भारत बंद को 'आप' का समर्थन, मजदूर-किसानों के हक में उतरेगी पार्टी

पंजाब सरकार के कामकाज का उल्लेख करते हुए आम आदमी पार्टी ने कहा कि राज्य में मजदूरों के न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी की गई है, किसानों से गेहूं और धान की फसल की समय पर खरीद सुनिश्चित की गई है, और आम जनता को मुफ्त बिजली, स्वास्थ्य सेवाएं तथा शिक्षा जैसी सुविधाएं दी गई हैं.

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12 Feb 2026
( Updated: 12 Feb 2026
05:07 AM )
भारत बंद को 'आप' का समर्थन, मजदूर-किसानों के हक में उतरेगी पार्टी

आम आदमी पार्टी (आप) ने 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों द्वारा गुरुवार को बुलाए गए राष्ट्रव्यापी भारत बंद का समर्थन करने का ऐलान किया है. पार्टी ने पंजाब सहित पूरे देश के मजदूरों, किसानों, दुकानदारों, छोटे व्यापारियों और आम नागरिकों से शांतिपूर्ण तरीके से भारत बंद को सफल बनाने की अपील की है. 

'आप' ने स्पष्ट किया कि यह बंद किसी एक राजनीतिक दल का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि करोड़ों मेहनतकश लोगों के स्वाभिमान, न्याय और अधिकारों की लड़ाई है. पार्टी ने कहा कि वह इस संघर्ष की अग्रिम पंक्ति में खड़ी है और पंजाब सहित देशभर में उसके कार्यकर्ता मजदूरों और किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर बंद में शामिल होंगे.

केंद्र की नीतियों पर निशाना

पार्टी ने भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की नीतियों पर हमला बोलते हुए उन्हें मजदूर-विरोधी और किसान-विरोधी करार दिया. 'आप' प्रवक्ताओं ने कहा कि केंद्र द्वारा लागू किए गए नए श्रम संहिताओं (लेबर कोड्स) के जरिए मजदूरों के अधिकारों पर सीधा हमला किया गया है. इन नए कानूनों से नौकरी की सुरक्षा कमजोर हुई है, कानूनी संरक्षण घटा है और नियुक्ति एवं छंटनी के मामलों में नियोक्ताओं को खुली छूट दे दी गई है. इससे करोड़ों मेहनतकश लोगों के अधिकार और हित गंभीर खतरे में पड़ गए हैं.

किसानों को भी नुकसान का आरोप

'आप' नेताओं ने कहा कि किसान संगठनों द्वारा इस बंद को समर्थन दिया जाना इस बात का प्रमाण है कि केंद्र की आर्थिक नीतियों ने केवल मजदूरों को ही नहीं, बल्कि किसानों को भी गहरा नुकसान पहुंचाया है. पार्टी हमेशा मजदूरों, किसानों और आम लोगों के हक के लिए सड़कों पर उतरती रही है.

पंजाब सरकार के कामकाज का जिक्र

पंजाब सरकार के कामकाज का उल्लेख करते हुए आम आदमी पार्टी ने कहा कि राज्य में मजदूरों के न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी की गई है, किसानों से गेहूं और धान की फसल की समय पर खरीद सुनिश्चित की गई है, और आम जनता को मुफ्त बिजली, स्वास्थ्य सेवाएं तथा शिक्षा जैसी सुविधाएं दी गई हैं. इससे यह साबित होता है कि कौन सी पार्टी सच में जनता के साथ खड़ी है.

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केंद्र सरकार की नीतियों पर आपत्ति जताते हुए पार्टी ने आरोप लगाया कि मजदूरों के अधिकार छीनकर चुनिंदा कॉरपोरेट घरानों के मुनाफे की रक्षा की जा रही है. नए श्रम कानूनों के तहत नियोक्ताओं को बिना जवाबदेही के कर्मचारियों को हटाने की खुली छूट दी गई है, जबकि किसानों को उनकी फसल का उचित दाम नहीं मिल रहा है. इसी वजह से 10 ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों को मिलकर भारत बंद का आह्वान करना पड़ा है.

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