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मणिपुर में जवानों की मौत से भयंकर गुस्से में असम राइफल्स, चप्पा-चप्पा खाक छान रही सेना, BSF-पुलिस भी एक्शन में

मणिपुर में अपने दो जवान की मौत के बाद सेना एक्शन में है. इसके बाद असम राइफल्स ने सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया है. सेना, BSF और पुलिस के साथ मिलकर उग्रवादियों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी गई है. इसी बीच सेनापति शहर में उग्र भीड़ ने असम राइफल्स के कैंप पर हमला करने की ख़बर है.

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15 Jul 2026
( Updated: 15 Jul 2026
01:39 PM )
मणिपुर में जवानों की मौत से भयंकर गुस्से में असम राइफल्स, चप्पा-चप्पा खाक छान रही सेना, BSF-पुलिस भी एक्शन में
Image Source: X/ @official_dgar
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मणिपुर में असम राइफल्स के दो जवानों के शहीद होने के बाद सेना चप्पा-चप्पा, घर-घर खाक छान रही है. इस दौरान सेना, BSF और पुलिस, तीनों के साथ मिलकर एक बड़ा ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है. पूरे इलाके में तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया. हर देखने वाले, शंका के आधार पर तलाशी ली जा रही, चेकिंग हो रही है.

मणिपुर में जवानों की मौत का बदला लेगी सेना!

आपको बता दें कि मणिपुर में उग्रवाद विरोधी अभियान को और तेज करते हुए असम राइफल्स ने भारतीय सेना, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और मणिपुर पुलिस के साथ मिलकर एक बड़ा संयुक्त सर्च और सैनिटाइजेशन ऑपरेशन चलाया. यह अभियान मंगलवार की सुबह उखरूल जिले के टीएम कासोम इलाके में चलाया गया. 

मणिपुर में चप्पा-चप्पा खाक छान रही असम राइफल्स

असम राइफल्स के अनुसार, यह संयुक्त अभियान हाल ही में राष्ट्रीय राजमार्ग-202 पर शांगशाक के पास नुंगशांग क्षेत्र में राष्ट्रविरोधी तत्वों द्वारा किए गए घात लगाकर हमले (अंबुश) के बाद शुरू किया गया. सुरक्षा बलों का उद्देश्य पूरे इलाके को पूरी तरह सुरक्षित बनाना, संदिग्ध गतिविधियों पर रोक लगाना और उग्रवादियों के खिलाफ कार्रवाई को और मजबूत करना है.

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क्या है पूरा मामला?

गौरतलब है कि 6 जुलाई को मणिपुर के हिंसा प्रभावित उखरूल जिले में नुंगशांग कोंग के पास इंफाल-दीमापुर राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-2) पर संदिग्ध नागा उग्रवादियों ने असम राइफल्स के वाहन पर घात लगाकर हमला किया था, जिसमें दो जवान शहीद हो गए थे. शहीद जवानों की पहचान वारंट अधिकारी बलवंत सिंह और हवलदार चंद्र मोहन सिंह के रूप में हुई थी.

वहीं, नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालिम-इसाक-मुइवा (एनएससीएन-आईएम) ने भी इस हमले में अपनी किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है. संगठन का कहना है कि वह केंद्र सरकार के साथ हुए युद्धविराम समझौते और जारी भारत-नागा शांति प्रक्रिया के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है.

BSF-पुलिस भी ऑपरेशन में शामिल!

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इस अभियान में असम राइफल्स, भारतीय सेना, बीएसएफ और मणिपुर पुलिस ने आपसी तालमेल के साथ इलाके की गहन तलाशी ली और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए व्यापक सैनिटाइजेशन अभियान चलाया. सुरक्षा एजेंसियां लगातार इस क्षेत्र में निगरानी बनाए हुए हैं ताकि भविष्य में किसी भी तरह की राष्ट्रविरोधी गतिविधि को रोका जा सके.

इससे पहले 30 जून को भी असम राइफल्स ने सिविल प्रशासन और मणिपुर पुलिस के साथ मिलकर मणिपुर के सीमावर्ती कामजोंग जिले में म्यांमार से आए विस्थापित नागरिकों की पहचान, सत्यापन और बायोमेट्रिक पंजीकरण के लिए एक संयुक्त अभियान शुरू किया था.

रक्षा प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत ने उस समय बताया कि यह पहल सीमा प्रबंधन को मजबूत करने और म्यांमार से आए विस्थापित लोगों तक नियंत्रित और व्यवस्थित मानवीय सहायता पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. पूर्वी मणिपुर का कामजोंग जिला म्यांमार के साथ बिना बाड़ वाली अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करता है.

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उग्रवादियों को ढूंढ़ रही सेना!

जिला प्रशासन के निर्देशों के तहत चलाए गए उस अभियान में 40 अधिकारियों और कर्मियों की संयुक्त टीम शामिल थी. इसमें नागरिक प्रशासन, पुलिस, चिकित्सा विभाग और असम राइफल्स के जवानों ने मिलकर विस्थापित लोगों की पहचान का सत्यापन किया, उनका बायोमेट्रिक डेटा दर्ज किया और उनकी जनसांख्यिकीय (डेमोग्राफिक) जानकारी का दस्तावेजीकरण किया था.

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इसी बीच मणिपुर के सेनापति शहर में उग्र भीड़ ने असम राइफल्स के कैंप पर हमला कर दिया. अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि भीड़ ने पत्थरबाजी, आगजनी और तोड़फोड़ की. माना जा रहा है कि यह हमला सशस्त्र उग्रवादियों के खिलाफ चलाए जा रहे सुरक्षा अभियान को बाधित करने के उद्देश्य से किया गया. 

हिंसा के दौरान भीड़ ने असम राइफल्स के कई वाहनों में तोड़फोड़ की और उन्हें क्षतिग्रस्त कर दिया. एक हल्के वाहन को आग के हवाले कर दिया गया, जबकि दो ट्रकों को पलटकर गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया गया. घटना में एक नागरिक की कार को भी कथित तौर पर आग लगा दी गई.

रक्षा प्रवक्ता ने बताया कि मकुइलोंगडी क्षेत्र में, जो ओकलोंग स्थित नामित एनएससीएन (आईएम) कैंप से लगभग दो किलोमीटर पश्चिम में है, सशस्त्र कैडरों की मौजूदगी संबंधी विश्वसनीय खुफिया जानकारी मिलने के बाद असम राइफल्स ने क्षेत्र प्रभुत्व गश्त और तलाशी अभियान शुरू किया.

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उन्होंने कहा कि खुफिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया पोस्टों से संकेत मिले थे कि सशस्त्र कैडर निर्धारित कैंपों से बाहर हथियारों और वर्दी के साथ घूम रहे थे, जो स्थापित युद्धविराम (सीजफायर) के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है.

साथ ही, सीजफायर मॉनिटरिंग ग्रुप (सीएफएमजी) को इन कथित उल्लंघनों की औपचारिक जानकारी भी दी गई और इससे जुड़े सुरक्षा संबंधी मुद्दों से अवगत कराया गया. प्रवक्ता के अनुसार, अभियान के दौरान मकुइलोंगडी और ओकलोंग गांवों की ओर बढ़ रही असम राइफल्स की टुकड़ियों को बड़ी संख्या में लोगों ने रोक लिया, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं.

असम राइफल्स के जवानों ने अत्यधिक संयम बरतते हुए स्थानीय प्रतिनिधियों से बातचीत की और उन्हें भरोसा दिलाया कि अभियान का उद्देश्य केवल सुरक्षा सुनिश्चित करना और क्षेत्र में शांति बनाए रखना है. साथ ही, यह भी आश्वासन दिया गया कि संबंधित अधिकारियों की अनुमति के बिना कोई भी टुकड़ी किसी गांव में प्रवेश नहीं करेगी.

मणिपुर में असम राइफल्स कैंप पर हमला!

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स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई जब मंगलवार रात नौ बजे सेनापति शहर में बड़ी संख्या में लोगों के इकट्ठा होने और असम राइफल्स कैंप की ओर मार्च करने की सूचना मिली. असम राइफल्स की टुकड़ियों के वापस लौटने के बावजूद रात करीब 9:30 बजे बड़ी भीड़ कैंप तक पहुंच गई और पत्थरबाजी, संपत्ति में तोड़फोड़ तथा आगजनी की कोशिश की.

Image SOURCE: IANS
Image SOURCE: IANS

सेना ने फौरन स्थिति को लिया काबू में!

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सेनापति पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) को तत्काल तैनात किया गया. बाद में लौटते समय भीड़ के एक हिस्से ने असम राइफल्स के वाहनों में तोड़फोड़ की. एक हल्के वाहन को आग लगा दी गई, जबकि दो ट्रकों को पलटकर क्षतिग्रस्त कर दिया गया. हिंसा के दौरान एक नागरिक की कार को भी कथित तौर पर जला दिया गया. सुरक्षा बलों, मणिपुर पुलिस और सीआरपीएफ के संयुक्त प्रयासों से स्थिति पर काबू पा लिया गया और मंगलवार-बुधवार की मध्यरात्रि तक पूरी भीड़ को तितर-बितर कर दिया गया.

रक्षा प्रवक्ता ने कहा कि सुरक्षा बल शांति बनाए रखने, सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और कानून के शासन को कायम रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं. उन्होंने कहा कि सुरक्षा बल सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के अपने दायित्व का निर्वहन करते हुए लगातार संयम और पेशेवर व्यवहार का परिचय दे रहे हैं.

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इस बीच, एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि 6 जुलाई को मणिपुर के उखरूल जिले में हुए घात लगाकर किए गए हमले, जिसमें असम राइफल्स के दो जवान शहीद हो गए थे, के सिलसिले में तीन संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है. उन्होंने बताया कि टीएम कासोम, लितान और सिकिबुंग क्षेत्रों में चलाए गए तलाशी अभियान के दौरान इन लोगों को हिरासत में लिया गया.

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