'फोन मत करना... अब मैं सिर्फ आपका बेटा नहीं हूं', आखिर अभिजीत दीपके ने अपने पिता से क्यों कही यह बात? वजह जानकर रह जाएंगे हैरान
दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के बाद सीजेपी प्रमुख अभिजीत दिपके की भूमिका चर्चा का विषय बनी हुई है. प्रदर्शन में उनकी सक्रिय भागीदारी के बीच उनके पिता भगवानराव दीपके का भावुक बयान भी सामने आया है.
Follow Us:
देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के बाद देश की राजनीति और शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिला. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उनके इस्तीफे के बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई है. इस पूरे घटनाक्रम ने छात्रों के आंदोलन को नई चर्चा के केंद्र में ला दिया है. अब हर तरफ अभिजीत दिपके को लेकर तरह-तरह के क़यास लगाए जा रहे हैं कि उनका अलग कदम क्या होगा.
प्रदर्शन में सीजेपी की रही अहम भूमिका
इस प्रदर्शन में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की भूमिका सबसे ज्यादा चर्चा में रही. पार्टी के प्रमुख अभिजीत दिपके लगातार प्रदर्शन का नेतृत्व करते नजर आए. आंदोलन के दौरान उनकी सक्रियता ने बड़ी संख्या में छात्रों को एक मंच पर जोड़ने का काम किया. इसी बीच एबीपी न्यूज़ की एक रिपोर्ट के मुताबिक़,अभिजीत के पिता भगवानराव दीपके का बयान भी सामने आया, जिसने पूरे घटनाक्रम को भावनात्मक मोड़ दे दिया.
पिता ने साझा की आंदोलन के दिनों की कहानी
भगवानराव दिपके ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान पूरा परिवार चिंता में था. खासकर 20 जुलाई के बाद हालात को लेकर उनकी बेचैनी और बढ़ गई थी. उन्होंने दिल्ली जाकर बेटे को घर लाने का मन बनाया, लेकिन अभिजीत ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया. इतना ही नहीं, उन्होंने अपने पिता से बार-बार फोन न करने की भी अपील की. अभिजीत ने कहा कि अब वह सिर्फ अपने परिवार का बेटा नहीं, बल्कि पूरे देश के छात्रों की आवाज बन चुका है. यह बात सुनकर परिवार भावुक भी हुआ और बेटे के संकल्प पर गर्व भी महसूस किया.
इस्तीफे पर क्या बोले भगवानराव दिपके
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर भगवानराव दिपके ने कहा कि यह फैसला छात्रों के गुस्से और उनकी भावनाओं को देखते हुए सही समय पर लिया गया कदम है. उनके अनुसार शुरुआत में आंदोलन सिर्फ जंतर-मंतर तक सीमित था, लेकिन बाद में इसकी गूंज देश के कई हिस्सों तक पहुंच गई. बड़ी संख्या में छात्र और अभिभावक इस मुद्दे पर मोदी सरकार से जवाब चाहते थे.
यह भी पढ़ें
गौरतलब है कि प्रह्लाद जोशी ने शिक्षा मंत्री का पदभार संभाल लिया है. उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए इसकी जानकारी भी साझा की. जोशी पहले से उपभोक्ता मामलों के मंत्री हैं और अब उन्हें शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. माना जा रहा है कि नए शिक्षा मंत्री के सामने छात्रों का भरोसा जीतना और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े अहम मुद्दों पर तेजी से काम करना सबसे बड़ी चुनौती होगी. आने वाले दिनों में सभी की नजर उनके फैसलों पर रहेगी.