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भारत में तो गजब ही हो गया, घर में ही बना दिया सुरंग और 32 साल तक इराकी राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन की तरह छुपा रहा!

ओडिशा में 1994 के हत्या मामले का एक भगोड़ा आरोपी 32 साल तक जमीन के नीचे बने सीक्रेट तहखाने में छिपकर रहता रहा. राजमिस्त्री रवींद्र मल्लिक ने गिरफ्तारी से बचने के लिए खुद यह गुप्त कमरा बनाया था, लेकिन आखिरकार पुलिस ने उसे पकड़ लिया.

भारत में तो गजब ही हो गया, घर में ही बना दिया सुरंग और 32 साल तक इराकी राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन की तरह छुपा रहा!
Image Source: Representative Photo By AI
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ओडिशा से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने लोगों को हैरान कर दिया है. एक हत्या का आरोपी करीब 32 साल तक पुलिस की आंखों में धूल झोंकता रहा और जमीन के नीचे बने सीक्रेट तहखाने में छिपकर जिंदगी बिताता रहा. यह मामला किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं लगता, क्योंकि आरोपी ने खुद को बचाने के लिए अपने घर के नीचे ऐसा गुप्त कमरा बना रखा था, जहां तक पहुंच पाना आसान नहीं था. लेकिन आखिरकार पुलिस ने उसे पकड़ ही लिया.

1994 की हत्या के बाद हो गया था फरार

यह मामला ओडिशा के जाजपुर जिले के नुहाट गांव का है. यहां रहने वाले 58 वर्षीय रवींद्र मल्लिक पर अपने ही चचेरे भाई की हत्या का आरोप है. पुलिस के मुताबिक उसने 21 अक्टूबर 1994 को परमानंद मल्लिक नाम के युवक की कुल्हाड़ी से हमला कर हत्या कर दी थी. घटना के बाद जब पुलिस उसकी तलाश में जुटी, तब वह अचानक गायब हो गया. अदालत ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया, लेकिन वह इतने सालों तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहा.

खुद बनाया जमीन के नीचे सीक्रेट तहखाना

बताया जा रहा है कि रवींद्र मल्लिक पेशे से राजमिस्त्री था और उसने अपनी इसी कला का इस्तेमाल खुद को छिपाने में किया. उसने अपने घर के नीचे एक गुप्त भूमिगत तहखाना तैयार किया. यह तहखाना बाहर से बिल्कुल सामान्य दिखाई देता था, लेकिन अंदर एक ऐसा कमरा बना था, जहां वह जरूरत पड़ने पर छिप जाता था. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उसने यह गुप्त कमरा 1994 में ही बनवा लिया था ताकि गिरफ्तारी से बच सके.

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फर्जी पहचान बनाकर कई राज्यों में घूमता रहा

इतने वर्षों तक फरार रहने के दौरान रवींद्र ने अपनी पहचान भी बदल ली. उसने फर्जी नाम से आधार कार्ड और वोटर आईडी तक बनवा लिए. इतना ही नहीं, वह खुद को तटीय ओडिशा के आदमपुर गांव का निवासी बताता था. पुलिस जांच में सामने आया कि वह अलग-अलग राज्यों में मजदूरी करता रहा और लगातार अपनी लोकेशन बदलता रहा ताकि किसी को उस पर शक न हो. आरोपी ने हैदराबाद, केरल और कई अन्य राज्यों में राजमिस्त्री के तौर पर काम किया. इस दौरान वह अपने परिवार के संपर्क में भी बना रहा. पुलिस को लंबे समय तक उसकी कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पाई. लेकिन हाल ही में पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि रवींद्र किसी पारिवारिक समारोह में शामिल होने के लिए चुपके से अपने गांव लौटा है.

गुप्त दरवाजे से खुला तहखाने का राज

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इसके बाद कुआखिया पुलिस स्टेशन की टीम ने शुक्रवार रात उसके घर पर छापा मारा. शुरुआत में पुलिस को कुछ भी संदिग्ध नहीं दिखा, लेकिन तलाशी के दौरान घर के अंदर बने एक गुप्त दरवाजे का पता चला. जब उस जगह को खोला गया तो अंदर भूमिगत कमरा दिखाई दिया, जहां रवींद्र छिपा हुआ था. पुलिस ने तुरंत उसे बाहर निकाला और गिरफ्तार कर लिया. कुआखिया पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर-इन-चार्ज सुशांत कुमार सेठी ने बताया कि आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए बेहद चालाकी से यह तहखाना तैयार किया था. पुलिस का मानना है कि यह बंकर कई वर्षों तक उसका सुरक्षित ठिकाना बना रहा.

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बताते चलें कि हैरानी की बात यह भी है कि फरार रहने के दौरान उसने 1998 में मंजुलता नाम की महिला से शादी भी कर ली थी. लगातार पहचान और जगह बदलते रहने के कारण वह इतने सालों तक पुलिस से बचता रहा. लेकिन आखिरकार 32 साल बाद उसका यह सीक्रेट ठिकाना खुल गया और एक लंबे समय से फरार आरोपी कानून के शिकंजे में आ गया.

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