वित्त राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) चंद्रिमा भट्टाचार्य को पश्चिम बंगाल तृणमूल कांग्रेस का नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है.
लोकसभा सांसद सजदा अहमद, राज्यसभा सदस्य ममता बाला ठाकुर, विधायक नयन बंदोपाध्याय और वरिष्ठ नेता स्वैत खोंडकर को प्रदेश ईकाई का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है. वहीं, बाबर अली, पुलक रॉय, असीमा पात्रा, अरूप बिस्वास और राजीव बनर्जी को प्रदेश महासचिव बनाया गया है. इनमें असीमा पात्रा वर्तमान में तृणमूल कांग्रेस की विधायक भी हैं. राज्य समिति के कार्यकारी सदस्यों में ज्योतिप्रिय मल्लिक, डॉ. राणा चटर्जी, बिदेश बोस, त्रिणांकुर भट्टाचार्य, जया दत्ता, तपस चटर्जी, वसुंधरा गोस्वामी और गौतम देव को शामिल किया गया है.
सायोनी घोष यूथ TMC की अध्यक्ष बनाई गईं
पार्टी के युवा संगठन की कमान अभिनेत्री से नेता बनीं और लोकसभा सांसद सायोनी घोष को अध्यक्ष तथा पूर्व विधायक मधुरिमा ठाकुर को महासचिव बनाकर सौंपी गई है. महिला संगठन की अध्यक्ष लोकसभा सांसद माला रॉय को बनाया गया है.
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छात्र संगठन की महासचिव प्रियंका अधिकारी होंगी, जबकि पूर्व मंत्री मलय घटक को पार्टी की ट्रेड यूनियन विंग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. किसान और कृषि मजदूर प्रकोष्ठ की जिम्मेदारी बेचाराम मन्ना और पूर्णेंदु बोस को दी गई है. इसके अलावा चंद्रिमा भट्टाचार्य, कल्याण बनर्जी, मदन मित्रा और कुणाल घोष पार्टी के आधिकारिक प्रवक्ता के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाते रहेंगे.