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समंदर के बीच बसा 5 हजार साल पुराना अद्भुत शिवालय, जहां समुद्र देव स्वयं करते हैं 'स्वंभू शिवलिंग' का जलाभिषेक
गुजरात के शहर द्वारका के पश्चिमी छोर पर अरब सागर में तीन तरफ से घिरा प्राचीन शिव मंदिर, जो आस्था और प्रकृति के अनोखे मिलन का प्रतीक है. यह है श्री भड़केश्वर महादेव मंदिर, जहां भगवान शिव का स्वयंभू शिवलिंग स्थापित है.
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देवाधिदेव महादेव की लीला जितनी न्यारी है, उन्हें दुनिया भर में समर्पित मंदिर भी उतने ही अद्भुत हैं. ऐसा ही अद्भुत, अविश्वसनीय शिवालय गुजरात के द्वारका में स्थित है, जो समंदर के बीच बसा है और लगभग 5000 साल पुराना है. खास बात है कि स्वंभू शिवलिंग का जलाभिषेक करने के लिए समुद्र खुद महादेव के दरबार में आते हैं.
यह मंदिर 'चंद्र-मौलीश्वर शिव' रूप को समर्पित है
गुजरात के शहर द्वारका के पश्चिमी छोर पर अरब सागर में तीन तरफ से घिरा प्राचीन शिव मंदिर, जो आस्था और प्रकृति के अनोखे मिलन का प्रतीक है. यह है श्री भड़केश्वर महादेव मंदिर, जहां भगवान शिव का स्वयंभू शिवलिंग स्थापित है. माना जाता है कि यह शिवलिंग करीब 5,000 वर्ष पहले समुद्र से प्रकट हुआ था. जून-जुलाई के महीनों में अरब सागर खुद इस शिवलिंग का जलाभिषेक करता है, जब ज्वार के समय मंदिर पूरी तरह पानी में डूब जाता है. यह मंदिर 'चंद्र-मौलीश्वर शिव' रूप को समर्पित है.
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किंवदंती है कि भगवान शिव ने स्वयं इस शिवलिंग के रूप में समुद्र में प्रकट होकर अपनी उपस्थिति दर्ज की. मंदिर का निर्माण प्रसिद्ध जगद्गुरु आदि शंकराचार्य ने गोमती नदी, गंगा और अरब सागर के संगम स्थल पर करवाया था. द्वारका के सबसे प्रतिष्ठित शिव मंदिरों में शामिल भड़केश्वर महादेव मंदिर न केवल आध्यात्मिक शांति देता है, बल्कि अपनी ऊंची जगह से समुद्र तट का खूबसूरत नजारा भी प्रस्तुत करता है.
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सूर्यास्त के समय यहां का दृश्य अविस्मरणीय हो जाता है
मंदिर एक छोटी पहाड़ी पर बना है, जो समुद्र में निकली हुई है. चारों तरफ लहरें टकराती रहती हैं, जिससे यह जगह और भी दिव्य लगती है. रास्ते में जाते समय दोनों तरफ समुद्र की लहरें और बाईं ओर लाइटहाउस का नजारा मन को मोह लेता है. सूर्यास्त के समय यहां का दृश्य अविस्मरणीय हो जाता है, जब सूरज की सुनहरी किरणें मंदिर पर पड़ती हैं.
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कब मंदिर समुद्र में समा जाता है
सबसे रोचक बात यह है कि हर साल मानसून के दौरान जून-जुलाई के मौसम में समुद्र का ज्वार बढ़ता है और मंदिर उसी में समा जाता है. कुछ देर के लिए पूरा मंदिर समुद्र में डूब जाता है. ऐसा लगता है मानो समुद्र स्वयं भगवान शिव का पवित्र अभिषेक कर रहा हो. ज्वार कम होने पर पानी पीछे हट जाता है और मंदिर फिर से साफ-सुथरा और चमकता हुआ दिखाई देता है. यह प्रकृति द्वारा किया जाने वाला अनोखा अनुष्ठान भक्तों को गहरा आध्यात्मिक अनुभव कराता है.
महाशिवरात्रि के दिन यहां भव्य मेला लगता है
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आम दिनों, सोमवार, प्रदोष व अन्य विशेष तिथि के साथ ही शिवरात्रि व महाशिवरात्रि के दिन मंदिर में भव्य अनुष्ठान होता है. महाशिवरात्रि के दिन यहां भव्य मेला लगता है और हजारों श्रद्धालु महादेव के दर्शन को यहां आते हैं.
मंदिर आस्था, इतिहास और प्रकृति के अद्भुत संगम का प्रतीक है
भड़केश्वर महादेव मंदिर आस्था, इतिहास और प्रकृति के अद्भुत संगम का प्रतीक है. यहां आने वाले भक्तों को शांति के साथ-साथ एक अनोखा प्राकृतिक चमत्कार भी देखने को मिलता है. हालांकि, ध्यान रखें कि ज्वार के समय रास्ता पानी से भर सकता है, इसलिए भाटे (कम ज्वार) के समय या सूर्यास्त के आसपास जाना बेहतर रहता है. भड़केश्वर मंदिर से कुछ ही दूरी पर द्वारकाधीश मंदिर, गीता मंदिर और रुक्मिणी मंदिर जैसे अन्य धार्मिक स्थल भी हैं.
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मंदिर के दर्शन करने कैसे पहुंचे
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मंदिर ट्रेन से पहुंचने के लिए सबसे पहले द्वारका रेलवे स्टेशन पर उतरें. स्टेशन से मंदिर लगभग 2 किलोमीटर दूर है. ऑटो, टैक्सी या बस से आसानी से पहुंचा जा सकता है. निकटतम एयरपोर्ट जामनगर और पोरबंदर हैं. वहां से सड़क मार्ग या रेल से द्वारका पहुंचकर मंदिर जा सकते हैं. वहीं, राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-947 सीधे द्वारका शहर जाता है. द्वारका पहुंचने के बाद गीता मंदिर और रुक्मिणी मंदिर के पास से पश्चिम दिशा की ओर मंदिर तक जाया जा सकता है. समुद्र तट से पहाड़ी तक सुव्यवस्थित रास्ता और सीढ़ियां हैं.