क्या आपका बच्चा भी हो रहा है 'Eating Disorder' का शिकार? जानें इसके लक्षण और ठीक करने के उपाय
यूनाइटेड नेशंस इंटरनेशनल चिल्ड्रेंस इमरजेंसी फंड (यूनिसेफ) के अनुसार, ईटिंग डिसऑर्डर एक ऐसी मानसिक स्थिति है जिसे बिल्कुल भी हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। जब किसी बच्चे का खाने, वजन या व्यायाम के साथ रिश्ता अनहेल्दी हो जाता है, तो इसे ईटिंग डिसऑर्डर कहा जाता है। इसमें बच्चा अपनी सेल्फ-वर्थ को अपने वजन या शारीरिक दिखावट के आधार पर आंकने लगता है।
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आजकल के बच्चे कई तरह की शारीरिक और मानसिक समस्याओं का शिकार हो रहे हैं जिसकी वजह भागदौड़ भरी जिंदगी और सोशल मीडिया का प्रभाव माना जाता है। ऐसे में एक गंभीर समस्या जो माता पिता के ध्यान में जल्दी नहीं आती वो है eating disorder यानी खाने-पीने से जुड़ी गड़बड़ी। माता-पिता के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि उनका बच्चा सामान्य रूप से खा-पी रहा है या नहीं।
यूनाइटेड नेशंस इंटरनेशनल चिल्ड्रेंस इमरजेंसी फंड (यूनिसेफ) के अनुसार, ईटिंग डिसऑर्डर एक ऐसी मानसिक स्थिति है जिसे बिल्कुल भी हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। जब किसी बच्चे का खाने, वजन या व्यायाम के साथ रिश्ता अनहेल्दी हो जाता है, तो इसे ईटिंग डिसऑर्डर कहा जाता है। इसमें बच्चा अपनी सेल्फ-वर्थ को अपने वजन या शारीरिक दिखावट के आधार पर आंकने लगता है।
क्या हैं इसके लक्षण?
खाने के समय घबराहट
बेचैनी
वजन को लेकर अत्यधिक चिंता होना
इस बात को समझना जरूरी है कि ईटिंग डिसऑर्डर होना बच्चे की कोई गलती नहीं है। ऐसे समय में बच्चे को डांटने या टोकने से बचें, इसके बजाय आपके प्यार, धैर्य और सही मार्गदर्शन से आप ये समस्या ठीक कर सकते है। अगर आपको शंका हो तो तुरंत किसी बच्चे के मनोवैज्ञानिक या डॉक्टर से संपर्क करें। बच्चे से बात करते समय कह सकते हैं- “अच्छा खाना और खाने का मजा लेना खुद की देखभाल का हिस्सा है। मुझे चिंता है कि तुम अपनी देखभाल ठीक से नहीं कर पा रहे हो, इसलिए हम मदद लेंगे।”
एक्सपर्ट बताते हैं कि ये समस्या किसी भी उम्र, लिंग, नस्ल या शरीर के आकार वाले बच्चे को हो सकती है। मनोवैज्ञानिक डॉ. लिसा डामूर के हवाले से यूनिसेफ बताता है, ये समस्या अकेले किसी एक कारण से नहीं बल्कि कई कारणों के मिलने से होती है। ईटिंग डिसऑर्डर मानसिक तनाव या एंग्जायटी, डिप्रेशन जैसी अन्य मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं, आनुवंशिक कारण (परिवार में किसी को पहले से यह समस्या हो), सोशल मीडिया पर पतले या परफेक्ट बॉडी के आदर्शों का दबाव या परिवार में खाने को लेकर गलत बातचीत।
इसमें कैलोरी गिनना, कुछ खास खाद्य पदार्थों को पूरी तरह से छोड़ देना, खाना छिपाकर खाना या खाने के बारे में झूठ बोलना, हद से ज्यादा व्यायाम करना, शरीर, वजन या दिखावट को लेकर बार-बार नाराजगी जताना या खाने के समय घबराहट महसूस करना यदि ये लक्षण नजर आएं तो देर न करें। जितनी जल्दी समस्या का पता चल जाए, उतना आसान होता है इलाज।
घर पर अपनाएं ये आसान उपाय
घर पर कुछ चीजों को आसानी से किया जा सकता है, जिसमें माता-पिता का अहम रोल होता है- इसके लिए सबसे पहले तो खाने को अच्छा-बुरा न बताएं, खाने को ‘जंक फूड’ या ‘खराब’ कहने की बजाय संतुलित और पौष्टिक आहार की बात करें। शरीर की बात सुनना सिखाएं, जैसे बच्चे को बताएं कि भूख लगने पर खाएं और पेट भरने पर रुकें। साथ ही सकारात्मक उदाहरण पेश करें, खुद स्वस्थ खान-पान और व्यायाम की आदत अपनाएं।
आज के समय में जरूरी है कि परिवार के साथ समय बिताएं, साथ में हेल्दी भोजन बनाएं और खाएं। व्यायाम को खेल और मस्ती का रूप दें। इसके साथ ही मीडिया पर नजर रखें, बच्चे को उन सोशल मीडिया कंटेंट से दूर रखें जो अनरियलिस्टिक ब्यूटी स्टैंडर्ड दिखाते हैं।
डिजिटल मीडिया का असर बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर न पड़े इस बात का ध्यान रखना बेहद ज़रूरी है। बच्चों का मानसिक सुकून किसी भी चीज़ से ज़्यादा महत्वपूर्ण है इसीलिए हमारी ज़िम्मेदारी सिर्फ उन्हें अच्छा खाना परोसने तक ही नहीं है, बल्कि खाने को लेकर उनके नजरिए को स्वस्थ बनाना भी हमारा ही कर्तव्य है।
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Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान और जागरूकता के उद्देश्य से है. प्रत्येक व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और आवश्यकताएं अलग-अलग हो सकती हैं. इसलिए, इन टिप्स को फॉलो करने से पहले अपने डॉक्टर या किसी विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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