सावधान! सामान्य लोगों से कहीं ज़्यादा इन लोगों को होता है टीबी का खतरा, नियमित जांच है ज़रूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है टीबी का बैक्टीरिया हवा के जरिए किसी को भी संक्रमित कर सकता है लेकिन कुछ लोगों में सामान्य लोगों की तुलना में टीबी होने का खतरा अधिक होता है। ऐसे लोगों को विशेष सावधानी बरतने के साथ-साथ समय-समय पर जांच कराते रहना चाहिए ताकि बीमारी शुरुआती चरण में ही पकड़ी जा सके। टीबी पूरी तरह ठीक होने वाली बीमारी है, लेकिन शुरुआती पहचान बहुत जरूरी है।
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देश में आज भी टीबी यानि Tuberculosis एक प्रमुख और गंभीर संक्रामक बीमारियों में से एक बनी हुई है। ये बीमारी मुख्य रूप से हमारे फेफड़ों को प्रभावित करती है। अगर समय पर इसकी पहचान और इलाज न हो, तो ये शरीर के दूसरे हिस्सों में भी फैल सकती है और जानलेवा साबित हो सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है टीबी का बैक्टीरिया हवा के जरिए किसी को भी संक्रमित कर सकता है लेकिन कुछ लोगों में सामान्य लोगों की तुलना में टीबी होने का खतरा अधिक होता है। ऐसे लोगों को विशेष सावधानी बरतने के साथ-साथ समय-समय पर जांच कराते रहना चाहिए ताकि बीमारी शुरुआती चरण में ही पकड़ी जा सके। टीबी पूरी तरह ठीक होने वाली बीमारी है, लेकिन शुरुआती पहचान बहुत जरूरी है।
किन लोगों को सामान्य लोगों की तुलना में टीबी होने का ज़्यादा है
टीबी मरीज के संपर्क में रहने वाले व्यक्ति को खतरा - अगर घर या आसपास कोई टीबी का मरीज है तो संक्रमण का खतरा बहुत बढ़ जाता है।
कुपोषण से जूझ रहे लोग - कमजोर इम्युनिटी और शरीर में पोषक तत्वों की कमी के कारण इनमें टीबी आसानी से फैल सकती है।
पिछले 5 साल में टीबी से ठीक हुए मरीज - पुरानी बीमारी दोबारा लौट सकती है।
एचआईवी से पीड़ित व्यक्ति - कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता के कारण टीबी इनके लिए घातक साबित हो सकती है।
डायबिटीज के मरीज - ब्लड शुगर कंट्रोल न होने पर टीबी का खतरा बढ़ जाता है।
60 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति - उम्र बढ़ने के साथ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, ऐसे में बढ़ती उम्र में ये खतरा बढ़ जाता है।
लंबे समय से धूम्रपान या शराब का सेवन करने वाले - सिगरेट या बीड़ी का सेवन फेफड़ों को कमजोर बनाता है। वहीं, लंबे समय से शराब का सेवन करने वाले लोगों के लीवर और इम्युनिटी दोनों को नुकसान पहुंचती है।
भीड़भाड़ वाले स्थानों या स्लम एरिया में रहने वाले - जेल, अनाथालय, वृद्धाश्रम आदि जगहों पर रहने वाले लोगों के साथ ही स्लम एरिया में निवास करने वाले लोगों को खराब स्वच्छता और रहन-सहन की स्थिति के कारण खतरा अधिक होता है।
नेशनल हेल्थ मिशन का कहना है कि ऊपर बताए गए वर्गों को टीबी संक्रमण का खतरा ज्यादा होने के कारण उन्हें सतर्क रहना चाहिए। खांसी, बुखार, वजन घटना, रात में पसीना आना और थकान जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
वहीं, बचाव के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं, अच्छा और पौष्टिक भोजन लें, धूम्रपान और शराब से दूर रहें। टीबी मरीज के संपर्क में आने पर डॉक्टर की सलाह से दवा शुरू करें और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।
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Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य ज्ञान और जागरूकता के उद्देश्य से है. प्रत्येक व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और आवश्यकताएं अलग-अलग हो सकती हैं. इसलिए, इन टिप्स को फॉलो करने से पहले अपने डॉक्टर या किसी विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.