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यूपी चुनाव से ठीक पहले मंत्रिमंडल में फेरबदल, BJP ने पश्चिम से लेकर पूर्वांचल तक सामाजिक संतुलन का दिया संदेश

यह मंत्रिमंडल विस्तार केवल मंत्रियों की नियुक्ति नहीं, बल्कि यूपी में पश्चिम से पूर्वांचल तक हर वर्ग को सत्ता में हिस्सेदारी का अहसास कराकर सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने का एक बड़ा चुनावी दांव है.

Image Source: IANS/X/@kpmaurya1
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उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने दूसरे कार्यकाल का दूसरा मंत्रिमंडल विस्तार कर बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है. जन भवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने आठ नेताओं को मंत्री पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई. इस विस्तार में भाजपा ने ब्राह्मण, ओबीसी, दलित और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सामाजिक समीकरणों को साधने पर विशेष फोकस किया है.

चार नए चेहरों को मिली राज्यमंत्री की जिम्मेदारी

पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी और ऊंचाहार से विधायक मनोज कुमार पांडेय को कैबिनेट मंत्री बनाया गया. वहीं, मेरठ दक्षिण से विधायक डॉ. सोमेंद्र सिंह तोमर और सिकंदरा से विधायक अजीत पाल को प्रमोट कर राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) की जिम्मेदारी सौंपी गई. इसके अलावा, कृष्णा पासवान, कैलाश सिंह राजपूत, सुरेंद्र दिलेर और हंसराज विश्वकर्मा को राज्यमंत्री बनाया गया. मंत्रिमंडल विस्तार में सबसे ज्यादा चर्चा भूपेंद्र सिंह चौधरी और मनोज कुमार पांडेय की एंट्री को लेकर रही.

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भूपेंद्र चौधरी- जाट राजनीति का बड़ा चेहरा

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पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट राजनीति का बड़ा चेहरा माने जाने वाले भूपेंद्र चौधरी लंबे समय तक भाजपा संगठन की कमान संभाल चुके हैं. मुरादाबाद के किसान परिवार से आने वाले चौधरी ने विश्व हिंदू परिषद से सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की और 1991 में भाजपा से जुड़ने के बाद संगठन में लगातार महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं.

मनोज पांडेय बीजेपी के नए ब्राह्मण चेहरा

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प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर भी उन्होंने संगठन विस्तार में अहम भूमिका निभाई थी. वहीं, रायबरेली की ऊंचाहार सीट से विधायक मनोज कुमार पांडेय को भाजपा की ब्राह्मण राजनीति का नया चेहरा माना जा रहा है. अखिलेश यादव सरकार में मंत्री रह चुके मनोज कुमार पांडेय ने लोकसभा चुनाव के दौरान समाजवादी पार्टी से दूरी बनाकर भाजपा का समर्थन किया था.

रायबरेली-अमेठी बेल्ट में सेंध लगाने की तैयारी

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रायबरेली-अमेठी बेल्ट में ब्राह्मण मतदाताओं और पारंपरिक सपा वोट बैंक में सेंध लगाने के लिहाज से भाजपा ने उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दी है. मेरठ दक्षिण से लगातार दूसरी बार विधायक बने डॉ. सोमेंद्र सिंह तोमर का राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ. एबीवीपी से निकले सोमेंद्र सिंह तोमर ने छात्रसंघ राजनीति से लेकर भाजपा युवा मोर्चा तक संगठन में सक्रिय भूमिका निभाई. 2017 और 2022 में जीत दर्ज करने के बाद अब उन्हें प्रमोशन देकर पश्चिमी यूपी में भाजपा के युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने का संकेत माना जा रहा है.

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दलित समीकरण के लिए सुरेंद्र दिलेर मंत्री बने

सिकंदरा से विधायक अजीत पाल को भी प्रमोट कर राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया है. वह योगी सरकार में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग में राज्यमंत्री के रूप में काम कर चुके हैं. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दलित समीकरण साधने के लिए भाजपा ने खैर सुरक्षित सीट से विधायक सुरेंद्र दिलेर को मंत्रिमंडल में शामिल किया है. जाटव समाज से आने वाले सुरेंद्र दिलेर राजनीतिक विरासत वाले परिवार से ताल्लुक रखते हैं. उनके दादा किशन लाल दिलेर कई बार सांसद और विधायक रहे, जबकि पिता राजवीर सिंह दिलेर भी भाजपा के सांसद और विधायक रहे थे.

पूर्वांचल में जातीय समीकरण मजबूत करने पर जोर

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उपचुनाव में जीत के बाद उन्हें मंत्री बनाकर भाजपा ने दलित राजनीति में बड़ा संदेश देने की कोशिश की है. पूर्वांचल और गैर-यादव पिछड़ा वर्ग के समीकरण को मजबूत करने के लिए भाजपा ने विधान परिषद सदस्य हंसराज विश्वकर्मा को भी जगह दी है. विश्वकर्मा समाज में मजबूत पकड़ रखने वाले हंसराज को संगठन का जमीनी नेता माना जाता है और वाराणसी क्षेत्र में उनकी सक्रिय राजनीतिक पहचान रही है.

क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को साधा गया

फतेहपुर जिले की खागा सुरक्षित सीट से लगातार तीन बार विधायक चुनी गईं कृष्णा पासवान को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है. भाजपा लंबे समय से उन्हें दलित महिला चेहरे के तौर पर आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही थी. वहीं कन्नौज की तिर्वा सीट से विधायक कैलाश सिंह राजपूत को शामिल कर पार्टी ने लोधी-राजपूत वोट बैंक को साधने का प्रयास किया है.

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2027 चुनाव के लिए बीजेपी की बड़ी तैयारी

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पेशे से वकील और किसान कैलाश सिंह राजपूत की क्षेत्र में मजबूत सामाजिक पकड़ मानी जाती है. राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, भाजपा ने इस विस्तार के जरिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश, अवध और पूर्वांचल के साथ-साथ ब्राह्मण, जाट, दलित, लोधी और गैर-यादव ओबीसी वर्गों को साधने की व्यापक रणनीति पर काम किया है. 2027 विधानसभा चुनाव से पहले इस विस्तार को भाजपा की चुनावी तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है. 

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