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7 साल की उम्र में छोड़ा था भारत, अब बनीं जाम्बिया सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला जज… कहानी जस्टिस आभा नायर पटेल की

जस्टिस आभा नायर पटेल दिल्ली छोड़कर विदेश बस गईं हो, लेकिन दशको बाद भी उनके मन में अपने देश के लिए काफी अपनापन है, उनकी आवाज में हिंदी की मिठास और भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान अभी भी बना हुआ है. जाम्बिया सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस आभा नायर पटेल इन दिनों भारत के दौरे पर हैं.

Image Credits: Canva/AI/X
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दिल्ली की एक सात साल की लड़की, जिसके माता-पिता 1973 में रोज़गार के मौकों की तलाश में ज़ाम्बिया चले गए थे, वो ज़ाम्बिया सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला जज बनीं है. साथ ही, CJI सूर्य कांत के निमंत्रण पर भारत के सुप्रीम कोर्ट में न्यायिक मंच पर बैठने वाली वह वहाँ की पहली व्यक्ति भी बनीं.

‘भारत आज भी उनके दिल में बसता है’

भले ही जस्टिस आभा नायर पटेल दिल्ली छोड़कर विदेश बस गईं हो, लेकिन दशको बाद भी उनके मन में अपने देश के लिए काफी अपनापन है, उनकी आवाज में हिंदी की मिठास और भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान अभी भी बना हुआ है. जाम्बिया सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस आभा नायर पटेल इन दिनों भारत के दौरे पर हैं. 

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 जाम्बिया सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस आभा नायर पटेल ने NDTV से ख़ास बातचीत में भारतीय संविधान, न्यापालिका और अपने निजी जीवन से जुड़े कई अनुभव शेयर किए. उन्होंने कहा है कि भले ही उन्होंने बचपन में भारत छोड़ दिया हो, लेकिन भारत आज भी उनके दिल में बसता है, इतना ही नहीं उन्होंने भारतीय संविधान और सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों को पूरी दुनिया के लिए सीख का जरिया बताया. 

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‘भारत छोड़ने के कई साल बाद भी जुड़ाव देश से बना हुआ है’

जस्टिस आभा नायर पटेल महज़ 7 साल की थी, जब उनका परिवार भारत छोड़, विदेश में जाकर बस गया था, आज कई दशक बीत जाने के बाद भी हिंदी भाषा और भारतीय संस्कृति से उनका जुड़ाव क़ायम है. उन्होंने बातचीत में बताया,”विदेशों में रहने वाले अधिकांश भारतीय हिंदी बोलते हैं. कोई अच्छी हिंदी बोलता है, कोई कम अच्छी, लेकिन भाषा और संस्कृति से रिश्ता बना रहता है. मैं दिल्ली से सात साल की उम्र में गई थी. बहुत साल हो गए हैं, लेकिन हिंदी आज भी बोलती हूं. बाद में मेरी शादी गुजराती परिवार में हुई तो गुजराती भी सीख ली. इसलिए लोग अक्सर पूछते हैं कि 'नायर पटेल' नाम के पीछे आखिर कौन-सा बैकग्राउंड है.  भारत छोड़ने के कई साल बाद भी उनका भावनात्मक जुड़ाव देश से बना हुआ है.”

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जस्टिस पटेल को गेस्ट के रुप में इन्वाइट किया गया था

बता दें कि भारत के दौरान जस्टिस पटेल को सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मुख्य गेस्ट के रुप में इन्वाइट किया गया था. सुप्रीम कोर्ट ऑडिटरियम में आयोजित इस फ्यूचर ऑफ़र जस्टिस डिलीवरी: इनोवेशन, इंक्लूजन एंड इंटीग्रिटी के लेक्चर में भारत के मुख्य न्यायधीश सूर्यकांत, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस वी.मोहना और जस्टिस पी.बी वारले भी मौजूद थे. 

‘ये तीनों एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं’

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सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन को संबोधित करते हुए जस्टिस पटेल ने कहा कि न्याय देने की प्रक्रिया के तीन अहम हिस्से हैं: इनोवेशन (नवाचार), ईमानदारी और समावेशिता -- और ये तीनों एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं. उन्होंने कहा कि न्याय देने की व्यवस्था में हर इनोवेशन को निष्पक्षता और न्याय तक पहुँच को बेहतर बनाने की दोहरी कसौटी पर खरा उतरना चाहिए

‘भारत हमारे दिलों से कभी अलग नहीं हो सकता’

जस्टिस आभा नायर पटेल सम्मान को याद करते हुए काफी इमोशनल हो गई. उनका कहना है कि भारत में जिस सम्मान के साथ उनका स्वागत हुआ है, वो उनकी कल्पना से भी ज्यादा था. जस्टिस पटेल ने अपनी बात आगे रखते हुए कहा, "किसी दूसरे देश के जज को भारत में जिस सम्मान के साथ स्वीकार किया गया, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने जिस प्रकार मुझे सुप्रीम कोर्ट के मंच और पीठ पर स्थान दिया, यह मेरे जीवन का एक ऐसा स्वर्णिम क्षण है. इसे मैं कभी भूल नहीं सकती. यह अनुभूति मेरे हृदय की गहराइयों को छू गई है. भले ही हमें भारत छोड़े कई दशक बीत चुके हैं, परंतु भारत हमारे दिलों से कभी अलग नहीं हो सकता. भाषा, खान-पान, संस्कृति और धार्मिक परंपराएं, दुनिया के किसी भी कोने में बसे भारतीय अपनी सांस्कृतिक जड़ों और विरासत को सदैव जीवंत रखते हैं." 

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भारतीय संविधान और न्यायिक व्यवस्था की तारीफ़ में क्या कहा?

जस्टिस पटेल ने इस दौरान भारतीय संविधान और न्यायिक व्यवस्था की खुलकर तारीफ़ भी की. उन्होंने कहा, “भारतीय संवैधानिक कानून का अध्ययन किए बिना विधिशास्त्र (Law) की पढ़ाई पूरी नहीं मानी जा सकती. भारतीय संविधान और सुप्रीम कोर्ट के फैसले दुनिया भर के कानून के छात्रों और न्यायिक अधिकारियों के लिए अध्ययन का विषय हैं.”

जस्टिस आभा नायर पटेल ने आगे कहा, “भारत का इतिहास और उसकी कानूनी परंपरा दुनियाभर में प्रतिष्ठित है.  विदेश में रहने के बावजूद उन्होंने भी भारतीय संवैधानिक कानून का अध्ययन किया है और यह कानूनी शिक्षा का महत्वपूर्ण आधार है. विभिन्न देशों के बीच न्यायिक अनुभवों का आदान-प्रदान अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि सभी न्याय प्रणालियों का साझा उद्देश्य त्वरित, प्रभावी और निष्पक्ष न्याय उपलब्ध कराना है. इतनी विशाल जनसंख्या वाले देश में भारतीय न्यायपालिका की प्रगति और कार्यक्षमता सराहनीय है तथा इसे देखकर अन्य देशों को भी सीखने की प्रेरणा मिलती है”

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AI के बढ़ते प्रभाव पर क्या बोलीं जस्टिस पटेल?

जस्टिस पटेल ने इस दौरान बदलती तकनीक और AI के बढ़ते प्रभाव पर भी अपनी राय रखी, उन्होंने कहा कि “तकनीक न्याय व्यवस्था को बेहतर बना सकती है, लेकिन इसके साथ न्यायपालिका, वकीलों और अन्य हितधारकों की जिम्मेदारियां भी बढ़ जाती हैं.  जजों और वकीलों का सबसे बड़ा दायित्व संविधान की रक्षा करना और न्याय व्यवस्था में लोगों का विश्वास बनाए रखना है. न्याय का वास्तविक उद्देश्य हर व्यक्ति को बिना किसी भेदभाव के समान न्याय उपलब्ध कराना है.”

जस्टिस आभा नायर पटेल की उपलब्धियां हैं शानदार 

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जस्टिस आभा नायर पटेल ने ज़ाम्बिया यूनिवर्सिटी से लॉ में ग्रेजुएशन करने के बाद UK की कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से मास्टर्स की पढ़ाई की और 1989 में ज़ाम्बिया बार में शामिल हुईं. माउंट किलिमंजारो फतह करने वाली जस्टिस पटेल ने कड़ी मेहनत और ईमानदारी से पुरुषों के दबदबे वाली कानूनी दुनिया में अपनी जगह बनाई. उन्हें 2019 में हाई कोर्ट का जज और अप्रैल 2023 में कोर्ट ऑफ़ अपील का जज नियुक्त किया गया. वहीं 27 मई, 2026 को उन्हें ज़ाम्बिया सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया. 

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साल 2008 में उन्हें इंग्लैंड और वेल्स के सुप्रीम कोर्ट के रोल ऑफ सॉलिसिटर्स में भी शामिल किया गया, जिसके बाद उन्हें वहां सॉलिसिटर के रूप में मान्यता मिली थी. न्यायिक सेवाओं के अलावा जस्टिस पटेल ने वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR), मध्यस्थता और आर्बिट्रेशन के क्षेत्र में भी विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया है. वह एक प्रशिक्षित मध्यस्थ, मध्यस्थों की प्रशिक्षक और चार्टर्ड इंस्टीट्यूट ऑफ आर्बिट्रेटर्स की फेलो भी हैं.

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