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जूते-मोजे में गड्डियां, जेब में खुले नोट, 40 दिन, 70 घटनाएं...राम मंदिर में अजब-गजब चंदा चोरी पर SIT का खुलासा

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है कि कैसे पैसों की चोरी की जाती थी. SIT ने बेशकीमती जेवर और वस्तुओं को लेकर सोशल मीडिया के दावों पर भी स्पष्टता दी है. इसी बीच पुलिस ने तीन आरोपियों की 7 दिन की कस्टडी रिमांड मांगी है.

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07 Jul 2026
( Updated: 07 Jul 2026
08:26 AM )
जूते-मोजे में गड्डियां, जेब में खुले नोट, 40 दिन, 70 घटनाएं...राम मंदिर में अजब-गजब चंदा चोरी पर SIT का खुलासा
Ram Mandir Trust Meeting/ Image Source: IANS
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राम मंदिर में दान चोरी का मामला सामने आने के बाद पहली बार हुई राम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट की बैठक हंगामेदार रही. चंपत राय की आखिरकार महासचिव पद से विदाई हो गई और अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार हो गया. इतना ही नहीं, कृष्ण मोहन को राम मंदिर ट्रस्ट में चंपत राय की जगह अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है. इसी बीच न सिर्फ SIT की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में बड़े खुलासे हुए हैं, बल्कि पूरे मामले को लेकर अयोध्या पुलिस ने भी अपनी कार्रवाई तेज कर दी है.

आरोपियों की रिमांड पर सुनवाई

आपको बता दें कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में अयोध्या पुलिस ने कोर्ट से तीन प्रमुख आरोपियों— करुणेश पांडे, अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा की सात दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड की मांग की है. अयोध्या कोर्ट मंगलवार को दोपहर 12 बजे सुनवाई कर फैसला सुनाएगी. ये तीनों आरोपी उन आठ लोगों में शामिल हैं, जिन्हें फिलहाल 13 जुलाई तक न्यायिक हिरासत (ज्यूडिशियल कस्टडी) में रखा गया है.

SIT की जांच रिपोर्ट के प्रमुख खुलासे

चोरी का तरीका: आपको बता दें कि यूपी के अवर सचिव (गृह) को सौंपी गई प्रारंभिक रिपोर्ट में हुए खुलासों से संबंधित एक कॉपी राम मंदिर ट्रस्ट को भी भेजी गई और उन्हें पूरी चोरी को लेकर अवगत कराया गया कि कैसे पैसों की गिनती वाले कक्ष में गड्डियों और नोटों के साथ हेरफेर किया गया. चंदा गिनने वाले कर्मचारियों ने गड्डियों को अपनी जेब, मोजों, कपड़ों और जूतों सहित अन्य स्थानों पर छिपाया, जो कि सीसीटीवी (CCTV) में भी कैद हुआ.

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70 संदिग्ध घटनाएं: जांच रिपोर्ट में ऐसे करीब 70 संदिग्ध मामलों का उल्लेख किया गया है. SIT की जांच के अनुसार, 27 अप्रैल 2026 से 5 जून 2026 के बीच उपलब्ध CCTV फुटेज में गिनती कक्ष के अंदर कई बार ऐसा किया गया है. इससे पहले भी ऐसी ही घटनाओं के होने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि इससे पहले के फुटेज ट्रस्ट के पास उपलब्ध नहीं हैं. इतने दिनों तक के सीसीटीवी के बैकअप नहीं रखे जाते हैं.

लापरवाही और नियमों की अनदेखी: जांच में यह भी सामने आया कि यह कोई एक-दो घटनाएं नहीं थीं, बल्कि कई दिनों तक दोहराई जाने वाली एक व्यवस्थित प्रक्रिया थी. रिपोर्ट के अनुसार, गिनती कक्ष में निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया. प्रवेश और निकास के समय तलाशी नहीं ली गई, कर्मचारियों के निजी सामान पर प्रभावी नियंत्रण नहीं था, कई हंडियों की नकदी मिलाकर गिनी जाती थी और मूल्यवान वस्तुओं के रिकॉर्ड एवं सत्यापन में भी गंभीर कमियां पाई गईं.

मानकों के अनुपालन में गंभीर लापरवारही

SIT ने अपनी जांच में पाया कि पैसे की चोरी और गड्डियों को छिपाने की यह एक अकेली घटना नहीं है. यह एक सिलसिलेवार और अनवरत की गई चोरी का ही हिस्सा है, जो मौजूद सीसीटीवी फुटेज में दिखा. इसके अलावा, जांच में ट्रस्ट की ओर से इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए गंभीर लापरवाही बरती गई और ट्रस्ट के ही संविधान में लिखे मानकों का पालन नहीं किया गया.

मसलन बिना जेब वाले कपड़े पहनकर कैश और दान की गिनती वाले कमरे में जाने का नियम है. सबकी जाते-आते वक्त जांच होना, ड्रेस पहनकर जाना, सीसीटीवी मॉनिटरिंग और पैसे की गिनती SBI की निगरानी में करवाना था, लेकिन ऐसा कतई नहीं किया गया.

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यह साफ तौर पर देखा गया कि गिनती कक्ष में निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया. इतना ही नहीं, एंट्री-एग्जिट दोनों वक्त ऐसे ही इन्हें जाने दिया गया. कर्मचारियों के निजी सामानों पर भी ट्रस्ट की निगरानी नहीं थी; कोई भी, कहीं भी सामान लेकर जा रहा था. इसके अलावा, कई हंडियों की नकदी मिलाकर गिनी जाती थी और मूल्यवान वस्तुओं के रिकॉर्ड एवं सत्यापन (मिलान) में भी गंभीर कमियां पाई गईं.

SIT की रिपोर्ट में ट्रस्ट की निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठे हैं. जांच के मुताबिक सुरक्षा व्यवस्था, CCTV निगरानी, SOP के अनुपालन, तलाशी व्यवस्था और पर्यवेक्षण में गंभीर लापरवाही बरती गई, जिससे चोरी और गबन जैसी घटनाओं को रोकना मुश्किल हो गया.

सोशल मीडिया के अफवाहों पर SIT ने दिया स्पष्टीकरण

हालांकि, रिपोर्ट में सोशल मीडिया पर तमाम तरह के दावों और अफवाहों को लेकर भी स्पष्टता दी गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, सोशल मीडिया पर मूल्यवान वस्तुओं, जैसे— चांदी की ईंटों और अन्य बहुमूल्य चढ़ावे के गायब होने संबंधी कई आरोपों की प्रथम दृष्टया पुष्टि नहीं हुई, लेकिन मूल्यवान वस्तुओं के प्रबंधन और रिकॉर्ड प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाने की सिफारिश की गई है. यह रिपोर्ट फिलहाल प्रारंभिक जांच रिपोर्ट है और मामले में आगे विस्तृत जांच तथा आवश्यक कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया जारी रहेगी.

पुलिस ने क्या कुछ कार्रवाई और रिकवरी की?

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इसी जांच के सिलसिले में पुलिस अब इन तीनों (मुख्य आरोपियों) से विस्तार से पूछताछ करना चाहती है. पुलिस का कहना है कि कस्टडी रिमांड मिलने पर वह आरोपियों से चोरी के पूरे मामले, चढ़ावे की रकम कहां-कहां गई और अन्य लोगों की भूमिका की जानकारी हासिल करेगी. आरोपियों के मोबाइल फोन भी जब्त कर लिए गए हैं. पुलिस यह जानना चाहती है कि क्या आरोपियों ने फोन से कुछ डेटा डिलीट तो नहीं किया है.

राम मंदिर चंदा चोरी के मामले में एसआईटी (SIT) गठित की गई थी. इसके बाद पुलिस ने आठ लोगों को गिरफ्तार किया, जिनके नाम अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रामशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर यादव उर्फ ​​टिन्नू यादव हैं. इन सभी पर राम मंदिर की दान पेटियों से नकदी और कीमती सामान की हेराफेरी करने की साजिश रचने का आरोप है.

किससे कितनी नकदी मिली?

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अनुकल्प मिश्रा: 16.82 लाख रुपए बरामद किए गए हैं.

अविनाश शुक्ला: 20.39 लाख रुपए की बड़ी रकम बरामद की गई. पुलिस ने जांच के दौरान उसके पास से डॉलर और कुछ अन्य मुद्राएं भी बरामद कीं. उसके परिसर से जब्त की गई नकदी में 500 रुपए के 3,600 से अधिक नोट, 200 रुपए के 500 से अधिक नोट और 10, 20, तथा 50 रुपए के नोट शामिल हैं, जिससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि उसने यह सब मंदिर में चढ़ावे से अर्जित किया था.
करुणेश पांडे: इनके पास से 500, 200, 50, 10 और 20 रुपए के नोट बरामद किए गए. आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, पुलिस ने उसके पास से कुल 18.07 लाख रुपए नकद बरामद किए.

आरोपियों की संपत्तियों की हो रही जांच

पुलिस सूत्रों ने बताया कि अपराध से अर्जित संपत्ति की तेजी से जांच की जा रही है. राजस्व विभाग से आरोपियों और उनके परिवार के सदस्यों के जमीन रिकॉर्ड मांगे गए थे, जिनमें से अब तक करीब 20 लैंड पार्सल के रिकॉर्ड पुलिस को मिल चुके हैं. इन दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है.

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जांच में यह देखा जा रहा है कि संबंधित संपत्तियां कब खरीदी गईं और आरोपियों का राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़ाव कब हुआ. पुलिस के लिए इन दोनों तारीखों का मिलान बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इस पूरे मामले में एसआईटी की टीम को जांच के लिए अतिरिक्त समय दिया गया है. सरकार का दावा है कि आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी.

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