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‘हमारे यहां भी कुछ बेवकूफ लोग…’, भारत के समर्थन में अमेरिका को ये क्या बोल गए ट्रंप के करीबी मार्को रूबियो

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने भारतीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से भी मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने अमेरिकी लोगों पर बड़ी टिप्पणी की.

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24 May 2026
( Updated: 24 May 2026
06:35 PM )
‘हमारे यहां भी कुछ बेवकूफ लोग…’, भारत के समर्थन में अमेरिका को ये क्या बोल गए ट्रंप के करीबी मार्को रूबियो
Source- IANS
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Marco Rubio in India: अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो 4 दिवसीय भारत यात्रा पर हैं. विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में रुबियो ने भारतीयों के खिलाफ की जाने वाली नस्लीय टिप्पणियों को बेवकूफ लोगों की हरकत बताया. उन्होंने कहा कि वे ऐसी टिप्पणियों को बेहद गंभीरता से लेते हैं. दुनिया के हर देश में कुछ बेवकूफ लोग होते हैं, अमेरिका में भी हैं. 

अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ नस्लीय टिप्पणियों पर पूछे गए सवाल के जवाब में रुबियो ने कहा, ‘मैं इस पर क्या कहूं, यह समझ नहीं पा रहा हूं, लेकिन मैं ऐसी टिप्पणियों को बेहद गंभीरता से लेता हूं. उन्होंने कहा, 

‘दुनिया के हर देश में कुछ बेवकूफ लोग होते हैं. यहां भी ऐसे लोग हैं और अमेरिका में भी कुछ लोग लगातार मूर्खतापूर्ण टिप्पणियां करते रहते हैं.’ 

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मार्को रूबियो ने नस्लवादी टिप्पणियों को ‘बेवकूफी भरी’ बातें कहकर खारिज कर दिया. रूबियो ने कहा कि अमेरिका लोगों का स्वागत करने वाला देश है. दुनियाभर से आए लोगों ने यहां आकर खुद को अमेरिकी समाज में ढाला है और देश की प्रगति में बड़ा योगदान दिया है. 

मार्को रूबियो ने की भारतीयों की तारीफ

उन्होंने अमेरिका में भारतीय समुदाय के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय कंपनियों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 20 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश किया है. हम चाहते हैं कि यह निवेश आगे भी बढ़ता रहे. भारतीय पेशेवरों की विशेषज्ञता ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को काफी फायदा पहुंचाया है. 

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वीजा और इमिग्रेशन नीति में बदलावों पर रुबियो ने साफ किया कि अमेरिका की नई नीतियां सिर्फ भारत के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया पर लागू की जा रही हैं. पिछले कुछ साल में 2 करोड़ से ज्यादा लोग अवैध रूप से अमेरिका में दाखिल हुए, जिसके कारण इमिग्रेशन सिस्टम में सुधार जरूरी हो गया है. 

भारत पर कितना होगा इमिग्रेशन पॉलिसी का असर? 

जे1, एफ1 और एच1बी वीजा नियमों में हालिया बदलावों पर उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने इमिग्रेशन सिस्टम को 21वीं सदी के हिसाब से आधुनिक बना रहा है. इस प्रक्रिया में कुछ समय तक परेशानियां और चुनौतियां आ सकती हैं, लेकिन अंततः नया सिस्टम पहले से ज्यादा प्रभावी और बेहतर होगा. 

रुबियो ने कहा, ‘हर साल करीब 10 लाख लोग अमेरिका के स्थायी निवासी बनते हैं और देश के विकास में योगदान देते हैं.  इमिग्रेशन ने अमेरिका को समृद्ध बनाया है, लेकिन बदलते समय के साथ सिस्टम में सुधार करना भी जरूरी है.’

उन्होंने यह भी कहा कि नए बदलावों का असर भारत जैसे देशों पर ज्यादा दिख सकता है, क्योंकि भारत बड़ी संख्या में उच्च कौशल वाले पेशेवर अमेरिका भेजता है, हालांकि उन्होंने दोहराया कि यह नीति किसी एक देश को निशाना बनाकर नहीं बनाई गई है. 

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रुबियो ने कहा कि अमेरिका इस समय अपने इमिग्रेशन सिस्टम में बड़े सुधार की प्रक्रिया से गुजर रहा है. उन्होंने माना कि इस बदलाव के दौरान कुछ परेशानियां और चुनौतियां सामने आ सकती हैं, लेकिन प्रक्रिया पूरी होने के बाद नया सिस्टम पहले से ज्यादा प्रभावी और बेहतर होगा. 

मार्तो रूबियो ने कहा, ‘अमेरिका इस समय उस व्यवस्था में सुधार कर रहा है जिसके जरिए तय किया जाता है कि कितने लोग देश में आएंगे, कौन आएगा और कब आएगा. किसी भी सिस्टम में सुधार या बदलाव के दौरान एक संक्रमण काल आता है, जिसमें कुछ दिक्कतें और चुनौतियां होना स्वाभाविक है. हम अपने इमिग्रेशन सिस्टम को 21वीं सदी के हिसाब से आधुनिक बना रहे हैं, ताकि यह सिर्फ अमेरिका के लिए ही नहीं बल्कि यहां आने वाले लोगों के लिए भी बेहतर साबित हो.’

रुबियो ने आगे कहा कि जब यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी, तब अमेरिका के पास पहले से ज्यादा कुशल और टिकाऊ इमिग्रेशन सिस्टम होगा. उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि नया सिस्टम भारत से अमेरिका आने वाले कामगारों और इनोवेटर्स के लिए भी पहले से ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है. हालांकि बदलाव के इस दौर में कुछ कठिनाइयां जरूर आएंगी. 

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मैं साफ करना चाहता हूं कि यह बदलाव भारत को निशाना बनाकर नहीं किए जा रहे हैं. यह पूरी दुनिया पर लागू हो रहे हैं. भारत जैसे देशों पर इसका असर ज्यादा दिख सकता है, क्योंकि वहां से बड़ी संख्या में हाई-स्किल्ड प्रोफेशनल्स अमेरिका आते हैं, लेकिन अंततः हमारा लक्ष्य एक बेहतर, अधिक प्रभावी और टिकाऊ सिस्टम तैयार करना है.’

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