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ट्रेन के AC डिब्बे में बिना टिकट पकड़े गए प्रेमानंद महाराज! TTE ने गुस्से में खूब सुनाई गालियां, फिर जो हुआ...
Premanand Maharaj: एक भक्त ने उनसे भगवान पर विश्वास और उनकी कृपा को लेकर सवाल पूछा. इसके जवाब में महाराज जी ने अपने जीवन की दो घटनाएं साझा कीं, जिनके जरिए उन्होंने बताया कि सच्ची श्रद्धा और विश्वास इंसान को मुश्किल समय में हिम्मत देते है.
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Premanand Maharaj: वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद जी महराज आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं. उनके सत्संग को सुनने के लिए देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी लोग पहुंचते हैं. उनकी सरल भाषा, शांत स्वभाव और जीवन से जुड़े उदहारण लोगों को बहुत प्रभावित करते हैं. सोशल मीडिया पर भी उनके सत्संग के वीडियो काफी लोकप्रिय हैं, जिनमें वे लोगों को भक्ति, विश्वास और अच्छे जीवन की सिख देते हैं. सत्संग के बाद अक्सर श्रद्धालु अपनी परेशानियां और जीवन से जुड़े सवाल लेकर उनके पास आते हैं. प्रेमानंद जी महाराज भी हर सवाल का जवाब बहुत सहज तरीके से देते हैं. हाल ही में एक भक्त ने उनसे भगवान पर विश्वास और उनकी कृपा को लेकर सवाल पूछा. इसके जवाब में महाराज जी ने अपने जीवन की दो घटनाएं साझा कीं, जिनके जरिए उन्होंने बताया कि सच्ची श्रद्धा और विश्वास इंसान को मुश्किल समय में हिम्मत देते है.
“भगवान ने सेकंड में मेरी बात सुन ली”
प्रेमानंद जी महाराज ने बताया कि उनका भगवान के प्रति विश्वास बचपन से ही रहा है. उन्होंने कहा कि उनके जीवन में कई बार ऐसी परिस्थितियां आईं, जब उन्हें लगा कि अब कोई रास्ता नहीं बचा, लेकिन भगवान की कृपा से समस्या अचानक दूर हो गई.
उन्होंने कहा कि कई बार लोग सोचते हैं कि भगवान हमारी बात सुनने में समय लगाएंगे, लेकिन उनके अनुभव में ऐसा नहीं है. उनका कहना है कि जब मन पूरी श्रद्धा से भगवान को पुकारता है, तो मदद किसी न किसी रूप में जरूर आती है.
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इसी बात को समझाने के लिए उन्होंने अपने जीवन की एक घटना सुनाई. उन्होंने बताया कि एक बार वह रास्ते से गुजर रहे थे और भगवान के ध्यान में इतने खोए हुए थे कि उन्हें आसपास की चीजों का ध्यान नहीं था. रास्ते पर ऊपर से सूखी और मजबूत दिखने वाली जमीन थी, लेकिन असल में उसके नीचे दलदल था.
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तभी अचानक उन्हें किसी की आवाज सुनाई दी कि सामने दलदल है. उन्होंने आसपास देखा, लेकिन वहां कोई दिखाई नहीं दिया. इसके बाद उन्होंने अपनी छड़ी से जमीन पर वार किया तो छड़ी पूरी नीचे चली गई. तब उन्हें समझ आया कि अगर वह बिना जाने आगे बढ़ जाते तो बड़ी परेशानी में फंस सकते थे. उन्होंने इसे भगवान की कृपा बताया, जिन्होंने समय रहते उन्हें सावधान कर दिया.
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ट्रेन में हुआ ऐसा अनुभव, जब लोग करने लगे थे आलोचना
प्रेमानंद जी महाराज ने अपनी यात्रा से जुड़ी एक और घटना बताई. उन्होंने कहा कि एक बार वह महोबा से वाराणसी जा रहे थे. उनके पास एक साधारण टिकट था, लेकिन जानकारी की कमी के कारण वह एसी कोच में बैठ गए. उन्हें लगा कि उनके पास टिकट है, इसलिए कोई परेशानी नहीं होगी.
कुछ स्टेशन निकलने के बाद टीटीई वहां पहुंचे और उन्होंने टिकट मांगा. महाराज जी ने विश्वास के साथ अपना टिकट दिखाया. लेकिन टिकट देखने के बाद टीटीई ने बताया कि यह सिर्फ जनरल टिकट है और वह एसी कोच में यात्रा कर रहे हैं. इतना ही नहीं, टिकट की वैधता भी खत्म हो चुकी थी.
इसके बाद वहां मौजूद कुछ लोगों ने उन्हें गलत समझते हुए बातें सुनानी शुरू कर दीं. महाराज जी ने बताया कि हर व्यक्ति की संतों के प्रति श्रद्धा नहीं होती, इसलिए कुछ लोग उन्हें भी सामान्य यात्री की तरह देख रहे थे.
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भगवान पर भरोसा और अचानक मिली मदद
महाराज जी ने बताया कि उस समय उन्होंने किसी से बहस नहीं की, बल्कि शांत होकर भगवान का स्मरण करने लगे. उन्होंने मन ही मन भगवान से कहा कि उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा और अब वही रास्ता दिखाएं. तभी अचानक ऊपर की सीट से एक व्यक्ति नीचे आया. उसने टीटीई से अंग्रेजी में बात की और पूरा मामला समझाया. इसके बाद उसने जुर्माने और टिकट से जुड़ी रकम जमा कर दी. उसने प्रेमानंद जी महाराज से कहा कि आप आराम से बैठ जाइए.
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महाराज जी ने बताया कि वह व्यक्ति कौन था, कहां से आया और उसका उनसे कोई परिचय भी नहीं था. लेकिन अचानक उसकी मदद से पूरी समस्या खत्म हो गई. उन्होंने इसे भगवान की कृपा बताया और कहा कि जीवन में ऐसी कई घटनाएं हुई हैं, जहां उन्हें लगा कि भगवान हर पल उनके साथ हैं.