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Diabetes: अब रोज नहीं, हफ्ते में सिर्फ एक बार इंसुलिन! जानिए कौन-सा विकल्प पड़ेगा ज्यादा असरदार और सस्ता

Diabetes Insulin: डायबिटीज केवल ब्लड शुगर बढ़ने तक सिमित नहीं रहती, बल्कि लंबे समय तक नियंत्रण में न रहने पर आखों, किडनी, दिल, नसों और शरीर के कई महत्वूर्ण अंगों को गंभीर नुक्सान पंहुचा सकती हैं.

Diabetes: अब रोज नहीं, हफ्ते में सिर्फ एक बार इंसुलिन! जानिए कौन-सा विकल्प पड़ेगा ज्यादा असरदार और सस्ता
Image Source: Canva
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Diabetes Insulin: आज के समय में दुनिया की सबसे गंभीर और खतरनाक बीमारी डायबिटीज बन चुकी है. भारत भी इससे अछूता नहीं है. बदलती जीवनशैली, खानपान की आदतें और शारीरिक गतिविधियों में कमी के कारण हर साल लाखों नए मरीज इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं. डायबिटीज केवल ब्लड शुगर बढ़ने तक सिमित नहीं रहती, बल्कि लंबे समय तक नियंत्रण में न रहने पर आखों, किडनी, दिल, नसों और शरीर के कई महत्वूर्ण अंगों को गंभीर नुक्सान पंहुचा सकती हैं. The Lancet Diabetes & Endocrinology में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में करीब 10.1 करोड़ लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं. ऐसे में मरीजों के लिए आसान और प्रभावी इलाज की जरूरत लगातार महसूस की जा रही थी..

टाइप-1 डायबिटीज में क्यों जरूरी होता है इंसुलिन?

डायबिटीज मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है, Type-1 और Type-2। Type-1 डायबिटीज में शरीर पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन नहीं बना पाता. ऐसे मरीजों के लिए इंसुलिन इंजेक्शन जीवनभर की जरूरत बन जाता है. कई लोगों को हर दिन एक बार इंजेक्शन लेना पड़ता है, जबकि कुछ मरीजों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार दिन में दो या तीन बार भी इंसुलिन लेना पड़ सकता है. रोजाना इंजेक्शन लगाना कई मरीजों के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण होता है. यही वजह है कि लंबे समय तक असर करने वाले इंसुलिन विकल्पों की मांग लगातार बढ़ रही थी.

अब हफ्ते में सिर्फ एक बार लगेगा इंसुलिन

इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए फार्मा कंपनी Novo Nordisk ने भारत में Awiqli नाम का नया साप्ताहिक इंसुलिन लॉन्च किया है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे हर दिन लगाने की जरूरत नहीं होगी। मरीजों को केवल सप्ताह में एक बार इंजेक्शन लेना होगा. इससे रोजाना इंजेक्शन लगाने की परेशानी काफी हद तक कम हो सकती है और इलाज को नियमित रूप से जारी रखना भी आसान हो सकता है.
कंपनी ने इसे दो अलग-अलग पेन विकल्पों में पेश किया है. 700 यूनिट वाले पेन की कीमत 2,611 रुपये रखी गई है, जबकि 2,100 यूनिट वाले पेन की कीमत 7,883 रुपये है. यदि किसी मरीज को औसतन सप्ताह में 70 यूनिट इंसुलिन की आवश्यकता होती है, तो 700 यूनिट वाले पेन से प्रति सप्ताह लगभग 261 रुपये का खर्च आता है. इस हिसाब से कई मरीजों के लिए यह विकल्प आर्थिक रूप से भी आकर्षक साबित हो सकता है.

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रोजाना लगने वाले इंसुलिन का कितना आता है खर्च?

बाजार में फिलहाल कई तरह के इंसुलिन उपलब्ध हैं और उनकी कीमत तथा असर अलग-अलग होता है. कुछ इंसुलिन खाने से ठीक पहले लिए जाते हैं, जबकि कुछ पूरे दिन ब्लड शुगर नियंत्रित रखने का काम करते हैं. रैपिड-एक्टिंग इंसुलिन भोजन से ठीक पहले लिया जाता है और लगभग 3 से 5 घंटे तक असर करता है. उदाहरण के तौर पर Humalog 100 IU KwikPen की कीमत करीब 1,260 रुपये है. यदि सप्ताह में 70 यूनिट की जरूरत हो तो लगभग 294 रुपये का खर्च आता है. वहीं Novolog Insulin Aspart की 10 मिलीलीटर शीशी की कीमत करीब 2,553 रुपये है और समान खुराक के आधार पर इसका साप्ताहिक खर्च लगभग 179 रुपये बैठता है. शॉर्ट-एक्टिंग इंसुलिन भोजन से लगभग 30 मिनट पहले लिया जाता है और 5 से 8 घंटे तक प्रभावी रहता है। वहीं इंटरमीडिएट-एक्टिंग इंसुलिन धीरे-धीरे असर करता है और कई घंटों तक ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद करता है.

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इसके अलावा लॉन्ग-एक्टिंग इंसुलिन लगभग 24 घंटे तक प्रभावी रहता है और पूरे दिन शरीर में बेसल इंसुलिन का स्तर बनाए रखने में मदद करता है. डॉक्टर मरीज की स्थिति और जरूरत के अनुसार अलग-अलग प्रकार के इंसुलिन का संयोजन भी लिख सकते हैं.

क्या नया इंसुलिन जेब पर भी डालेगा कम बोझ?

आमतौर पर कई मरीजों को दो तरह के इंसुलिन लेने पड़ते हैं. एक बेसल इंसुलिन, जिसकी कीमत लगभग 700 रुपये होती है और जो करीब 15 दिन चलता है. दूसरा भोजन से पहले लिया जाने वाला इंसुलिन होता है, जिसकी कीमत करीब 1,900 रुपये होती है और वह लगभग एक महीने तक चलता है. इस तरह महीनेभर में इंसुलिन पर लगभग 3,300 रुपये तक खर्च हो सकता है.

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वहीं Awiqli का अनुमानित मासिक खर्च करीब 1,044 रुपये बताया गया है. यानी कई मरीजों के लिए यह पारंपरिक इंसुलिन की तुलना में अधिक किफायती विकल्प बन सकता है. हालांकि वास्तविक खर्च मरीज की जरूरत, निर्धारित खुराक और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करेगा.

डॉक्टर की सलाह के बिना न बदलें इंसुलिन

भले ही सप्ताह में एक बार लगने वाला इंसुलिन मरीजों के लिए राहत लेकर आया हो, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर डायबिटीज मरीज इसे अपने आप शुरू कर सकता है. हर व्यक्ति की बीमारी, उम्र, ब्लड शुगर का स्तर और अन्य स्वास्थ्य स्थितियां अलग होती हैं. इसलिए इंसुलिन बदलने या नई दवा शुरू करने का फैसला हमेशा एंडोक्राइनोलॉजिस्ट या डायबिटीज विशेषज्ञ की सलाह से ही लेना चाहिए. सही इलाज, संतुलित खानपान, नियमित व्यायाम और समय-समय पर ब्लड शुगर की जांच ही डायबिटीज को बेहतर तरीके से नियंत्रित रखने का सबसे प्रभावी तरीका है.

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