भारतीय रेलवे का आखिरी स्टेशन कौन सा है जहाँ आज भी मौजूद हैं ब्रिटिश काल के अनोखे उपकरण
बर्फीले पहाड़ों से लेकर समंदर तक और रेगिस्तान से लेकर घने जंगलों तक, रेल की पटरियां पूरे देश को एक सूत्र में पिरोती हैं। देश के अलग अलग छोरों पर नजर डालें तो सबसे उत्तरी रेलवे स्टेशन बारामूला रेलवे स्टेशन है जहां से आगे भारतीय रेलवे की पटरियां नहीं जातीं। ठीक उसी तरह सबसे दक्षिणी रेलवे स्टेशन कन्याकुमारी रेलवे स्टेशन है। इसके अलावा सबसे पश्चिमी रेलवे स्टेशन ओखा रेलवे स्टेशन है। लेकिन आज हम बाते करेंगे भारत के सबसे पूर्वी सीमांत रेलवे स्टेशन की।
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भारत के एक कोने को दूसरे कोने से जोड़ने वाली भारतीय रेल की पटरियां सिर्फ पटरियां नहीं हैं बल्कि हमारे देश की जीवनरेखा हैं। भारतीय रेलवे का विशाल नेटवर्क हर दिन करोड़ों लोगों को उनकी मंजिल तक पहुँचाता है। लेकिन क्या आपको पता है की ये रेलवे का जाल कहाँ ख़त्म होता है?
बर्फीले पहाड़ों से लेकर समंदर तक और रेगिस्तान से लेकर घने जंगलों तक, रेल की पटरियां पूरे देश को एक सूत्र में पिरोती हैं। देश के अलग अलग छोरों पर नजर डालें तो सबसे उत्तरी रेलवे स्टेशन बारामूला रेलवे स्टेशन है जहां से आगे भारतीय रेलवे की पटरियां नहीं जातीं। ठीक उसी तरह सबसे दक्षिणी रेलवे स्टेशन कन्याकुमारी रेलवे स्टेशन है। इसके अलावा सबसे पश्चिमी रेलवे स्टेशन ओखा रेलवे स्टेशन है। लेकिन आज हम बाते करेंगे भारत के सबसे पूर्वी सीमांत रेलवे स्टेशन की।
भारत का सबसे पूर्वी सीमांत रेलवे स्टेशन
ये है सिंहाबाद रेलवे स्टेशन जो भारत के पश्चिम बंगाल राज्य के मालदा जिले में स्थित है। इस स्टेशन की सबसे बड़ी खासियत ये है कि इसके आगे से पड़ोसी देश बांग्लादेश की सीमा शुरू हो जाती है। ये स्टेशन सिर्फ भौगोलिक रूप से महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि इसका ऐतिहासिक महत्व भी है। आजकल जहाँ हर रेलवे स्टेशन आधुनिक और डिजिटल हो चुका है वहीं यहाँ आज भी अंग्रेजों के जमाने के मैन्युअल उपकरण लगे हुए हैं जैसे उस ज़माने में इस्तेमाल होने वाले गियर और बैरियर। यहाँ की एक और दिलचस्प बात ये है की यहाँ के टिकट काउंटर हमेशा बंद रहते हैं।
यहाँ नहीं रूकती कोई यात्री ट्रैन
इस स्टेशन की अनोखी बात ये है की यहाँ कोई भी पैसेंजर ट्रेन नहीं रूकती। बंटवारे के बाद से ही इस मार्ग से यात्री ट्रेन सेवाओं को धीरे-धीरे कम किया गया और फिर पूरी तरह से बंद कर दिया गया। जिसके बाद यहाँ के प्लेटफॉर्म पूरी तरह से सुनसान रहने लगें और इस स्टेशन का इस्तेमाल विशेष रूप से मालगाड़ियों की आवाजाही के लिए ही किया जाने लगा।
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भारत के इस आखिरी स्टेशन 'सिंहाबाद' को पार करते ही बांग्लादेश का 'रोहनपुर' रेलवे स्टेशन आता है और भारतीय रेल सेवाएं इसी स्टेशन पर आकर रुक जाती हैं।