Advertisement

महाकुंभ 2025 के बाद आस्था का सबसे बड़ा संगम बना माघ मेला, 11,000 रुद्राक्ष धारण किए नागा साधु बने आकर्षण

11,000 रुद्राक्ष की माला पर बात करते हुए दिगंबर अजय गिरि ने बताया कि 26 साल पहले उन्होंने संन्यास लिया था और कुछ साल पहले ही 11,000 रुद्राक्ष को धारण किया है.

Author
12 Jan 2026
( Updated: 12 Jan 2026
03:53 PM )
महाकुंभ 2025 के बाद आस्था का सबसे बड़ा संगम बना माघ मेला, 11,000 रुद्राक्ष धारण किए नागा साधु बने आकर्षण

साल 2025 के महाकुंभ के बाद माघ मेला साल का सबसे बड़ा मेला बनकर उभरा है, जहां रोज हजारों की संख्या में श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाने के लिए पहुंच रहे हैं. 

महाकुंभ 2025 के बाद आस्था का सबसे बड़ा संगम बना माघ मेला

माघ मेले के संगम तट पर आस्था का नया रूप भी देखने को मिल रहा है. साधु और संतों का जमावड़ा तटों पर स्नान कर अनुष्ठानों में लीन दिख रहा है, तो वहीं कुछ ऐसे तपस्वी भी दिखने को मिल रहे हैं, जो अपनी कठोर तपस्या से भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए माघ मेले का हिस्सा बने हैं.

11 हजार रुद्राक्ष की माला और तन पर भस्म

हम बात कर रहे हैं 11,000 रुद्राक्ष की माला पहने एक नागा साधु की, जो निरंजनी पंचायती अखाड़ा के दिगंबर अजय गिरि हैं. माघ मेले में उन्हें सिर से लेकर गले तक में लंबी-लंबी रुद्राक्ष की माला को धारण करते हुए देखा गया. आईएएनएस से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा, "मैं ज्यादातर केदारनाथ में रहता हूं, और वाराणसी वह स्थान है जहां भगवान शिव अवतरित हुए थे. काशी वह नगर है जहां मोक्ष प्राप्त होता है, और ऐसा माना जाता है कि यहां मरने वालों को मोक्ष प्राप्त होता है. माघ मेले के दौरान, देश भर के सभी क्षेत्रों से श्रद्धालु भजन सुनने, गाने और आध्यात्मिक साधनाओं में भाग लेने के लिए एकत्रित होते हैं.

11,000 रुद्राक्ष की माला पर बात करते हुए दिगंबर अजय गिरि ने बताया कि 26 साल पहले उन्होंने संन्यास लिया था और कुछ साल पहले ही 11,000 रुद्राक्ष को धारण किया है. शिव पुराण में भी इस बात का जिक्र है कि जो 11,000 रुद्राक्ष की माला धारण करता है, वह शिव के लिए बहुत प्रिय होता है. इस रूप को धारण करने के लिए उन्होंने अपना पिंड दान किया और फिर साधु बनने की राह पर चले हैं.

"शिव को प्राप्त करने के लिए रुद्राक्ष और भस्म दोनों ही अनिवार्य"

शरीर पर रमी भस्म को लेकर साधु ने कहा कि भस्म शिव को प्रिय है और भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए रुद्राक्ष और भस्म दोनों ही अनिवार्य हैं. भस्म हमेशा याद दिलाती है कि जन्म और मृत्यु जीवन का सबसे बड़ा सत्य है. माघ मेले में नागा साधु और अघोरी बाबा श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं.

यह भी पढ़ें

वहीं माघ मेले को देखते हुए अयोध्या सर्कल ऑफिसर आशुतोष तिवारी ने बताया कि अयोध्या में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है. सभी प्रवेश मार्गों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है और पूरे मेले क्षेत्र की सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है.

Tags

Advertisement

टिप्पणियाँ 0

LIVE
Advertisement
Podcast video
Arunachal पर कब्जा करने की कोशिश करने वाले ‘घुसपैठियों’ को उठाकर फेंक देने की सीधी धमकी | Taro Sonam
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें