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बंगाल में BJP का योगी मॉडल पर बड़ा दांव, संत-महंतों के सहारे ममता को चुनौती; साधेगी हिंदू वोट

पश्चिम बंगाल चुनाव में बीजेपी ने नई रणनीति अपनाते हुए संन्यासियों और पुजारियों को उम्मीदवार बनाया है, ताकि हिंदू वोट को साधकर चुनावी माहौल अपने पक्ष में किया जा सके.

बंगाल में BJP का योगी मॉडल पर बड़ा दांव, संत-महंतों के सहारे ममता को चुनौती; साधेगी हिंदू वोट
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पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राज्य में सियासी हलचल काफी तेज है. सत्ताधारी टीएमसी (TMC) पुनः एक बार फिर राज्य की सत्ता में काबिज होने का दावा कर रही हैं तो वहीं सूबे की मुख्य विपक्षी पार्टी बीजेपी भी इस बार ममता बनर्जी को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाने के लिए नई रणनीति के साथ काम कर रही है. बीजेपी ने विधानसभा चुनाव में हिंदू वोट को एक तरफ़ा साधने के लिए कई संन्यासियों, महंतों और पुजारियों को उम्मीदवार बनाया है. इसके पीछे पार्टी का उद्देश्य है कि अपने प्रत्याशियों के आध्यात्मिक प्रभाव का लाभ उठाकर चुनाव में अपने पक्ष में माहौल तैयार कर सकें.

बीजेपी ने अपनाया योगी मॉडल

दरअसल, बीजेपी अब पश्चिम बंगाल में उत्तर प्रदेश वाले मॉडल पर काम कर रही है. इसका सबसे बड़ा उदाहरण यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ हैं. यही वजह है कि पार्टी ने धार्मिक पृष्ठभूमि वाले मठ-मंदिरों से जुड़े चेहरे को चुनाव में बड़ा मौक़ा दिया है. जिन्हें बंगाल में आम बोलचाल की भाषा में 'महाराज' के नाम से पुकारा जाता है. जो लंबे समय से सामाजिक हितों के साथ-साथ सनातन के विचार को बढ़ावा देने के लिए काम करती आई है. 

कई सीटों पर संत और धार्मिक चेहरों को उतारा मैदान में

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कालीगंज सीट पर उत्पल महाराज को मौका: कालीगंज सीट पर बीजेपी ने इस बार नया चेहरा उतारते हुए 42 वर्षीय संन्यासी उत्पल महाराज को उम्मीदवार बनाया है. उन्होंने वर्तमान विधायक सौमेन रॉय की जगह ली है. उत्पल महाराज पहले भारत सेवाश्रम संघ से जुड़े रहे और कालीगंज में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं. नामांकन दाखिल करने के बाद उन्होंने संघ से अलग होने का ऐलान किया, जिसके बाद संगठन ने उन्हें निलंबित कर दिया. इस सीट पर उनका मुकाबला टीएमसी के निताई बैश्य से होगा.

उलुबेरिया दक्षिण में स्वामी मंगलानंद पुरी पर दांव: उलुबेरिया दक्षिण सीट पर बीजेपी ने स्वामी मंगलानंद पुरी पर भरोसा जताया है. वह एक धार्मिक पहचान रखने वाले नेता हैं और पार्टी ने उन्हें एक अहम जिम्मेदारी सौंपी है. यहां उनकी टक्कर टीएमसी के मौजूदा विधायक पुलक रॉय से है. पिछली बार बीजेपी को इस सीट पर करीब 27 हजार वोटों से हार का सामना करना पड़ा था, जिसे इस बार पाटने की चुनौती उनके सामने है.

नवद्वीप में श्रुति शेखर गोस्वामी पर भरोसा: नवद्वीप सीट पर बीजेपी ने मंदिर से जुड़े एक प्रमुख चेहरे श्रुति शेखर गोस्वामी को मैदान में उतारा है. वह श्री श्री राधा सुदर्शन लाल जीयू मंदिर से जुड़े पुजारी हैं. उनकी उम्मीदवारी से स्थानीय कार्यकर्ताओं में उत्साह देखने को मिल रहा है. इस सीट पर उनका मुकाबला टीएमसी के वरिष्ठ नेता और पांच बार के विधायक पुंडरीकाक्ष साहा से है. बीजेपी यहां धार्मिक आधार पर वोट बैंक मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है.

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बेहाला पूर्व में सुनील महाराज की एंट्री: बेहाला पूर्व सीट पर पार्टी ने सुनील महाराज को टिकट दिया है, जो शिव सोंग सेवा संघ से जुड़े एक संन्यासी हैं. उनका मुकाबला टीएमसी के सुभाशीष चक्रवर्ती से होगा. बीजेपी इस सीट पर पिछली बार के करीब 40 हजार वोटों के अंतर को कम करने की कोशिश में है और इसके लिए सेवा कार्यों से जुड़ी उनकी छवि को आगे बढ़ा रही है.

हासन सीट पर निखिल बनर्जी को जिम्मेदारी: वहीं, बीरभूम जिले की हासन सीट पर बीजेपी ने तारापीठ मंदिर से जुड़े पुजारी निखिल बनर्जी को उम्मीदवार बनाया है. इस सीट पर उनकी सीधी टक्कर टीएमसी के प्रभावशाली नेता काजल शेख से होगी. यहां बीजेपी पिछली बार करीब 51 हजार वोटों से पीछे रही थी, जिसे इस बार कम करना पार्टी के लिए बड़ी चुनौती है.

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बताते चलें कि इन आध्यात्मिक हस्तियों और प्रभावशाली नेताओं और की किस्मत और बीजेपी की इस रणनीति का फैसला 4 मई को नतीजों के साथ सामने आएगा. अब नजर इस बात पर रहेगी कि भाजपा की यह धार्मिक रणनीति बंगाल की सत्ता तक पहुंचने में कितनी कारगर साबित हो.

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