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US-ईरान की जंग में मची कालाबाजारी, लूट खसोट के बीच कहां माफ हुई छात्रों की फीस? रहने-खाने का खर्चा भी आधा

कालाबाजारी और जमाखोर एक्टिव होकर अपने काम में लग गए हैं. इस आपदा में अवसर ढूंढते कुछ मुनाफाखोर लोगों के बीच एक तबका ऐसा भी है जो मदद और मानवता का संदेश दे रहा है.

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02 Apr 2026
( Updated: 02 Apr 2026
12:21 PM )
US-ईरान की जंग में मची कालाबाजारी, लूट खसोट के बीच कहां माफ हुई छात्रों की फीस? रहने-खाने का खर्चा भी आधा
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Kota Coaching Student: मिडिल ईस्ट में जारी भयंकर संघर्ष की लपटें पूरी दुनिया तक पहुंच रही हैं. तेल कीमतों में आग लगी है, महंगाई लगातार बढ़ रही है. भारत में भी इस जंग का असर साफ दिखाई दे रहा है. गैस किल्लत के बीच देश में खाने-पीने का सामान महंगा हो गया, रेस्टोरेंट से लेकर रेहड़ी पटरी वालों तक ने खाने के दाम बढ़ा दिए हैं. 

कालाबाजारी और जमाखोर एक्टिव होकर अपने काम में लग गए हैं. इस आपदा में अवसर ढूंढते कुछ मुनाफाखोर लोगों के बीच एक तबका ऐसा भी है जो मदद और मानवता का संदेश दे रहा है. बात हो रही है भारत के एजुकेशन हब कोटा की. जहां नए सेशन की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन छात्र टेंशन फ्री हैं, इस बार न कमरे महंगे हुए हैं, न फीस बढ़ी हैं न ही हॉस्टल का किराया बढ़ने की बजाय आधा हो गया है. 

कितना कम हुआ हॉस्टल का किराया, छात्रों को क्या-क्या सहूलियत? 

हर साल भारी संख्या में छात्र इंजीनियर और डॉक्टर का सपना लेकर कोटा पहुंचते हैं. पिछले कुछ साल में देखा गया कि हॉस्टल मालिक छात्रों से मोटी फीस लेते थे, लेकिन अब कोटा में छात्र आसानी से रह रहे हैं वो भी तमाम सुख सुविधाओं के साथ. 

एक रिपोर्ट के मुताबिक, जो कमरा पहले 15 हजार का था वह अब 9 से 11 हजार का है. इस कमरे में एसी, खाना, लॉन्ड्री जैसी सुविधा भी इसी किराए में शामिल हैं. वहीं, PG की बात करें तो पहले किराया 5-6 हजार था वहीं अब 2 से 4 हजार है. जिससे छात्रों को काफी हद तक राहत मिली है. इसी चार्ज में बिजली-पानी का बिल भी शामिल है. सबसे महंगा इलाका माने जाने वाले राजीव गांधी नगर में हॉस्टल किराया 3 हजार तक है. 

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इतना ही नहीं कोचिंग संस्थान छात्रों को 50% स्कॉलरशिप भी दे रहे हैं. ये स्कॉलरशिप छात्रों को उनके मार्क्स के अनुसार दी जाएगी. वहीं, सामाजिक सारोकार के तहत कुछ छात्रों को हॉस्टल और रहने खाने की फ्री सुविधा भी दी जा रही है. इस साल कोई कोचिंग संस्थानों ने कोई फीस भी नहीं बढ़ाई. यानी सुविधा के साथ-साथ आर्थिक संबल भी मिल रहा है. इससे पढ़ाई का प्रेशर कम करने में भी छात्रों को मदद मिलेगी. 

हॉस्टल एसोसिएशन ने क्या बताया? 

एक रिपोर्ट के मुताबिक, हॉस्टल एसोसिएशन के अध्यक्ष नवीन मित्तल का कहना है कि कोविड के बाद अचानक स्टूडेंट्स की संख्या 1.90 लाख तक पहुंच गई थी, जिससे डिमांड बढ़ने पर रेट 15 हजार तक चले गए थे. हालांकि अब हालात नियंत्रण में है. 

एडवांस किराए पर भी रोक

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हॉस्टल संचालको ने जंग से बढ़ी कीमतों और गैस किल्लत का बोझ छात्रों और उनके परिवार पर नहीं पड़ने दिया. साथ ही साथ इस बार हॉस्टल संचालकों ने एडवांस किराए पर भी रोक लगा दी है. इसके साथ-साथ छात्रों की काउंसिलिग और जरूरी हेल्पलाइन सेवा भी शुरू की गई है. ये हेल्पलाइन सेवा 24 घंटे चलती है और छात्रों की सुविधा के साथ-साथ सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा जाता है. एक समय था जब कोटा में कोचिंग छात्रों के लगातार सुसािड से जुड़े मामले सामने आ रहे थे, लेकिन अब यही कोटा शहर छात्रों की सुविधा और मदद की मिसाल बन रहा है. 

यह भी पढ़ें- मिडिल ईस्ट जंग के PM मोदी ने ली CCS की बड़ी बैठक, 40 अहम पेट्रोकैमिकल्स पर कस्टम ड्यूटी में छूट का ऐलान

दरअसल, ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद पूरी दुनिया का आर्थिक पहिया कमजोर हो गया. होर्मुज का रास्ता बंद होने से तेल और गैस की आपूर्ति में कमी आई है. ऐसे में गैस सिलेंडर के लिए लंबी-लंबी कतारे दिखने लगी है. पेट्रोल पंप पर भी भारी भीड़ देखी गई. हालांकि PM मोदी खुद कई बार कह चुके हैं कि हालात बदले जरूर हैं लेकिन देश में गैस और तेल की किल्लत नहीं है कुछ लोग अफवाह फैलाकर पैनिक कर रहे हैं और कालाबाजारी जमाखोरी का मौका ढूंढ रहे हैं. PM मोदी जमाखोरों पर सख्त एक्शन के लिए राज्यों को निर्देश जारी कर चुके हैं. 

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