क्या है हंता वायरस का सबसे ख़तरनाक एंडीज स्ट्रेन? ना कोई वैक्सीन, ना इलाज, जानें बचने का तरीका
इन दिनों अंटार्कटिका जा रहे एक क्रूज़ शिप हुई एक रहस्यमयी मौतों के बाद बंता वायरस अचानक से चर्चाओं में आ गया है. यूं तो मेडिकल साइंस पिछले 70 सालों इस वायरस के बारे में जानता है.
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कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया था, जहां कई लोगों की जानें गईं तो आम जीवन ठप सा पड़ गया. कोरोना महामारी ने दुनिया को ये सिखा दिया है कि किसी भी अनजान वायरस को हल्के में नहीं लिया जा सकता है.
ना कोई वैक्सीन, ना कोई इलाज
इन दिनों अंटार्कटिका जा रहे एक क्रूज़ शिप हुई एक रहस्यमयी मौतों के बाद बंता वायरस अचानक से चर्चाओं में आ गया है. यूं तो मेडिकल साइंस पिछले 70 सालों इस वायरस के बारे में जानता है. लेकिन इसका एक ख़ास म्यूटेशन वैज्ञानिकों के लिए गहरी चिंता का विषय बन गया है. इसे एंडीज स्ट्रेन कहा जाता है. चिंता की वजह बेहद डरावनी है इस वायरस का डेथ रेट 50% तक है और आज तक इसकी कोई वैक्सीन या इलाज मौजूद नहीं है.
जानें क्या है पूरा मामला
1 अप्रैल 2026 को अर्जेंटीना के उशुआया शहर से एक आलीशान क्रूज़ जहाज़ अंटार्कटिका के एक सफ़र पर निकलता है. इस शिप पर 23 देशों के लगभग 150 यात्री और क्रू मेंबर्स सवार थे. शुरुआत में सब कुछ बढ़िया था. पार्टियां चल रही थीं. लोग एन्जॉय कर रहे थे. लेकिन किसी को भी इस बात का अंदाजा नहीं था कि समुद्र के बीचों-बीच ये सफ़र जल्द ही एक भयानक सपने में बदलने वाला है.
सफ़र के महज़ पाँच दिन बाद, एक 70 साल के डच यात्री को अचानक तेज बुख़ार, सिर दर्द और डायरिया की शिकायत महसूस होती है. शिप के डॉक्टर इलाज शुरु करते हैं, लेकिन कुछ ही घंटों में उसे साँस लेने में भयंकर तकलीफ़ होने लगती है. हालत इतनी तेज से बिगड़ती है कि 11 अप्रैल को जहाज़ पर ही उसकी तड़प-तड़प कर मौत हो जाती है.
बात यहीं खत्म नहीं होती है, 24 अप्रैल को जब जहाज़ अफ्रीका के पास सेंट हेलेना आइलैंड पर रुकता है, तो उस डच यात्री की पत्नी अपने पति के शव के साथ उतर जाती है, वो वहां से साउथ अफ्रीका जाती है, ताकि एम्सटर्डम की फ्लाइट ले सके. लेकिन 25 अप्रैल को एयरपोर्ट पर ही वो अचानक कोलैप्स कर जाती है और अगले ही दिन उसकी भी मौत हो जाती है. वहीं दूसरी तरफ़ समुद्र में फंसे क्रूज़ पर मौजूद अन्य यात्री भी एक-एक कर बीमार पड़ने लगते हैं और 2 मई को एक जर्मन महिला की भी जान चली जाती है.
एक के बाद एक हो रही रहस्यमयी मौतों से दहशत फैल जाती है.जब वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन यानि WHO की टीम जाँच करती है, तो जो सच सामने आता है, वो सभी को चौंका देता है. क्योंकि क्रूज़ पर हो रही मौतों का कारण था हंता वायरस.
क्या है हंता वायरस और इसकी ख़ौफ़नाक हिस्ट्री
हंता वायरस कोई नया नाम तो नहीं है, ये वायरसों का एक पूरा परिवार है, जो मुख्य रुप से चूहों में पनपता है. इंसानों में ये दो तरह की जानलेवा बीमारियां पैदा करता है.
HFRS ( गुर्दे के सिंड्रोम के साथ रक्तस्त्रावी बुख़ार)
ये मुख्य रुप से एशिया और यूरोप में देखा जाता है. इसमें मरीज़ की किडनी फेल हो जाती है और शरीर के अंदर ब्लीडिंग शुरु हो जाती है.
HPS ( हंता वायरस पल्मोनरी सिंड्रोम)
ये नॉर्थ और साउथ अमेरिका में फैलता है, इसमें मरीज़ के फेफड़ों में पानी भर जाती है, जिससे उसे सांस लेने में तकलीफ़ होती है घुटन से मौत हो जाती है. इसका मृत्यू दर 50% तक है, यानि हर दो में से एक संक्रमित व्यक्ति की जान जा सकती है.
इस वायरस का पहला आउटब्रेक कब दिखा था?
इस वायरस का पहला आउटब्रेक 1950 के कोरियन युद्ध के दौरान दिखा था, जब 3000 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक रहस्यमयी तरीके से बीमार पड़ गए थे. वहीं 1993 में अमेरिका की नावाहो आदिवासी जनजाति के कई स्वस्थ युवाओं की अचानक मौत ने दुनिया को चौंका दिया था. आदिवासियों की पुरानी कहानियों और विज्ञान के मेल से तब ये खुलासा बुआ था कि भारी बारिश से चूहों का खाना बढ़ता है, चूहों की आबादी तेजी से बढ़ती है और फिर ये वायरस इंसानों में फैलता है.
एंडीज स्ट्रेन: हंता वायरस का सबसे ख़तरनाक रुप
आमतौर पर हंता वायरस चूहों के मल-मूत्र और लार से इंसानों में फैलता है, इसके अलग-अलग वेरिएंट्स शरीर के अलग-अलग अंगों पर हमला करते हैं. एशिया और यूरोप में मिलने वाला वायरस किडनी फेलियर HFRS का कारण बन सकता है, जबकि अमेरिकी महाद्वीपों में पाया जाने वाला वेरिएंट सीधे फेफड़ों पर अटैक करता है. HPS जिससे मरीज़ के फेफड़ों में पानी भर जाता हा और घुटन से मौत हो जाती है.
सालों तक वैज्ञानिकों का मानना था कि यह वायरस केवल चूहों के संपर्क में आने से इंसानों में आता है, इंसान से इंसान में नहीं. लेकिन 1996 में अर्जेंटीना में आए एक आउटब्रेक ने यह थ्योरी पलट दी. वैज्ञानिकों ने 'एंडीज स्ट्रेन' की पहचान की यह हंता फैमिली का इकलौता ऐसा स्ट्रेन है जो ह्यूमन-टू-ह्यूमन ट्रांसमिशन यानी इंसान से इंसान में फैलाव की क्षमता रखता है. क्रूज पर हुई मौतों के पीछे भी इसी बागी स्ट्रेन का हाथ था. वैज्ञानिक रिसर्च में यह भी सामने आया है कि इस स्ट्रेन से संक्रमित कुछ लोग 'सुपर स्प्रेडर' बन जाते हैं, जो तेजी से कई लोगों को संक्रमित कर सकते हैं.
कैसे फैलता है ये वायरस और क्रूज़ पर कैसे पहुंचा?
हंता वायरस, कोविड-19 या फ्लू की तरह ये हवा में नहीं फैलता है. एंडीज स्ट्रेन के एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलने के लिए बहुत ही करीबी और लंबे समय तक शारीरिक संपर्क की जरुरत होती है. जैसे एक ही बिस्तर शेयर करना, मरीज़ के बॉडी फ्लूइड्स के संपर्क में आना या किसी संक्रमित की बहुत क़रीब से देखभाल करना. यही वजह है कि ये ज़्यादातर परिवार के सदस्यों या देखभाल करने वालों के बीच फैलता है. इसकी ट्रांसमिशन विंडो बहुत छोटी होती है. बीमारी की शुरुआत में ये सिर्फ एक दिन के लिए फैलता है.
क्रूज़ के मामले में जाँच से पता चला है मरने वाला डच कपल मार्च में उशुआया में एक बर्ड वाचिंग टूर पर गया था. वहां वे अनजाने में एक ऐसे लैंडफिल में चले गए, जहां बहुत सारे चूहे थे. इत्तेफाक से संक्रमित होने के ठीक बाद वो क्रूज़ पर सवार हो गए और वहां अपने करीबी लोगों में ये संक्रमण फैला दिया.
क्या है बचाव का तरीका?
इस वायरस से लड़ने के लिए कोई एंटी वायरल दवा या वैक्सीन नहीं है, इसलिए बचाव ही इसका इकलौता हथियार है. हेल्थ एक्सपर्ट्स इसके लिए कुछ बुनियादी बातों पर ज़ोर देते हैं. अपने घरों और स्टोरेज रुमस को इस तरह सील करें कि चूहे अंदर न आ सकें. घर में आ आसपास खाने-पीने चीजें या कूड़ा खुला ना छोड़े. कचरे का सही तरीके से निपटान करें.
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अगर आपको किसी पुराने बंद कमरे, गोदाम या ऐसी जगह जाना पड़े जहां चूहों के मल-मूत्र हो सकते हैं,तो वहां जाने से पहले N95 मास्क और ग्लव्स जरुर पहनें.
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