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'हमारे शौर्य कमांडो ने किया शानदार काम...', चीन के साथ 'Face-Off पर' ITBP चीफ शत्रुजीत कपूर का बड़ा बयान

ITBP के DG शत्रुजीत कपूर ने बताया कि अरुणाचल प्रदेश में भारत और चीन के सैनिकों के बीच कई बार आमना-सामना हुआ है और यह सिलसिला जारी है. उन्होंने ITBP की शौर्य कमांडो टीमों की तारीफ करते हुए कहा कि बल को ऊंचाई वाले दुर्गम इलाकों में अपनी क्षमता और मजबूत करनी है.

Image Source: Screengrab
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भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है. भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर के बयान ने सीमा की मौजूदा स्थिति को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने बताया कि अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच कई बार आमना-सामना हुआ है और ऐसी स्थिति अभी भी बनी हुई है. इस दौरान उन्होंने अपने शौर्य कमांडो के काम की सराहना भी की है. 

अरुणाचल में आमने-सामने आए सैनिक

ITBP के वार्षिक हिमवीर सम्मान समारोह में गुरुवार को शत्रुजीत कपूर ने सीमा पर तैनात जवानों के काम की सराहना की. उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में अरुणाचल प्रदेश के कई स्थानों पर भारत और चीन के सैनिकों का आमना-सामना (face-Off) हुआ है. उन्होंने यह भी बताया कि इन परिस्थितियों में ITBP की शौर्य कमांडो टीमें सक्रिय भूमिका निभा रही हैं. कपूर के मुताबिक, इन टीमों ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अच्छा काम किया है. हालांकि, सैनिकों के आमने-सामने आने की घटनाओं का जिक्र होने के बावजूद यह बताना जरूरी है कि हर फेसऑफ का मतलब गोलीबारी या युद्ध जैसी स्थिति नहीं होता. सीमा पर गश्त के दौरान दोनों देशों के सैनिकों का सामना होने से भी तनाव पैदा हो सकता है.

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ITBP को मिलेगी शौर्य कमांडो की पूरी बटालियन

ITBP प्रमुख ने अपने संबोधन में बल की बदलती भूमिका पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि ITBP की शुरुआत पर्वतीय गुरिल्ला बल के रूप में हुई थी, लेकिन समय के साथ उसने चीन सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले एक विशेष बल के रूप में अपनी पहचान बनाई है. अब बल को ऊंचाई वाले दुर्गम क्षेत्रों में अपनी क्षमताएं और मजबूत करनी हैं. इसी दिशा में शौर्य कमांडो टीमों को विकसित किया जा रहा है. कपूर ने संकेत दिया कि जल्द ही इन कमांडो की एक पूरी बटालियन तैयार होगी. इसका उद्देश्य कठिन पहाड़ी इलाकों में बेहतर तैयारी और प्रभावी तैनाती सुनिश्चित करना है. यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अरुणाचल प्रदेश जैसे क्षेत्रों में ऊंचे पहाड़, खराब मौसम और सीमित संपर्क सुविधाएं सुरक्षा बलों के सामने बड़ी चुनौतियां खड़ी करती हैं.

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कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना 

ITBP महानिदेशक के बयान के बाद कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर केंद्र सरकार को घेरा. उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार चीन के साथ संबंधों को लेकर अपनी उपलब्धियां गिनाती है, वहीं दूसरी ओर सीमा पर सैनिकों के आमने-सामने आने की घटनाएं चिंता पैदा करती हैं. रमेश ने दावा किया कि अरुणाचल प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में गश्त और सीमा तक पहुंच को लेकर समस्याएं सामने आई हैं. उन्होंने चीन की ओर से अरुणाचल प्रदेश के स्थानों के नाम बदलने और बड़े बांध के निर्माण से जुड़े मुद्दे भी उठाए. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 19 जून 2020 के बयान का भी जिक्र किया, जो गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों की शहादत के बाद दिया गया था. हालांकि, कांग्रेस के आरोपों और सीमा पर वास्तविक स्थिति से जुड़े दावों का स्वतंत्र तथ्यों के आधार पर अलग-अलग आकलन जरूरी है.

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क्यों संवेदनशील है सीमा विवाद?

भारत और चीन के बीच सीमा विवाद नया नहीं है. वर्ष 2017 में डोकलाम में दोनों देशों की सेनाएं लंबे समय तक आमने-सामने रही थीं. इसके बाद जून 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में हिंसक झड़प हुई, जिसमें भारत के 20 सैनिक शहीद हुए थे. इन घटनाओं ने साफ किया कि सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए सैन्य सतर्कता और कूटनीतिक बातचीत दोनों जरूरी हैं. अरुणाचल प्रदेश में सैनिकों के आमने-सामने आने की खबरें भी इसी व्यापक संदर्भ में देखी जा रही हैं.

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बताते चलें कि ITBP प्रमुख का बयान सीमा पर तैनात जवानों की भूमिका और भारत-चीन संबंधों की संवेदनशीलता को फिर सामने लाता है. आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सीमा पर स्थिति को शांत रखने के लिए दोनों देश क्या कदम उठाते हैं और सरकार इस विषय पर कितनी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करती है.

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