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LAC पर भारत की मजबूत पकड़… लद्दाख बॉर्डर के पास चीनी सेना की तैनाती में आई बड़ी कमी, कूटनीतिक रणनीतिक आई काम!

रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट बताती है कि भारत और चीन के बीच राजनीतिक, कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर लगातार बातचीत से सीमा पर स्थिरता बनाए रखने में मदद मिली.

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14 Sep 2026
( Updated: 14 Sep 2026
12:40 PM )
LAC पर भारत की मजबूत पकड़… लद्दाख बॉर्डर के पास चीनी सेना की तैनाती में आई बड़ी कमी, कूटनीतिक रणनीतिक आई काम!
Image Source- IANS
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भारत-चीन सीमा पर चीनी सैनिकों की तैनाती में बड़ी कमी आई है. रक्षा मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2025 में उत्तरी मोर्चे पर वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी के आसपास चीनी सेना की तैनाती में महत्वपूर्ण कमी देखी गई.

मंत्रालय के मुताबिक, LAC और पारंपरिक प्रशिक्षण क्षेत्रों में चीनी सेना की करीब 10 संयुक्त हथियार ब्रिगेड के आकार की टुकड़ियां तैनात रहीं. जबकि, भारतीय सेना ने सभी क्षेत्रों में मजबूत और रणनीतिक रूप से उपयुक्त तैनाती बनाए रखी. ताकि LAC पर किसी भी तरह की चुनौती का सामना किया जा सके. 

भारत की कूटनीतिक रणनीतिक आई काम 

रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट बताती है कि भारत और चीन के बीच राजनीतिक, कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर लगातार बातचीत से सीमा पर स्थिरता बनाए रखने में मदद मिली. कार्यकारी तंत्र की बैठकों, विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता और कोर कमांडर स्तर की बातचीत के साथ सीमा कार्मिक बैठकें भी जारी रहीं. इन बैठकों में दोनों पक्षों ने आपसी चिंता से जुड़े मुद्दों को सौहार्दपूर्ण माहौल में उठाया और समाधान की दिशा में बातचीत की. भारत और चीन के बीच सैन्य संवाद पर लगातार जोर दिया जा रहा है. 

इसके बाद दोनों देश अब LAC पर तनाव कम करने की कोशिश कर रहे हैं. अभी तक कि बैठक में सकारात्मक बातचीत और सौहार्दपूर्ण माहौल नजर आया. ऐसे में आपसी विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाने की कोशिश पर जोर देना आसान रहा.

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सीमा पर सेना की ताकत बढ़ाने पर जोर 

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, LoC पर भी तनाव और घुसपैठ की को कोशिशों के खिलाफ लगातार सेना की कार्रवाई जारी है. साल 2025 में LoC पर आतंकियों ने घुसपैठ की छह कोशिशें कीं. सेना के अभियानों के दौरान 12 पाकिस्तानी आतंकियों को मार गिराया गया. पिछले वर्षों की तुलना में एलओसी पर घुसपैठ की कोशिशों में कमी आई. हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों ने आकलन किया कि आतंकियों ने अब अंतरराष्ट्रीय सीमा वाले क्षेत्रों पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करना शुरू किया है.

इनमें मादक पदार्थों और युद्ध जैसी सामग्री की तस्करी की कोशिशें भी शामिल हैं. वर्ष 2025 में एलओसी पर संघर्ष विराम उल्लंघन के मामलों में वृद्धि देखी गई. यहां ऐसे कुल 163 मामले दर्ज किए गए. 

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ऑपरेशन सिंदूर के बाद कई बार हुआ सीजफायर का उल्लंघन

साल 2024 में सीजफायर के केवल दो मामले सामने आए थे, 2025 में हुए 163 उल्लंघनों में से 124 मामले ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुए. इससे इस अवधि में सीमा पर बढ़े तनाव का अंदाजा लगाया जा सकता है. जम्मू-कश्मीर के भीतरी इलाकों में भी वर्ष 2025 के दौरान आतंकवाद विरोधी अभियान तेज रहे. इन अभियानों में 19 आतंकियों को मार गिराया गया. इनमें आठ पाकिस्तानी आतंकी थे, यानी मारे गए आतंकियों में करीब 40 प्रतिशत पाकिस्तानी थे. 

साल 2025 में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर ड्रोन घुसपैठ के कुल 863 मामले सामने आए. इनमें जम्मू-कश्मीर में नौ और पंजाब और राजस्थान में 854 मामले दर्ज किए गए. सुरक्षा बलों ने ड्रोन के खतरे से निपटने के लिए स्पूफर और जैमर का प्रभावी इस्तेमाल किया. सुरक्षा बलों ने कार्रवाई करते हुए 237 ड्रोन गिराए. इनमें पांच ड्रोन युद्ध जैसी सामग्री लेकर आए थे. 

रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट बताती है कि अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास सुरक्षा बलों ने दो एके-47 राइफलें, 75 पिस्तौल और 281.41 किलोग्राम प्रतिबंधित सामग्री भी बरामद की. माना जाता है कि इनमें से कुछ सामग्री ड्रोन के जरिए पहुंचाई गई थी. 

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रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन गतिविधियों से संकेत मिलता है कि विरोधी पक्ष हथियारों, गोला-बारूद और मादक पदार्थों की निगरानी और तस्करी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ा रहा है.  पंजाब में ऐसी गतिविधियों पर विशेष रूप से ध्यान दिया गया है. 

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With IANS Input 

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