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‘युवाओं को भटकाने की कोशिश, कॉकरोच वाले कमेंट का गलत मतलब’, NALSAR छात्र विरोध के बीच CJI सूर्यकांत का बड़ा बयान
CJI सूर्यकांत ने सोशल मीडिया पर अदालती कार्यवाही के क्लिप वायरल होने पर चिंता जताई. उन्होंने कहा, 'मेरी टिप्पणी का गलत अर्थ निकाला गया और इसका अनुचित इस्तेमाल किया गया.
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भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत पिछले कुछ महीनों से कई टिप्पणियों का केंद्र बने हुए हैं. बेरोजगारों पर दिए गए उनके कॉकरोचों वाले बयान की चर्चा अभी तक होती है. जबकि इसके बाद कॉकरोच जनता पार्टी बन गई, आंदोलन हो गया, छात्रों की मांग के आगे शिक्षा मंत्री का इस्तीफा तक मांग लिया गया. इसके बावजूद CJI अपने इस बयान को लेकर कई लोगों के निशाने पर रहते हैं.
अदालत के फैसलों और टिप्पणियों को लेकर सोशल मीडिया पर चल रहे नैरेटिव को लेकर अब CJI सूर्यकांत ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि उनकी टिप्पणियों को गलत तरीके से पेश किया गया और देश के युवाओं को गुमराह करने के लिए उनका दुरुपयोग किया गया.
सोशल मीडिया पर अदालती क्लिप पर जताई चिंता
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सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने सोशल मीडिया पर अदालती कार्यवाही के क्लिप वायरल होने पर चिंता जताई. उन्होंने DD न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा, ‘वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर गलत तरीके से शेयर किए जा रहे हैं. उनके साथ जो हुआ, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण था और वह कभी ऐसा सोच भी नहीं सकते थे, जैसा उनकी टिप्पणी को पेश किया गया.’
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CJI सूर्यकांत ने कहा, 'मेरी टिप्पणी का गलत अर्थ निकाला गया और इसका अनुचित इस्तेमाल किया गया. जो बात मैंने कही ही नहीं थी, उसे इस तरह से पेश किया गया मानो वही कहा गया हो. यह विशेष रूप से देश के युवाओं को गुमराह करने की एक बड़ी और दुर्भावनापूर्ण कोशिश थी. मैं संबंधित लोगों के बारे में ऐसी बातें सोच भी नहीं सकता.'
मीडिया से क्या अपील की?
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CJI सूर्यकांत ने इंटरव्यू में मीडिया की भूमिका पर भी बड़ी बात कही. उन्होंने कहा, चाहे कोई व्यक्ति सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया या किसी अन्य माध्यम से जुड़ा हो या सामान्य नागरिक हो, सभी के अधिकारों के साथ उनकी जिम्मेदारियां भी हैं. अधिकारों की बात करते समय व्यक्ति में अपने दायित्वों को पूरा करने की क्षमता भी होनी चाहिए. उन्होंने सभी लोगों से समाज में सद्भाव बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास करने की अपील की.
उन्होंने हाल ही में दिए गए अपने उस आदेश का जिक्र किया जिसमें अदालती न्यायिक कार्यवाही की ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग को बिना परमिशन सोशल मीडिया या अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रसारित, दोबारा पोस्ट, अपलोड या उससे कमाई करने पर रोक लगाई गई है. CJI ने कहा, न्यायपालिका में पारदर्शिता जरूरी है और इसी दिशा में सुप्रीम कोर्ट ने अपनी कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग शुरू की है. हालांकि, लाइव स्ट्रीमिंग का गलत इस्तेमाल नहीं होना चाहिए. चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने उन लोगों के लिए भी लकीर खींच दी, जो अदालती कार्यवाही के वीडियो का व्यवसायिक इस्तेमाल करते हैं. CJI ने कहा, लोग छोटे-छोटे क्लिप अपने व्यक्तिगत या व्यावसायिक फायदे के लिए इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इसका व्यावसायिक शोषण नहीं होना चाहिए.
कॉकरोच वाले बयान पर मचा था हंगामा
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दरअसल, मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट में एक वकील ने याचिका दाखिल की थी. इस याचिका में आरोप लगाया गया कि दिल्ली हाई कोर्ट ने सीनियर एडवोकेट बनाने से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के पुराने निर्देशों को सही तरीके से लागू नहीं किया. वकील का कहना था कि वह तीसरी बार इस मुद्दे को उठा रहे हैं, लेकिन अब तक नियमों का पालन नहीं हुआ.
CJI ने कहा, अगर दिल्ली हाई कोर्ट याचिकाकर्ता को सीनियर एडवोकेट का दर्जा देता है, तो सुप्रीम कोर्ट उसके पेशेवर आचरण को देखते हुए उस फैसले को रद्द कर देगा. चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता की फेसबुक पर की गई पोस्ट में इस्तेमाल भाषा का जिक्र किया.
उन्होंने कहा, ‘समाज में पहले से ही ऐसे परजीवी मौजूद हैं जो व्यवस्था पर हमला करते हैं, और क्या आप उनके साथ हाथ मिलाना चाहते हैं? इस दौरान उन्होंने कहा था, कुछ बेरोजगार कॉकरोच की तरह होते हैं, जिन्हें न तो कोई रोजगार मिलता है और न ही किसी पेशे में कोई जगह. उनमें से कुछ मीडिया में चले जाते हैं, कुछ सोशल मीडिया में, कुछ RTI कार्यकर्ता बन जाते हैं और कुछ अन्य तरह के कार्यकर्ता बनकर हर किसी पर हमला करना शुरू कर देते हैं.’
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इस टिप्पणी के बाद कॉकरोच जनता पार्टी बन गई. जिसके प्रमुख अभीजीत दिपके ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन किया. जिसे छात्रों का समर्थन मिला. आखिरकार ये प्रदर्शन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद ही खत्म हुआ.
NALSAR यूनिवर्सिटी के छात्रों ने किया था विरोध
CJI का ये बयान ऐसे समय में आया है. जब हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी में चीफ जस्टिस को चीफ गेस्ट बनाए जाने का छात्रों ने विरोध किया था. असल में छात्रों की नाराजगी चीफ जस्टिस की उस टिप्पणी को लेकर थी. जिसमें उन्होंने NEET प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई से जुड़ी याचिका की सुनवाई में की थी. छात्रों का तर्क है कि CJI सूर्यकांत ने लाठीचार्ज के वीडियो देखने से मना करते हुए कथित तौर पर कहा था कि उनके पास वीडियो देखने का समय नहीं है. NALSAR के करीब 450 छात्र जस्टिस सूर्यकांत को दीक्षांत समारोह 2026का चीफ गेस्ट बनाए जाने का विरोध कर रहे हैं.
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इसके बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) NALSAR के 2026 बैच के लॉ ग्रेजुएट्स का वकील के तौर पर एनरोलमेंट रोकने को कहा गया था. हालांकि CJI ने BCI के इस सर्कुलर पर नाराजगी जताते हुए कार्रवाई को रोकने के लिए कहा था. चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, ‘यह मेरे और छात्रों के बीच का मामला है. इसे मुद्दा बनाने की जरूरत नहीं थी. बार काउंसिल इसमें दखल देने वाला कौन होता है? BCI की दखलअंदाजी बिल्कुल अनावश्यक है. यह छात्रों और मेरे बीच संवाद है. वे कौन होते हैं इस मुद्दे को उठाने वाले?
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हालांकि CJI के सख्त रुख के बाद BCI ने अपना रुख बदल दिया. काउंसिल ने कहा कि NALSAR के 2026 बैच के ज्यादातर छात्र निर्दोष हैं और वे CJI के अनादर वाले किसी अभियान में शामिल होने के इच्छुक नहीं थे. BCI ने कहा कि कुछ शिक्षकों और बाहरी लोगों ने निर्दोष छात्रों को इस अभियान में शामिल करने की कोशिश की. इसके बाद सभी छात्रों को अपनी पसंद की स्टेट बार काउंसिल में एनरोल होने की अनुमति दे दी गई.