×
जिस पर देशकरता है भरोसा

चिन्मय मिशन की 75वीं वर्षगांठ: विश्वभर के संतों का महासंगम, स्वामी चिन्मयानंद को बताया 'दूसरा विवेकानंद'

इस आध्यात्मिक महासंगम में स्वामी चिन्मयानंद जी की कालजयी विरासत और सनातन धर्म की ज्ञान-परंपरा को विश्वपटल पर प्रतिष्ठित करने में उनके अतुलनीय योगदान को हृदयपूर्वक नमन किया गया.

Author
12 May 2026
( Updated: 12 May 2026
01:28 PM )
चिन्मय मिशन की 75वीं वर्षगांठ: विश्वभर के संतों का महासंगम, स्वामी चिन्मयानंद को बताया 'दूसरा विवेकानंद'
Image Credit: Chinmaya Mission Chennai
Advertisement

चिन्मय मिशन की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में एक भव्य आध्यात्मिक महासंगम का आयोजन किया गया, जिसमें विश्वभर की विविध हिंदू परंपराओं के पूजनीय संतों और आध्यात्मिक विभूतियों ने एक साथ भाग लिया. यह आयोजन आधुनिक युग के सर्वाधिक सम्मानित आध्यात्मिक महापुरुषों के बीच एकता, श्रद्धा और परस्पर आदर की एक दुर्लभ भावना का जीवंत प्रमाण बना.

गुरुदेव को दी गई 'दूसरे विवेकानंद' की संज्ञा

इस महासंगम में स्वामी चिन्मयानंद जी की कालजयी विरासत और सनातन धर्म की ज्ञान-परंपरा को विश्वपटल पर प्रतिष्ठित करने में उनके अतुलनीय योगदान को हृदयपूर्वक नमन किया गया. रामकृष्ण मिशन के स्वामी शशिशिखानंद जी ने गुरुदेव को "दूसरे विवेकानंद" की संज्ञा देते हुए आध्यात्मिक जागरण और राष्ट्रीय चेतना पर उनके युगांतरकारी प्रभाव को रेखांकित किया.

गुरुदेव की देशभक्ति की सभी ने की प्रशंसा

Advertisement

माता अमृतानंदमयी मठ के स्वामी अमृत स्वरूपानंद जी ने गुरुदेव की देशभक्ति की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि उनकी राष्ट्रनिष्ठा भारत के आध्यात्मिक योगदान की गहन अनुभूति से उद्भूत थी.

इस अवसर पर इस्कॉन के मधु पंडित दास ने श्रील एसी भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद से जुड़ा एक प्रेरणादायी प्रसंग सुनाया. उन्होंने बताया कि श्रील प्रभुपाद ने गुरुदेव से अनुरोध किया था कि वे गुरुवायुर मंदिर और पद्मनाभस्वामी मंदिर के प्रशासन से इस्कॉन के विदेशी भक्तों को प्रवेश दिलाने में सहयोग करें. गुरुदेव ने सनातन धर्म की सार्वभौमिकता और समावेशिता का पुरज़ोर समर्थन करते हुए इस्कॉन के भक्तों को अपनी साधना और अनुशासन में "कट्टर हिंदू" कहा. उनकी अपील पर मंदिर प्रशासन ने सहर्ष स्वीकृति प्रदान की.

स्वामी अवधेशानंद गिरि जी ने स्वामी चिन्मयानंद को दी 'आदि शंकराचार्य के ज्ञान-हंस अवतार' की उपाधि 

Advertisement

यह भी पढ़ें

एक हृदयस्पर्शी श्रद्धांजलि में जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि जी ने स्वामी चिन्मयानंद को "आदि शंकराचार्य के ज्ञान-हंस अवतार" की उपाधि से विभूषित किया और परंपराओं तथा महाद्वीपों की सीमाओं से परे उनकी चिरस्थायी आध्यात्मिक विरासत एवं एकता की भावना को सादर नमन किया.

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें