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बंगाल में 60 रथयात्रा समितियों को 5-5 लाख की मदद, सावन में भक्तों पर हेलीकॉप्टर से होगी फूलों की बारिश, CM शुभेंदु का बड़ा एलान

Bengal: रथयात्रा और सावन जैसे त्यौहार बंगाल की संस्कृति का महत्वूर्ण हिस्सा रहे है. इन आयोजनों से लोगों की आस्था जुडी होती हैं और कई जगहों पर ये परंपराएं कई पीढ़ियों से चली आ रही हैं.

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14 Jul 2026
( Updated: 14 Jul 2026
11:27 AM )
बंगाल में 60 रथयात्रा समितियों को 5-5 लाख की मदद, सावन में भक्तों पर हेलीकॉप्टर से होगी फूलों की बारिश, CM शुभेंदु का बड़ा एलान
Image Source:IANS
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Bengal: पश्चिम बंगाल में धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों को लेकर सरकार की ओर से एक नई पहल की घोषणा की गई है. राज्य की पुरानी परंपराओं, खासकर रथयात्रा जैसे ऐतिहासिक त्योहारों को संरक्षित करने ओर धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई बड़े फैसले लिए गए है. सरकार का कहना है कि इन कदमों का मकसद सिर्फ आर्थिक सहायता देना नहीं है, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक पहचान और विरासत को मजबूत करना भी है. रथयात्रा जैसे त्यौहार बंगाल की संस्कृति का महत्वूर्ण हिस्सा रहे है. इन आयोजनों से लोगों की आस्था जुडी होती हैं और कई जगहों पर ये परंपराएं कई पीढ़ियों से चली आ रही हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने कुछ चुनिंदा रथयात्रा सिमितियों को आर्थिक मदद देने का फैसला किया हैं.
                                                                                              
60 रथयात्रा समितियों को मिलेगी आर्थिक सहायता

सरकार ने घोषणा की है कि लंबे समय से परंपरा निभा रही 60 रथयात्रा समितियों को 5-5 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी. इस राशि का इस्तेमाल खासतौर पर पुराने और पारंपरिक रथों की मरम्मत और संरक्षण के लिए करने की अपील की गई है.
कई जगहों पर लकड़ी से बने पुराने रथ वर्षों से धार्मिक आस्था और स्थानीय इतिहास की पहचान बने हुए हैं. समय के साथ इनकी हालत खराब होने लगी है. सरकार का मानना है कि आर्थिक सहयोग मिलने से इन ऐतिहासिक रथों को दोबारा सुरक्षित और भव्य बनाया जा सकेगा.

सरकार ने यह भी कहा कि शुरुआत में समितियों के चयन की प्रक्रिया में कुछ कमियां रह सकती हैं, लेकिन आने वाले समय में इसे और बेहतर बनाया जाएगा. इस पहल को एक छोटे कदम के रूप में देखा जा रहा है, जो भविष्य में बंगाल की सांस्कृतिक विरासत को और मजबूती दे सकता है.

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पिछली सरकार की नीतियों पर निशाना

इस मौके पर विपक्ष की ओर से पिछली तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए गए. आरोप लगाया गया कि पहले धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों को लेकर सरकार की भूमिका सीमित रहती थी और अब नई सरकार इन आयोजनों में सक्रिय भागीदारी की दिशा में आगे बढ़ रही है.
इस पहल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "विकास भी, विरासत भी" के विचार से जोड़ते हुए कहा गया कि विकास के साथ-साथ देश और राज्यों की पुरानी परंपराओं को बचाना भी जरूरी है.

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सावन महीने में श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुविधाएं

रथयात्रा के अलावा सावन महीने में भगवान शिव के भक्तों के लिए भी कई सुविधाओं की घोषणा की गई है. बड़ी संख्या में श्रद्धालु सावन के दौरान मंदिरों में जल चढ़ाने के लिए लंबी यात्राएं करते हैं. ऐसे में उनकी सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई नए इंतजाम किए जाएंगे.
शेओराफुली से तारकेश्वर धाम जाने वाले रास्ते पर हर पांच किलोमीटर की दूरी पर सेवा केंद्र बनाए जाने की योजना है. इन केंद्रों पर श्रद्धालुओं को पानी, आराम करने की जगह और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी. तारकेश्वर धाम के विकास के लिए करीब 15 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है. इसके अलावा जलपाईगुड़ी के प्रसिद्ध जल्पेश मंदिर, जयंती क्षेत्र और तारकेश्वर धाम जैसे धार्मिक स्थलों पर पुलिस सहायता केंद्र, अस्थायी मेडिकल कैंप, पेयजल व्यवस्था और विश्राम गृह बनाए जाएंगे. 

श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए खास तैयारी

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सरकार ने यह भी कहा है कि अगर मौसम ने साथ दिया तो सावन के हर सोमवार को श्रद्धालुओं के ऊपर हेलीकॉप्टर से गुलाब के फूलों की वर्षा की जाएगी. इसका उद्देश्य धार्मिक यात्रा को यादगार अनुभव बनाना बताया गया है. इन योजनाओं की वास्तविक स्थिति देखने के लिए मुख्यमंत्री 14 जुलाई को तारकेश्वर धाम का दौरा करेंगे. इस दौरान वह वहां की व्यवस्थाओं और विकास कार्यों का जायजा लेंगे.

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