जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

‘अपराध तो नहीं…’ गंगा नदी पर की थी इफ्तार पार्टी, अब आरोपियों की जमानत पर SC के जज ने कर दी बड़ी टिप्पणी

यह मामला मार्च महीने का है, जब 14 मुस्लिम युवक नाव में सवार होकर गंगा नदी के बीच इफ्तार पार्टी कर रहे थे. उन्हें कई महीनों तक बेल न मिलने पर सुप्रीम कोर्ट के जज उज्जवल भुइयां ने कड़ी नाराजगी जताई है.

‘अपराध तो नहीं…’ गंगा नदी पर की थी इफ्तार पार्टी, अब आरोपियों की जमानत पर SC के जज ने कर दी बड़ी टिप्पणी
Image Source- IANS
Advertisement

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा नदी के बीच इफ्तार पार्टी करने पर खासा बवाल मचा था. नाव में युवकों के चिकन बिरयानी खाने के वीडियो वायरल होने के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया था. यहां तक कि उन्हें ईद भी जेल में ही मनानी पड़ी थी. सभी 14 आरोपियों की बेल अर्जी दो बार खारिज की गई. उन्हें कई महीनों तक जेल में रहना पड़ा फिर जाकर बेल जमानत मिली. अब इस मामले का जिक्र करते हुए सुप्रीम कोर्ट के जज ने अहम टिप्पणी की है. 

सुप्रीम कोर्ट के जज उज्जवल भुइयां ने आरोपियों को कई महीने जमानत न देने पर नाराजगी जताई है. उन्होंने कहा, 

‘गंगा नदी पर चिकन बिरयानी खाना कोई जुर्म नहीं है, इसे रोकने के लिए कोई कानून भी नहीं बनाया गया है, इसलिए युवकों को कई महीनों तक जेल में रखना वाजिब नहीं है.’

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस उज्जवल भुइयां ने यह टिप्पणी कोर्ट से जुड़े एक कार्यक्रम में की. उन्होंने इफ्तार पार्टी की घटना को लेकर कहा, 'ऐसे मामले में क्या आरोपियों को जमानत नहीं दी जा सकती, जो असल में कोई जुर्म भी नहीं है? मेरे ख्याल से चिकन बिरयानी खाना कोई जुर्म नहीं है. ऐसे में आरोपियों को गिरफ्तार करना और उन्हें कई महीनों तक जेल में रखना क्या सही है?'

क्या था गंगा नदी पर इफ्तार का पूरा मामला? 

Advertisement

यह मामला इसी साल मार्च महीने का है, जब 14 मुस्लिम युवक नाव में सवार होकर गंगा नदी के बीच इफ्तार पार्टी कर रहे थे. आरोप है कि युवकों ने बिरयानी खाने के बाद हड्डियां नदी में फेंक दी थी. वीडियो वायरल होने के बाद  उन सभी को गिरफ्तार किया गया था. युवकों को तीन महीने तक जेल में रहना पड़ा था. फिर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मई महीने में सशर्त माफीनामे के साथ उन्हें जमानत दी थी.

अब इस मामले का जिक्र सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जवल भुइयां ने किया और कई महीने तक जमानत न दिए जाने तक नाराजगी जताई. जस्टिस भुइयां ने यह भी कहा कि अदालतें अब ज़मानत की ऐसी शर्तें लगा रही हैं जो असल में व्यक्ति को अपनी असहमति ज़ाहिर करने से रोकती हैं. 

विरोध प्रदर्शन पर छात्रों की गिरफ्तारी पर उठाए सवाल 

इसके साथ-साथ जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने कैंपस में विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्रों की गिरफ्तारी को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा, ‘अपने विचार रखना सभी नागरिकों का मूलभूत अधिकार है. अगर छात्र अपने कॉलेज कैंपस में शांतिपूर्ण तरीके से अपने विचार रखते हैं और विरोध प्रदर्शन करते हैं, तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाता है. इसके बाद 30 से 40 दिनों तक उन्हें जमानत भी नहीं मिलती.’

यह भी पढ़ें- ‘छात्रों के प्रदर्शन से जुड़ी याचिका दाखिल ही नहीं हुई’, CJI सूर्यकांत ने मीडिया रिपोर्ट्स को बताया ‘भ्रामक’

Advertisement

यह भी पढ़ें

जस्टिस भुइयां ने आगे कहा, कोर्ट ने उन्हें ज़मानत तो दी, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि वे न सिर्फ़ अपना पासपोर्ट जमा करें, बल्कि किसी भी सार्वजनिक बैठक में हिस्सा न लें और न ही उसे संबोधित करें, चाहे वह बैठक फ़िज़िकल हो या वर्चुअल. ऐसी पाबंदियां लगाने से उनकी बुनियादी आज़ादी और स्वतंत्रता बुरी तरह प्रभावित होती है. 

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
G
Guest (अतिथि)
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें