जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

हाई कोर्ट जाएं…'ई-20' पेट्रोल पर बवाल के बीच विपक्ष को झटका, सुप्रीम कोर्ट ने PIL पर सुनवाई से किया इनकार

देश के कई इलाकों और विपक्ष की ओर से इथेनॉल ब्लेंडिंग पेट्रोल को लेकर हो रहे विरोध के बीच सुप्रीम कोर्ट ने 'ई-20 पेट्रोल' को लेकर दायर PIL पर सुनवाई से इनकार कर दिया है.

Author
31 Aug 2026
( Updated: 31 Aug 2026
01:32 PM )
हाई कोर्ट जाएं…'ई-20' पेट्रोल पर बवाल के बीच विपक्ष को झटका, सुप्रीम कोर्ट ने PIL पर सुनवाई से किया इनकार
Image Source-Supreme Court/ IANS
Advertisement

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 'ई-20 पेट्रोल' को लेकर दायर एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया. याचिका में पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बताने और इथेनॉल-मिश्रित ईंधन के गाड़ियों के साथ इस्तेमाल की अनुकूलता के बारे में अधिक पारदर्शिता के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी. वकील नरेंद्र गोस्वामी ने यह याचिका दायर की थी. 

वकील नरेंद्र गोस्वामी ने यह याचिका दायर की थी. सोमवार को जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की बेंच ने याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया. हालांकि, बेंच ने उन्हें अपनी शिकायत लेकर संबंधित हाई कोर्ट जाने की छूट दी.

'ई-20 पेट्रोल' पर विपक्ष को लगा झटका?

याचिका में मांग की गई कि हर पेट्रोल पंप के हर नोजल पर साफ-साफ लिखा जाए कि पेट्रोल में कितने प्रतिशत इथेनॉल मिला है. पेट्रोल की रसीद/बिल पर भी इथेनॉल का प्रतिशत लिखा जाए, ताकि ग्राहक को पता रहे कि उसने कौन-सा पेट्रोल खरीदा है.

Advertisement

इस याचिका में यह भी मांग की गई थी कि सरकार एक आधिकारिक वाहन-वार सूची/डेटाबेस बनाए, जिसमें बताया जाए कि कौन-सी गाड़ी ई-20 पेट्रोल के लिए उपयुक्त है और कौन-सी नहीं. इसमें कंपनी, मॉडल और निर्माण वर्ष आदि की जानकारी हो. जिन पुरानी गाड़ियों में ई-20 उपयुक्त नहीं है, उनके लिए धीरे-धीरे बदलाव की ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे उन्हें कम-इथेनॉल वाला पेट्रोल उपलब्ध कराया जा सके.

'ई-20 पेट्रोल' दायर PIL पर SC का सुनवाई से किया इनकार

याचिकाकर्ता ने खुद अपनी बात रखते हुए कहा कि वह केंद्र की इथेनॉल-ब्लेंडिंग पॉलिसी को चुनौती नहीं दे रहे हैं, बल्कि सिर्फ ग्राहकों को बेचे जा रहे पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा के बारे में जानकारी चाहते हैं. गोस्वामी ने कहा, "मैं पॉलिसी को चुनौती नहीं दे रहा हूं. मैं बस जानना चाहता हूं. मुझे जानने का अधिकार है. जब हम बिस्कुट का पैकेट भी खरीदते हैं, तो हमें उसमें मौजूद चीजों के बारे में पता होता है."

उन्होंने आगे कहा कि यह मामला नागरिकों के अधिकारों से जुड़ा है, न कि किसी निजी फायदे से. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से कहा, "हम जो खरीद रहे हैं, उसके बारे में जानने का हमें अधिकार है."

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट जाने को कहा

Advertisement

जस्टिस सुंदेश की अध्यक्षता वाली बेंच ने आखिरकार इस मामले पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया. बेंच ने गोस्वामी से कहा, "हाई कोर्ट जाइए और वहां याचिका दायर कीजिए."

पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल ब्लेंडिंग पूरी तरह वैज्ञानिक फैसला

इससे पहले देश में पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल (ई-20) मिलाने की नीति को लेकर जारी बहस के बीच दुनिया के प्रतिष्ठित रासायनिक विज्ञान संस्थानों में शामिल इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी (आईसीटी) के कुलपति और वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रोफेसर अनिरुद्ध बी. पंडित ने इस नीति का खुलकर समर्थन किया था. 

Advertisement

उन्होंने कहा कि ई-20 ब्लेंडिंग पूरी तरह वैज्ञानिक आधार पर तैयार की गई नीति है और इससे न केवल भारत की कच्चे तेल पर निर्भरता कम होगी, बल्कि किसानों की आय बढ़ेगी, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और देश ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा. 

प्रोफेसर अनिरुद्ध भालचंद्र पंडित ने कहा कि लोगों के बीच यह धारणा बनाई जा रही है कि ई-20 पेट्रोल से इंजन को नुकसान होगा, जबकि तकनीकी रूप से यह दावा सही नहीं है. उन्होंने बताया कि भारत में 1940 और 1950 के दशक में ऐसे वाहन चल चुके हैं, जो 100 प्रतिशत एथेनॉल पर चलते थे. ऐसे में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर सवाल उठाने का कोई ठोस वैज्ञानिक आधार नहीं है.

किसानों, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण तीनों को ई-20 से होगा फायदा: विशेषज्ञ

उन्होंने कहा, "एथेनॉल का ऊष्मीय मान पेट्रोल से थोड़ा कम होता है. इसलिए यदि पुराने इंजन में इग्निशन टाइमिंग और फायरिंग सिस्टम में आवश्यक बदलाव नहीं किए जाएं तो माइलेज और एक्सेलेरेशन में मामूली अंतर महसूस हो सकता है. हालांकि, आधुनिक तकनीक वाले इंजन में यह समस्या लगभग नहीं के बराबर है."

उन्होंने आगे कहा कि ई-20 से जुड़ी अधिकांश शिकायतें पुराने वाहनों से संबंधित हैं. पहले भारी कास्ट आयरन इंजन इस्तेमाल होते थे, जबकि अब हल्के एल्यूमीनियम और एलॉय आधारित इंजन बनाए जाते हैं. नए इंजन पहले से ही एथेनॉल मिश्रित ईंधन के अनुरूप डिजाइन किए जा रहे हैं.

Advertisement

उन्होंने बताया कि कुछ पुराने वाहनों में लगे रबर और पॉलिमर के पुर्जे एथेनॉल के संपर्क में आने पर प्रभावित हो सकते हैं. हालांकि, यह समस्या भी आधुनिक ग्रेड के पॉलिमर और रबर सामग्री के उपयोग से आसानी से दूर की जा सकती है.

क्या है ई-20 पेट्रोल में आ रही समस्याओं का कारण?

प्रोफेसर पंडित ने स्पष्ट किया कि इंजन में आने वाली कुछ समस्याओं का कारण ई-20 नहीं, बल्कि उसका गलत भंडारण हो सकता है. एथेनॉल में नमी सोखने की क्षमता अधिक होती है. यदि पेट्रोल-एथेनॉल मिश्रण पानी या अत्यधिक नमी के संपर्क में आ जाए तो उसमें पानी की मात्रा बढ़ सकती है, जिससे मिसफायरिंग, इंजन क्लॉगिंग या पावर कम होने जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं. इसलिए ईंधन के सुरक्षित परिवहन और स्टोरेज पर विशेष ध्यान देना जरूरी है.

उन्होंने आईएएनएस को बताया कि भारत अकेला ऐसा देश नहीं है जो एथेनॉल ब्लेंडिंग की दिशा में आगे बढ़ रहा है. ब्राजील जैसे देशों में कई वर्षों से पेट्रोल में कहीं अधिक मात्रा में एथेनॉल मिलाया जा रहा है. वहां तो ऐसे वाहन भी सफलतापूर्वक चल रहे हैं, जो पूरी तरह 100 प्रतिशत एथेनॉल पर आधारित हैं. इससे साबित होता है कि यह तकनीक पूरी तरह व्यवहारिक और सफल है.

प्रोफेसर पंडित ने कहा कि यदि इंजन तकनीक और आंतरिक दहन इंजन पर वैज्ञानिक अनुसंधान लगातार आगे बढ़ता रहा, तो भविष्य में पेट्रोल में 50 से 60 प्रतिशत तक एथेनॉल मिलाना भी संभव होगा. उन्होंने कहा कि आधुनिक कारें बिना किसी बड़ी समस्या के 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण के साथ काम कर रही हैं और कई वाहन इससे कहीं अधिक ब्लेंडिंग के लिए भी सक्षम हैं.

Advertisement

क्या है ई-20 को लेकर सोशल मीडिया पर भ्रम!

उन्होंने आगे कहा कि सोशल मीडिया पर ई-20 को लेकर कई तरह की भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं. वास्तविकता यह है कि इंजन को नुकसान नहीं होता, बल्कि इंजन तकनीक में समय के साथ आवश्यक सुधार किए जाते हैं. जैसे वाहन उद्योग ने बेहतर माइलेज के लिए इंजन का वजन कम किया और नई तकनीक अपनाई, उसी तरह एथेनॉल मिश्रित ईंधन के अनुरूप भी तकनीकी बदलाव किए जा रहे हैं.

प्रोफेसर अनिरुद्ध बी. पंडित ने आगे कहा कि एथेनॉल ब्लेंडिंग से सबसे बड़ा फायदा भारतीय किसानों को होगा. पहले एथेनॉल मुख्य रूप से शीरे से बनाया जाता था, लेकिन अब गन्ने के रस, बायोमास और अन्य कृषि स्रोतों से भी इसका उत्पादन किया जा रहा है. इससे किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिलेगा.

ये भी पढ़ें: दुश्मन के टैंक पर कहीं से भी होगा अटैक… अमेरिका से ये खतरनाक हथियार खरीदेगा भारत, हो गई डील!

उन्होंने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है. यदि देश में अधिक एथेनॉल का उत्पादन होगा और उसका उपयोग बढ़ेगा तो पेट्रोलियम आयात घटेगा, विदेशी मुद्रा की बचत होगी और भारत ऊर्जा के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बन सकेगा.

Advertisement

ये भी पढ़ें: दिल्ली-NCR में गाड़ियों पर बड़ा फैसला! 2027 से नए CNG-पेट्रोल-डीजल मालवाहक वाहनों पर रोक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रहे एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को लेकर प्रोफेसर पंडित ने कहा कि यह नीति पूरी तरह सही दिशा में उठाया गया कदम है. उनके अनुसार, आने वाले समय में दुनिया को नवीकरणीय ईंधनों पर अधिक निर्भर होना ही पड़ेगा और एथेनॉल इस दिशा में सबसे प्रभावी विकल्पों में से एक है.

यह भी पढ़ें

उन्होंने कहा कि भारत को एथेनॉल और ब्यूटेनॉल जैसे जैव-ईंधनों के उत्पादन को और बढ़ाना चाहिए, ताकि देश न केवल ऊर्जा सुरक्षा हासिल कर सके बल्कि वैश्विक स्तर पर स्वच्छ और टिकाऊ ईंधन के क्षेत्र में भी अग्रणी भूमिका निभा सके.

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
G
Guest (अतिथि)
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें