गर्भावस्था में सिर्फ शारीरिक ही नहीं, मानसिक स्वास्थ्य भी है जरूरी, 'ध्यान' है मन को शांत रखने का सबसे सरल उपाय
ध्यान मन को शांत करने और एकाग्र करने की प्रक्रिया है। इसमें अपने विचारों को नियंत्रित कर वर्तमान क्षण में पूरी तरह रहा जा सकता है। सांस पर ध्यान केंद्रित करके या शांति से बैठकर किया जाने वाला यह अभ्यास तनाव कम करता है, मन की शांति बढ़ाता है और आत्म-जागरुकता विकसित करता है।
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गर्भावस्था महिला के जीवन का एक संवेदनशील समय होता है। इस दौरान शरीर में कई सारे हार्मोनल बदलाव होते हैं जिनके कारण अक्सर तनाव या घबराहट जैसी समस्याएं महसूस होना आम बात है। इसीलिए ऐसे समय में शारीरिक देखभाल के साथ-साथ मानसिक शांति भी उतनी ही ज़रूरी है। भारत सरकार का आयुष मंत्रालय गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर विशेष जागरूकता अभियान चला रहा है। मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर महत्वपूर्ण पोस्ट करते हुए प्रेग्नेंसी के दौरान ध्यान के फायदों के बारे में जानकारी दी।
क्या है ध्यान का महत्व?
ध्यान मन को शांत करने और एकाग्र करने की प्रक्रिया है। इसमें अपने विचारों को नियंत्रित कर वर्तमान क्षण में पूरी तरह रहा जा सकता है। सांस पर ध्यान केंद्रित करके या शांति से बैठकर किया जाने वाला यह अभ्यास तनाव कम करता है, मन की शांति बढ़ाता है और आत्म-जागरुकता विकसित करता है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार, गर्भावस्था में शारीरिक देखभाल जितनी जरूरी है, उतनी ही जरूरी मन की शांति बनाए रखना भी है। ध्यान का नियमित अभ्यास गर्भवती महिलाओं को शांत और स्थिर रखने, तनाव कम करने और खुद से व आने वाले शिशु से गहरा भावनात्मक जुड़ाव बनाने में मदद करता है।
गर्भावस्था के हर चरण में ध्यान का अभ्यास करें
मंत्रालय ने बताया कि गर्भावस्था के हर चरण में ध्यान का अभ्यास महिलाओं को भावनात्मक संतुलन बनाए रखने और स्वास्थ्य सुधारने में सहायक है। इससे पूरी गर्भावस्था की यात्रा अधिक शांतिपूर्ण, स्थिर और सकारात्मक बनती है। एक्सपर्ट गर्भवती महिलाओं के लिए तिमाही के अनुसार ध्यान का समय भी बताते हैं।
पहली तिमाही:- 5 मिनट
दूसरी तिमाही:- 10 मिनट
तीसरी तिमाही:- 15 मिनट
गर्भवती महिला ध्यान को अपनी रोजाना दिनचर्या का हिस्सा बनाए : आयुष मंत्रालय
गर्भवती महिला का मानसिक स्वास्थ्य आने वाले बच्चे के स्वास्थ्य को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। मंत्रालय ने अपील की है कि हर गर्भवती महिला को ध्यान को अपनी रोजाना दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए। एक शांत और संतुलित मन वाली मां स्वस्थ और शांत बच्चे को जन्म देने की नींव रखती है। योग गर्भवती मां की शारीरिक व मानसिक ताकत है। ये एक स्वस्थ और अधिक सचेत शुरुआत की ओर पहला कदम भी है।
कुछ बातों का रखें ध्यान
हालांकि, ध्यान करते समय कुछ सावधानी भी बरतनी चाहिए। अभ्यास के लिए सीधी लेकिन आरामदायक मुद्रा में बैठें, पीठ पर जोर न डालें। खाली या हल्का पेट रखें और शांत और हवादार जगह का चुनाव करें। अभ्यास के दौरान सांस को स्वाभाविक रूप से आने-जाने दें, विचारों से लड़ें नहीं। गर्भावस्था या किसी बीमारी में अभ्यास के दौरान डॉक्टर की सलाह जरूर लें। धैर्य रखें और जबरदस्ती मन शांत करने की कोशिश न करें।
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Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान और जागरूकता के उद्देश्य से है. प्रत्येक व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और आवश्यकताएं अलग-अलग हो सकती हैं. इसलिए, इन टिप्स को फॉलो करने से पहले अपने डॉक्टर या किसी विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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