×
जिस पर देशकरता है भरोसा

CM हिमंत पर 12 हजार बीघा जमीन हड़पने का आरोप ‘चुनावी शिगूफा’, BJP ने रॉबर्ट वाड्रा का नाम लेकर कर दिया तगड़ा पलटवार

कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने सीएम हिमंत बिस्वा सरमा और उनके परिवार पर असम में लगभग 12,000 बीघा जमीन पर कब्जे का आरोप लगाया है. उन्होंने जांच जारी होने की बात कही है. वहीं, सीएम सरमा ने आरोपों को झूठा बताते हुए कांग्रेस नेताओं के खिलाफ नौ फरवरी को मानहानि की कार्रवाई करने का ऐलान किया है.

CM हिमंत पर 12 हजार बीघा जमीन हड़पने का आरोप ‘चुनावी शिगूफा’, BJP ने रॉबर्ट वाड्रा का नाम लेकर कर दिया तगड़ा पलटवार
Himanta Biswa Sarma (File Photo)
Advertisement

असम में कुछ महीनों बाद होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सियासी माहौल लगातार गर्म होता जा रहा है. जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होता दिख रहा है. इस बार राजनीतिक टकराव का केंद्र बने हैं मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व लोकसभा में उपनेता गौरव गोगोई. दोनों नेताओं के बीच चल रही ज़ुबानी जंग अब जमीन घोटाले और कथित विदेशी संबंधों तक पहुंच गई है, जिसने असम की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है.

कांग्रेस ने लगाए थे आरोप

बुधवार को कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने एक प्रेसवार्ता कर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और उनके परिवार पर गंभीर आरोप लगाए. गोगोई का दावा है कि मुख्यमंत्री और उनके परिजनों ने पूरे असम में लगभग 12,000 बीघा, यानी 3,960 एकड़ से अधिक जमीन पर कब्जा कर रखा है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस द्वारा की गई आंतरिक जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं. गोगोई के मुताबिक यह आंकड़ा अंतिम नहीं है और जांच अभी जारी है, जिससे आने वाले दिनों में इसमें और इजाफा हो सकता है.

भूमि घोटाले का किया था जिक्र 

Advertisement

गोगोई ने यह भी आरोप लगाया कि इस कथित भूमि घोटाले को छिपाने के लिए मुख्यमंत्री ने उनके खिलाफ पाकिस्तानी संबंधों का मुद्दा उछाला. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत थे, तो मुख्यमंत्री ने पिछले साल 10 सितंबर को यह मुद्दा क्यों नहीं उठाया. गोगोई का कहना है कि बीते पांच महीनों तक यह मामला ठंडे बस्ते में था और अब अचानक चुनावी माहौल में इसे उछाला जा रहा है.

CM हिमंत ने किया पलटवार 

वहीं, दूसरी तरफ़ इस मामले में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इन आरोपों को पूरी तरह झूठा और मनगढ़ंत बताया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप मानहानिकारक हैं. सरमा ने ऐलान किया कि वह नौ फरवरी को कांग्रेस के कई बड़े नेताओं, जिनमें गौरव गोगोई, भूपेश बघेल, जितेंद्र सिंह और देबब्रत सैकिया शामिल हैं, के खिलाफ दीवानी और फौजदारी मानहानि की कार्रवाई शुरू करेंगे. मुख्यमंत्री का कहना है कि यह आरोप केवल राजनीतिक लाभ के लिए लगाए जा रहे हैं.

क्या है पूरा मामला?

इस पूरे विवाद में भारतीय जनता पार्टी भी खुलकर सामने आ गई है. भाजपा के प्रवक्ता रंजीब कुमार सरमा ने गोगोई के आरोपों को बेबुनियाद बताया. उन्होंने कहा कि भारतीय कानूनों के अनुसार कोई भी व्यक्ति 50 बीघा से अधिक जमीन नहीं रख सकता. ऐसे में 12,000 बीघा जमीन पर कब्जे का दावा अपने आप में हास्यास्पद है. उन्होंने जमीन सीमा अधिनियम का हवाला देते हुए कहा कि यह आरोप कानूनी रूप से भी संभव नहीं है और इससे यह साफ होता है कि गोगोई को कानून की बुनियादी जानकारी तक नहीं है.

Advertisement

अदालत का क्यों नहीं ले रहे सहारा?

बीजेपी प्रवक्ता ने रॉबर्ट वाड्रा का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर गोगोई के पास कोई ठोस दस्तावेज या सबूत हैं, तो उन्हें अदालत का रुख करना चाहिए. उन्होंने कहा कि देश की न्यायिक प्रणाली भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए मौजूद है. बोफोर्स से लेकर वाड्रा मामलों तक, कई मामलों में लोगों ने अदालत का सहारा लिया है. अगर सच में कोई घोटाला है, तो उसका फैसला भी अदालत में ही होना चाहिए.

गोगोई ने CM हिमंत के आरोप को किया खारिज 

Advertisement

वहीं, गौरव गोगोई ने अपने ऊपर लगे पाकिस्तानी संबंधों के आरोपों को सिरे से खारिज किया है. उन्होंने इसे मुख्यमंत्री का ध्यान भटकाने वाला कदम बताया. गोगोई का कहना है कि मुख्यमंत्री को यह अंदेशा है कि कांग्रेस उनके और उनके परिवार से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और भूमि हड़पने के मामलों की फाइल तैयार कर रही है. इसी डर से पुराने और बेबुनियाद आरोपों को फिर से हवा दी जा रही है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह पूरा मामला एक राजनीतिक ड्रामा है और अंत में यह एक “फ्लॉप शो” साबित होगा.

यह भी पढ़ें

बताते चलें कि असम की राजनीति में यह टकराव आने वाले चुनावों को और दिलचस्प बनाने वाला है. आरोपों की यह जंग अब सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं रही, बल्कि कानूनी कार्रवाई और अदालत तक जाने की चेतावनी में बदल चुकी है. आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि इन आरोपों में कितनी सच्चाई सामने आती है और जनता इन दावों पर कितना भरोसा करती है. चुनावी समर में उतरे असम के मतदाताओं के लिए यह मुद्दा अब एक बड़ा राजनीतिक सवाल बन चुका है.

टिप्पणियाँ 0
G
Guest (अतिथि)
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
अधिक
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें