जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

जब अखिलेश राज में हुआ रोहिंग्याओं के समर्थन में बुद्धा पार्क-बौद्ध भिक्षुओं पर हमला...जगजाहिर है सपा का तुष्टीकरण और कथनी-करनी का सच

बौद्ध धर्मस्थलों व स्मारकों का विकास या संरक्षण कभी समाजवादी पार्टी के एजेंडे में नहीं रहा. उल्टे उनके शासनकाल में बौद्ध अनुयायी किस तरह अपमानित किए गए, इसे एक घटना से समझा जा सकता है.

Author
09 Sep 2026
( Updated: 09 Sep 2026
01:59 PM )
जब अखिलेश राज में हुआ रोहिंग्याओं के समर्थन में बुद्धा पार्क-बौद्ध भिक्षुओं पर हमला...जगजाहिर है सपा का तुष्टीकरण और कथनी-करनी का सच
Image Source- IANS
Advertisement

-बृजलाल

चुनाव नज़दीक देख समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव लगभग रोज़ ही जनता से नए-नए वादे करने में जुट गए हैं और इसी क्रम में उन्होंने यह भी कहा है कि जब वह सत्ता में आएंगे तो बौद्ध तीर्थस्थलों का विकास करेंगे. लेकिन उनके इस वादे को लेकर उत्तर प्रदेश की जनता और विशेषकर दलित-शोषित समाज को यह विचार अवश्य करना चाहिए कि सपा का अतीत क्या रहा है और बौद्ध तीर्थस्थलों के प्रति उनका रवैया पूर्व में क्या रहा है? सच्चाई यह है कि बौद्ध धर्मस्थलों व स्मारकों का विकास या संरक्षण कभी समाजवादी पार्टी के एजेंडे में नहीं रहा. उल्टे उनके शासनकाल में बौद्ध अनुयायी किस तरह अपमानित किए गए, इसे एक घटना से समझा जा सकता है.

17 अगस्त 2012 को रोहिंग्या मुसलमानों के समर्थन में क्या हुआ था?

अखिलेश यादव मार्च 2012 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने. 17 अगस्त 2012 को लखनऊ की टीले वाली मस्जिद में अलविदा की नमाज़ पढ़ी जाती है. नमाज़ के बाद सुनियोजित ढंग से मुसलमानों की भीड़ मस्जिद से रोहिंग्या मुसलमानों के समर्थन में नारेबाजी करते हुए बुद्धा पार्क की तरफ़ बढ़ती है. मौके पर मौजूद पुलिस बल उन्हें नहीं रोकता, क्योंकि वह सपा की मुस्लिम तुष्टीकरण नीति से भलीभांति परिचित था. पूरी तरह अराजकता पर उतारू भीड़ ने बुद्धा पार्क पर हमला कर दिया और भगवान बुद्ध की प्रतिमा पर चढ़कर उसे तोड़ डाला. अन्य बौद्ध-प्रतीकों और दुकानों को भी तहस-नहस कर दिया.

Advertisement

रोहिंग्या के समर्थन में बुद्धा पार्क पर हमला, बौद्ध भिक्षुओं पर हमला!

उग्र भीड़ यहीं नहीं रुकती, उसने भंते श्री अशोकानंद जी एवं उनके शिष्यों पर प्राणघातक हमला बोल दिया और उन्हें बुरी तरह मारा-पीटा, उनके कपड़े फाड़ दिए, क्योंकि उन्हें बौद्ध भिक्षुओं के भगवा वस्त्रों से भी नफ़रत थी. उनकी तीन गाड़ियाँ तोड़ दी गईं. प्रश्न उठता है कि ऐसा क्यों किया गया? क्योंकि, अलविदा की नमाज़ के बाद मुसलमानों के बीच म्यांमार (बर्मा) के बौद्धों के विरुद्ध ज़हर उगला गया था. उस समय म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों और म्यांमार के बौद्ध नागरिकों के बीच झगड़े चल रहे थे. रोहिंग्या मुसलमानों ने बौद्धों पर हमले किए, उनके मकान जलाए और कई नरसंहार किए. वे म्यांमार के ‘अराकान’ क्षेत्र को बौद्धों से मुक्त करके ‘मुस्लिम’ देश बनाना चाहते थे. इस पर बौद्धों ने अपना बचाव किया और अंततः वहां हुए सांप्रदायिक दंगों में रोहिंग्या मुसलमानों को भागना पड़ा.

इसके बाद रोहिंग्या मुसलमान भारी संख्या में बांग्लादेश होते हुए भारत में भी घुस आए और यहां भी उत्पात मचाने लगे, आतंकी घटनाएं भी कीं. यह बड़ा सवाल है कि भागे हुए रोहिंग्याओं ने आख़िर दुनिया के 56 मुस्लिम देशों में क्यों नहीं शरण ली, भारत ही क्यों? अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र के तहत, दुनिया भर के मुस्लिम आतंकी और उनका समाज भारत को ‘दारुल इस्लाम’ यानी ‘गज़वा-ए-हिंद’ बनाना चाहता है. झगड़ा म्यांमार में और बुद्ध प्रतिमा तोड़ी जाती है लखनऊ में, बौद्ध संत और उनके शिष्यों पर हमला लखनऊ में. थाना हज़रतगंज में भंते अशोकानंद जी ने मुकदमा दर्ज कराया, किंतु तुष्टीकरण की राजनीति करने वाली अखिलेश सरकार ने दंगाइयों व आरोपियों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की... क्योंकि दंगाई मुसलमान थे.

Advertisement

यह घटना सत्ता के संरक्षण में अराजकता का बड़ा उदाहरण है. दंगाई हज़रतगंज में तोड़फोड़ करते हुए विधानसभा मार्ग तक आ गए, लेकिन पुलिस ने आंसू-गैस और लाठीचार्ज तक नहीं किया. यह पहली बार हुआ कि दंगाइयों की भीड़ चौक से तोड़फोड़ करती हुई संवेदनशील हज़रतगंज होते हुए विधानसभा के सामने पहुंच गई. पुलिस अधिकारी भीड़ के आगे-आगे हज़रतगंज की दुकानें बंद करवाते हुए आगे बढ़ रहे थे. दंगाइयों पर ‘राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम’ (एनएसए) का मामला बनता था, किंतु अखिलेश जी ने आईपीसी की धाराओं में भी कोई कार्रवाई नहीं कराई.

मैं अखिलेश यादव जी को बताना चाहता हूं कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार सभी धर्मों का सम्मान करती है. इसीलिए “विरासत से विकास” की योजना बनाई गई, अयोध्या में भव्य राममंदिर, काशी-विश्वनाथ कॉरिडोर, माँ विंध्यवासिनी कॉरिडोर, कुशीनगर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट और प्रदेश में ‘बुद्धिस्ट सर्किट’ योजना के तहत बौद्ध स्थलों का विकास हो रहा है. मेरे गृह जनपद सिद्धार्थनगर में भगवान बुद्ध की जन्मस्थली ‘कपिलवस्तु’ से 1898 में अंग्रेज़ ज़मींदार विलियम स्तूप से भगवान बुद्ध के रेलिक्स (अवशेष) निकालकर लंदन ले गया था. उन अवशेषों की 7 मई 2025 को हांगकांग में नीलामी होनी थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व में न केवल नीलामी रोकी गई, अपितु उन पवित्र अवशेषों को भारत लाकर दिल्ली के राय पिथौरा फोर्ट में एक नवनिर्मित स्मारक में स्थापित कराया गया. मैंने भी प्रधानमंत्री जी को नीलामी रोकने के लिए 5 मई 2025 को पत्र लिखा था. अखिलेश जी को वहां जाना चाहिए, लेकिन वह नहीं जाएंगे, वह अयोध्या भी नहीं जाएंगे, क्योंकि वोट-बैंक का सवाल है.

अखिलेश राज में बौद्धों का अपमान हुआ और भाजपा राज में उनका सम्मान. बाबा साहेब ने नागपुर में बौद्ध धर्म की दीक्षा ग्रहण की थी. प्रधानमंत्री जी ने नागपुर दीक्षास्थल सहित बाबा साहेब के सम्मान में ‘पंचतीर्थ’ बनवाए. अखिलेश राज में उत्तर प्रदेश में बाबा साहेब को अपमानित किया गया. उनके नाम पर बने कन्नौज मेडिकल कॉलेज से उनका नाम हटा दिया गया. बाबा साहेब आंबेडकर ग्रीन गार्डेन का नाम बदलकर ‘जनेश्वर मिश्रा पार्क’ कर दिया गया. 5 सितंबर 2016 को गाजियाबाद हज हाउस के लोकार्पण पर अखिलेश यादव के प्रिय मंत्री आज़म ख़ान ने बाबा साहेब को भू-माफिया कहा था, अखिलेश जी ने उन्हें रोका तक नहीं और तालियां बजाते रहे. यह बाबा साहेब से उनकी नफ़रत का खुला उदाहरण था.

Advertisement

ये भी पढ़ें: ओम प्रकाश राजभर का अखिलेश यादव पर बड़ा हमला, बोले- ‘अहीर-जहीर’ को कंट्रोल नहीं किया तो 27 सीटें भी नहीं जीतेंगे 

अखिलेश यादव का एजेंडा ‘मुस्लिम तुष्टीकरण’ है!

मुझे यह कहने में संकोच नहीं कि अखिलेश यादव जी का एजेंडा ‘मुस्लिम तुष्टीकरण’ है. वह स्वयं भी बौद्ध विरोधी, दलित विरोधी, दलित महापुरुष विरोधी व संत विरोधी हैं. 2013 में एक लाख से अधिक दलित अधिकारियों/कर्मियों को पदावनत करने वाले, लोकसभा में समाजवादी पार्टी के दलित सांसद यशवीर (नगीना बिजनौर) से दलितों के प्रमोशन में आरक्षण का बिल फड़वाने वाले अखिलेश जी के मुंह से बौद्ध तीर्थस्थलों के विकास की बात शोभा नहीं देती. सपा को दलित कभी माफ नहीं करेंगे. जब तक अतीत के इन ऐतिहासिक अपराधों और तुष्टीकरण की नीति का उत्तर नहीं दिया जाता, तब तक बौद्ध स्थलों के संरक्षण के दावे केवल एक राजनीतिक भ्रमजाल से अधिक कुछ नहीं हैं.

वंदे मातरम्! नमो बुद्धाय!

Advertisement

यह भी पढ़ें

लेख: बृजलाल, पूर्व पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश एवं सदस्य, राज्यसभा
एडिट: केशव झा

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
G
Guest (अतिथि)
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें