ट्यूबवेल के पानी की होगी जांच, किसानों को मोबाइल पर मिलेगी पूरी रिपोर्ट, हरियाणा सरकार की नई पहल
Haryana: हरियाणा में खेती को और बेहतर और मुनाफे वाली बनाने के लिए सरकार ने एक नई और खास पहल शुरू की है. अब सिर्फ मिट्टी ही नहीं, बल्कि ट्यूबवेल के पानी की भी जांच की जाएगी. सरकार का मानना है कि अच्छी फसल सिर्फ अच्छी जमीन से नहीं, बल्कि अच्छे पानी से भी जुड़ी होती है.
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हरियाणा में खेती को और बेहतर और मुनाफे वाली बनाने के लिए सरकार ने एक नई और खास पहल शुरू की है. अब सिर्फ मिट्टी ही नहीं, बल्कि ट्यूबवेल के पानी की भी जांच की जाएगी. सरकार का मानना है कि अच्छी फसल सिर्फ अच्छी जमीन से नहीं, बल्कि अच्छे पानी से भी जुड़ी होती है. इसी सोच के साथ 'जल स्वास्थ्य कार्ड' योजना शुरू की गई है, ताकि किसान अंदाजे से नहीं बल्कि वैज्ञानिक जानकारी के आधार पर खेती कर सकें.
इस योजना के तहत राज्य के करीब 8 लाख ट्यूबवेलों के पानी की जांच होगी. सरकार का दावा है कि इससे अगले तीन साल में खाद्यान्न उत्पादन में करीब 5 लाख टन तक बढ़ोतरी हो सकती है. यानी किसान को सही फसल चुनने में मदद मिलेगी, लागत कम होगी और कमाई बढ़ेगी. गांवों में अक्सर किसान सालों से एक ही तरीके से खेती करते आ रहे हैं, लेकिन अब तकनीक की मदद से उन्हें यह पता चल सकेगा कि उनके खेत और पानी के हिसाब से कौन सी फसल ज्यादा अच्छी रहेगी..
अब मोबाइल पर मिलेगा ‘जल स्वास्थ्य कार्ड’
इस योजना की सबसे खास बात यह है कि पूरी प्रक्रिया को हाई-टेक बनाया गया है. ट्यूबवेल से लिए जाने वाले पानी के हर सैंपल को GPS लोकेशन से जोड़ा जाएगा. इससे रिपोर्ट पूरी तरह सही और भरोसेमंद रहेगी. वैज्ञानिक पानी की जांच कई अलग-अलग पैमानों पर करेंगे, जिनमें पीएच वैल्यू, क्षारीयता, कैल्शियम, मैग्नीशियम और सल्फेट जैसे तत्व शामिल होंगे.
जांच पूरी होने के बाद किसान को ‘जल स्वास्थ्य कार्ड’ सीधे उसके मोबाइल फोन पर भेजा जाएगा. इस कार्ड में सिर्फ पानी की गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि बोरिंग की गहराई और भू-जल स्तर की जानकारी भी होगी. यानी किसान को एक तरह से अपने खेत के पानी का पूरा हेल्थ रिपोर्ट कार्ड मिल जाएगा.
खराब पानी से खराब हो रही थी जमीन
हरियाणा में लगभग 60 प्रतिशत खेती ट्यूबवेल के पानी पर निर्भर है. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में पानी में बढ़ते नमक और दूसरे भारी तत्वों की वजह से खेतों की उर्वरा शक्ति कम होने लगी थी. कई किसानों को समझ ही नहीं आता था कि अच्छी खाद और मेहनत के बावजूद फसल कमजोर क्यों हो रही है.
असल में कई जगहों पर पानी खेती के लिए ठीक नहीं रह गया था. खराब पानी धीरे-धीरे जमीन को भी नुकसान पहुंचा रहा था. इससे खेती की लागत बढ़ रही थी और उत्पादन घट रहा था. अब सरकार की यह नई योजना किसानों को समय रहते चेतावनी और समाधान दोनों देगी.
वैज्ञानिक बताएंगे कैसे सुधरेगा पानी
इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए कृषि विभाग ने हिसार के Chaudhary Charan Singh Haryana Agricultural University और करनाल के मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों की एक विशेष टीम बनाई है. यह टीम किसानों को बताएगी कि अगर पानी में ज्यादा नमक या कोई खराब तत्व है, तो उसे कैसे सुधारा जा सकता है.
वैज्ञानिक किसानों को जिप्सम और दूसरे पोषक तत्वों के इस्तेमाल की सलाह देंगे, ताकि पानी और मिट्टी दोनों को खेती के लिए बेहतर बनाया जा सके. इससे किसानों की खाद और बीज पर होने वाली बेकार खर्च भी कम होगी. सबसे बड़ी बात यह है कि किसान अब बिना जानकारी के नुकसान उठाने के बजाय पहले ही सही फैसला ले सकेंगे.
खेती में आएगा बड़ा बदलाव
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यह योजना सिर्फ पानी जांचने तक सीमित नहीं है, बल्कि खेती के पूरे तरीके को बदलने की कोशिश मानी जा रही है. अब किसान यह समझ पाएंगे कि किस खेत में कौन सी फसल ज्यादा अच्छी होगी और किस जमीन को ज्यादा देखभाल की जरूरत है.
सरकार की कोशिश है कि खेती को पारंपरिक अंदाज से निकालकर वैज्ञानिक सोच के साथ जोड़ा जाए. अगर यह योजना सफल होती है, तो हरियाणा के किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ खेती को लंबे समय तक सुरक्षित और टिकाऊ बनाने में भी बड़ी मदद मिल सकती है.
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