ईरान-US की जंग का भारत पर कितना असर, होर्मुज का विकल्प क्या? विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दिए जवाब
ईरान और अमेरिका के बीच जंग को एक महीने से ज्यादा का समय हो गया है. इस जंग ने आर्थिक मोर्चे पर कई देशों को चोट पहुंचाई है. भारत पर जंग के असर और प्लानिंग पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बात की.
Follow Us:
S Jaishankar Statement on Iran-US War: मिडिल ईस्ट में भयंकर तनाव और संघर्ष के बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत की स्थिति साफ की. उन्होंने कहा, भारत ने हाल के वैश्विक झटकों का मजबूती से सामना किया है. उन्होंने यह बात पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और उसके आर्थिक असर के संदर्भ में कही.
दरअसल, विदेश मंत्री एस जयशंकर IIM रायपुर के दीक्षांत समारोह में शामिल हुए थे. जहां उन्होंने ईरान और अमेरिका में युद्ध के बाद बदले वैश्विक हालातों पर चर्चा की. उन्होंने कहा, वैश्विक तनाव के माहौल के बावजूद भारत ने घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों तरह की चुनौतियों को 'काफी हद तक सफलतापूर्वक' संभाला है.
भारत पर कितना हुआ वैश्विक तनाव का असर?
एस जयशंकर ने कहा, ‘अब किसी भी क्षेत्र में होने वाले संघर्ष का असर सिर्फ वहीं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्वीकरण के कारण उसका प्रभाव दुनिया के अन्य हिस्सों में भी महसूस किया जाता है. इसमें कोई शक नहीं है कि हाल के समय में कई वैश्विक झटकों ने हमारी मजबूती की परीक्षा ली है और भारत इनसे मजबूती के साथ बाहर निकला है.’
उन्होंने यह भी बताया कि फरवरी में अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर किए गए हमलों के बाद पश्चिम एशिया में पैदा हुआ संकट वैश्विक ईंधन सप्लाई चेन को प्रभावित कर रहा है और इससे हाइड्रोकार्बन की कमी भी देखी जा रही है. हालांकि ऐसी स्थिति में विदेश मंत्री ने भारत की क्षमताओं की ताकत याद दिलाई. उन्होंने कहा, मजबूत घरेलू क्षमताएं विकसित करना जोखिम को कम करने और रणनीतिक ताकत बढ़ाने का सबसे प्रभावी तरीका है.
‘हथियार की तरह हर चीज का इस्तेमाल’
उन्होंने बदलती वैश्विक व्यवस्था की ओर भी इशारा करते हुए कहा, जहां ताकत और प्रभाव का संतुलन लगातार बदल रहा है, मौजूदा अस्थिरता संरचनात्मक है. उनके अनुसार, टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, सैन्य क्षमता, कनेक्टिविटी और संसाधनों में तेजी से हो रहे बदलावों ने देशों के बीच प्रतिस्पर्धा को और बढ़ा दिया है.
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, आज हर चीज का इस्तेमाल रणनीतिक रूप से किया जा रहा है और कई मामलों में इसे हथियार की तरह भी इस्तेमाल किया जा रहा है. विदेश मंत्री ने कहा कि इस वजह से अब देशों और आर्थिक नीतियों में जोखिम कम करने, विविधता बढ़ाने और मजबूती पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है. माना जा रहा है ये बात उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के संदर्भ में कही थी. क्योंकि अमेरिका के हमलों के बाद ईरान ने तेल और गैस आपूर्ति को पूरा करने वाले सबसे बड़े मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर प्रभावित किया है. हालांकि भारत के साथ मित्रता की बात करते हुए ईरान ने भारतीय जहाजों को निकले की परमिशन दी है.
विदेश मंत्री ने क्यों दिलाई कोविड महामारी की याद?
यह भी पढ़ें
एस जयशंकर ने कोविड-19 महामारी, जारी युद्ध और जलवायु परिवर्तन को इस दशक की सबसे बड़ी चुनौतियां बताया. उन्होंने कहा कि समावेशी विकास, प्रतिनिधित्व वाली राजनीति और मजबूत नेतृत्व इन चुनौतियों से निपटने के लिए मजबूत आधार तैयार कर रहे हैं. भारत ने हमेशा वैश्विक संकटों का मजबूती से सामना किया है.
कृपया Google से लॉग इन करें टिप्पणी पोस्ट करने के लिए
Google से लॉग इन करें