‘मजाक बना दिया…’ बाबरी का जिक्र कर भोजशाला फैसले पर भड़के AIMIM चीफ ओवैसी, सुप्रीम कोर्ट में देंगे चुनौती
ओवैसी ने हाई कोर्ट के इस फैसले पर निराशा जताई है. उन्होंने कहा, इस फैसले से अब नए विवादों का रास्ता खुल गया है.
Follow Us:
AIMIM chief Asaduddin Owaisi on Bhojshala: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में धार भोजशाला में हिंदू पक्ष की बड़ी जीत हुई. कोर्ट ने भोजशाला परिसर को मंदिर करार दिया है. अदालत ने उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें भोजशाला परिसर में हिंदुओं को नमाज पढ़ने की इजाजत दी गई थी. इसके बाद ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमिन (AIMIM) के अध्यक्ष और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने प्रतिक्रिया दी है.
ओवैसी ने हाई कोर्ट के इस फैसले पर निराशा जताई है. उन्होंने कहा, यह फैसला भारत के संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है. धार भोजशाला मामले में आए फैसले पर असदुद्दीन ओवैसी ने सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा, अदालत ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों और कानूनी पहलुओं को नजरअंदाज किया है.
हाई कोर्ट के फैसले पर ओवैसी ने क्या कहा?
हैदराबाद सांसद ने कहा, ऐसा कहा जा रहा है कि वहां एक मंदिर था, लेकिन वहां मिले शिलालेखों से पता चलता है कि वह एक गुरुकुल था, जहां राजा भोज ने संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा दिया. जिस प्रकार हम संसद को लोकतंत्र का मंदिर कहते हैं, इसका यह अर्थ नहीं है कि वह पूजा स्थल है.
हैदराबाद में मीडिया से बातचीत के दौरान ओवैसी ने कहा कि अदालत ने 1935 के धार स्टेट गजट, 1985 के वक्फ रजिस्ट्रेशन और पूजा स्थल अधिनियम को नजरअंदाज कर दिया. उन्होंने कहा कि अदालत ने इस मामले से जुड़े चल रहे सिविल विवाद और मालिकाना हक के मुद्दे पर भी ध्यान नहीं दिया.
ASI पर ओवैसी ने क्या सवाल उठाए?
ASI 1951 और 1952 में यह कह चुका है कि ये मस्जिद है. भोज उत्सव मनाने के लिए तब ASI ने परमिशन देने से मना कर दिया था.
उन्होंने कहा कि यह फैसला बिल्कुल बाबरी मस्जिद मामले की तरह है. बाबरी मस्जिद मामले में अदालत ने कहा था कि मुसलमानों का उस जगह पर कब्जा नहीं था, लेकिन भोजशाला मामले में आज तक मुस्लिम पक्ष का कब्जा बना हुआ था. उन्होंने पहले भी बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद पर आए फैसले को गलत बताया था और कहा था कि वह फैसला सिर्फ आस्था के आधार पर दिया गया था. उस समय उन्होंने चेतावनी दी थी कि यह फैसला भविष्य में ऐसे कई और विवादों का रास्ता खोल देगा.
AIMIM प्रमुख ने कहा कि उस वक्त कई लोगों ने उन्हें चुप रहने की सलाह दी थी, लेकिन आज वही स्थिति सामने आ रही है, जिसकी उन्होंने आशंका जताई थी. बाबरी मस्जिद मामले में जो आधार बनाया गया था, उसी तरह की राहत अब इस मामले में भी दी गई है. यह फैसला संविधान की मूल भावना के अनुरूप नहीं है. बाबरी मस्जिद-राम मंदिर विवाद के फैसले में एक धर्म को प्राथमिकता दी गई और दूसरे धर्म के पूजा अधिकारों को कमजोर किया गया.
ओवैसी ने आशंका जताई कि इस फैसले से अब नए विवादों का रास्ता खुल गया है और भविष्य में कोई भी व्यक्ति किसी भी धार्मिक स्थल को चुनौती दे सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद-राम मंदिर फैसले में पूजा स्थल अधिनियम को संविधान की मूल संरचना से जोड़ा था, लेकिन मौजूदा फैसले में इस कानून को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है.
यह भी पढ़ें
उन्होंने यह भी कहा कि 1995 में कुछ गुलाम परस्त मुसलमानों ने दस रुपए के स्टैम्प पेपर पर लिखकर मंगलवार को पूजा करने की अनुमति दे दी, उन्होंने गलती की. वह किसी के या मेरे अब्बा या अम्मी की प्रॉपर्टी नहीं है, वह एक मस्जिद है, उसका मालिक अल्लाह होता है. पूजा स्थल अधिनियम का मजाक बना दिया गया है. उन्होंने उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट से उन्हें न्याय मिलेगा.
कृपया Google से लॉग इन करें टिप्पणी पोस्ट करने के लिए
Google से लॉग इन करें