गाड़ी का PUC बनवाना अब नहीं होगा आसान! सरकार ने कसी नकेल, जानें नए नियम
PUC Center Rules: PUC यानी Pollution Under Control सर्टिफिकेट बनवाना सिर्फ मशीन से प्रदूषण की जांच कराने तक सीमित नहीं रहेगा. PUC सेंटर पर होने वाली पूरी प्रक्रिया पर भी नजर रखी जाएगी. इसके लिए दिल्ली सरकार की ओर से PUC सेंटरों पर सर्विलांस कैमर लगाना अनिवार्य किए जाने की तैयारी है.
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PUC Center Rules: दिल्ली-NCR में बढ़ते प्रदूषण को कम करने के लिए वाहनों की प्रदूषण जांच व्यवस्था को और सख्त किया जा रहा है. अब PUC यानी Pollution Under Control सर्टिफिकेट बनवाना सिर्फ मशीन से प्रदूषण की जांच कराने तक सीमित नहीं रहेगा. PUC सेंटर पर होने वाली पूरी प्रक्रिया पर भी नजर रखी जाएगी. इसके लिए दिल्ली सरकार की ओर से PUC सेंटरों पर सर्विलांस कैमर लगाना अनिवार्य किए जाने की तैयारी है. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि वाहन की वास्तव में जांच हो और उसके बाद ही PUC सर्टिफिकेट जारी किया जाए
PUC सेंटर पर कैमरे क्यों लगाए जा रहे हैं?
PUC सर्टिफिकेट यह बताता है कि किसी वाहन से निकलने वाला प्रदूषण तय मानकों के अंदर है. लेकिन अगर बिना वाहन की सही जांच किए ही सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाए, तो प्रदूषण कम करने की पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो सकते हैं. इसी वजह से अब सेंटरों की निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है. कैमरों की मदद से यह देखा जा सकेगा कि जिस वाहन का PUC बनाया गया है, वह सेंटर पर आया भी था या नहीं और उसकी प्रदूषण जांच वास्तव में हुई थी या नहीं.
फर्जी PUC पर लग सकती है रोक
कई बार वाहन मालिकों के लिए PUC सर्टिफिकेट सिर्फ एक जरूरी कागज बनकर रह जाता है. इसी वजह से कुछ जगहों पर बिना उचित जांच के सर्टिफिकेट जारी किए जाने की शिकायतें भी सामने आती रही है.. नई निगरानी व्यवस्था ऐसी गड़बड़ियों पर लगाम लगाने में मदद कर सकती है.. अगर किसी सेंटर पर नियमों के खिलाफ काम होता है, तो कैमरे की रिकॉर्डिंग जांच के दौरान उपयोगी साबित हो सकती है.
इसका सीधा फायदा उन वाहन मालिकों को भी मिलेगा, जो नियमों के मुताबिक अपनी गाड़ी की जांच करवाते हैं. सही जांच होने से ऐसे सेंटरों पर भी दबाव बढ़ेगा, जो बिना जांच के PUC जारी करने की कोशिश करते हैं.
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वाहन मालिकों को भी रहना होगा तैयार
नई व्यवस्था लागू होने के बाद वाहन मालिकों के लिए भी जरूरी होगा कि वे PUC बनवाने से पहले अपनी गाड़ी की हालत ठीक रखें... अगर वाहन ज्यादा धुआं छोड़ रहा है या उसका प्रदूषण तय सीमा से ऊपर है, तो केवल सर्टिफिकेट बनवाने की कोशिश करने के बजाय पहले समस्या को ठीक कराना बेहतर होगा.
खासकर पुराने पेट्रोल और डीजल वाहनों की समय-समय पर सर्विसिंग और प्रदूषण जांच कराना जरूरी है. इंजन, एग्जॉस्ट सिस्टम और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े हिस्से ठीक रहने पर ही वाहन तय मानकों के भीतर रह सकता है.
PUC सेंटर संचालकों की बढ़ेगी जिम्मेदारी
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कैमरों की निगरानी शुरू होने के बाद PUC सेंटर संचालकों की जिम्मेदारी भी बढ़ जाएगी. उन्हें नियमों के मुताबिक वाहन की जांच करनी होगी और जांच के नतीजे के आधार पर ही सर्टिफिकेट जारी करना होगा. इससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है...
दिल्ली-NCR में प्रदूषण के कई कारण हैं और वाहनों से निकलने वाला धुआं भी उनमें शामिल है. ऐसे में सिर्फ प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर कार्रवाई करना ही काफी नहीं है. यह भी जरूरी है कि PUC सर्टिफिकेट देने वाली व्यवस्था ईमानदारी और सही तरीके से काम करे..सर्विलांस कैमरों की व्यवस्था इसी दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकती है...