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UP किसान पाठशाला 8.0: 20 लाख से ज्यादा अन्नादाताओं ने ली हाईटेक खेती की ट्रेनिंग, यूपी में 2 करोड़ किसानों की होगी चांदी!

खेती की बात खेत पर’ थीम के साथ किसान पाठशाला 8.0 रबीः (2025-26) हुई. इसमें 20.15 लाख किसानों को प्रशिक्षित किया गया. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 12 दिसंबर को पद्मश्री किसान रामसरन वर्मा के गांव दौलतपुर, बाराबंकी से किसान पाठशाला का शुभारंभ किया था.

UP किसान पाठशाला 8.0: 20 लाख से ज्यादा अन्नादाताओं ने ली हाईटेक खेती की ट्रेनिंग, यूपी में 2 करोड़ किसानों की होगी चांदी!
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर किसान पाठशाला लगाकर किसानों को आधुनिक खेती, सरकार की योजनाओं व खेती में नवाचार के लिए नियमित रूप से प्रशिक्षित किया जा रहा है. कृषि विभाग के तत्वावधान में इस वर्ष भी किसानों को प्रशिक्षण दिया गया. 

योगी ने कहां से किसान पाठशाला का शुभारंभ किया था

‘खेती की बात खेत पर’ थीम के साथ किसान पाठशाला 8.0 रबीः (2025-26) हुई. इसमें 20.15 लाख किसानों को प्रशिक्षित किया गया. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 12 दिसंबर को पद्मश्री किसान रामसरन वर्मा के गांव दौलतपुर, बाराबंकी से किसान पाठशाला का शुभारंभ किया था.

जानें कितने पुरुष और महिला किसानों को नवाचार का दिया गया प्रशिक्षण 

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि रबी सीजन में कृषि विज्ञान केंद्र, पैक्स सोसाइटी, ग्राम पंचायत सचिवालय, प्रगतिशील किसानों के साथ ही प्रदेश के 21 हजार ग्राम पंचायतों में किसान पाठशाला का आयोजन किया गया. इसमें प्रदेश के कुल 20.15 लाख किसानों ने हिस्सा लिया. इसमें 12.62 लाख पुरुष व 7.53 लाख महिला किसानों को कृषि व सहवर्ती विभागों की योजनाओं के साथ ही कृषि विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों व कृषि विज्ञान केंद्रों में किए जा रहे नवाचारों से प्रशिक्षित किया गया.

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2017-18 से अब तक दो करोड़ से अधिक किसान किए जा चुके प्रशिक्षित 

कृषि विभाग के मुताबिक किसान पाठशाला के अंतर्गत 2017-18 से अब तक दो करोड़ से अधिक किसानों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है. किसान पाठशाला का उद्देश्य किसानों को आधुनिक खेती के लिए शिक्षित करना और उनकी आय दोगुनी करना है.

योगी सरकार की इस पहल का उद्देश्य क्या है 

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योगी सरकार की इस पहल का उद्देश्य किसानों को आधुनिक खेती की तकनीक, प्राकृतिक खेती, फसल प्रबंधन, सरकारी योजनाओं और आय बढ़ाने के तरीकों की व्यावहारिक ट्रेनिंग देना है, जिससे वे कम लागत में बेहतर पैदावार कर सकें और आत्मनिर्भर बनें.

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इसमें फसल सुरक्षा, मृदा स्वास्थ्य, बागवानी, नई तकनीक समेत विभिन्न पहलुओं पर जानकारी भी दी जाती है.

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