पानी के लिए तड़पता रह जाएगा पाकिस्तान... सिंधु पर सख्ती के बाद भारत का अगला मिशन, कश्मीर में 'सलाल डैम प्रोजेक्ट' पर काम शुरू
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ अपनी रणनीति और सख्त कर दी है. सिंधु जल संधि को लेकर लिए गए फैसले के बाद पाकिस्तान में पानी का संकट गहराने लगा है. वहीं भारत अब जल प्रबंधन और हाइड्रोपावर परियोजनाओं को तेजी से मजबूत करने में जुटा हुआ है.
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पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की मोदी सरकार ने पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए ऑपरेशन सिंदूर से पहले कई बड़े और कड़े फैसले लिए थे. इनमें सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर लिया गया फैसला सबसे अहम रहा. भारत के इस कदम के बाद पाकिस्तान के कई इलाकों में पानी का संकट गहराने चुका है. यही वजह है कि इस फैसले से पाकिस्तान की चिंता बढ़ गई है. इस बीच भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ अपनी रणनीति को और सख्त कर दिया है.
दरअसल, भारत एक ओर वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान को आतंकवाद के मुद्दे पर घेरने में जुटा हुआ है, तो वहीं दूसरी ओर देश अपने जल संसाधनों और हाइड्रोपावर क्षमता को मजबूत करने की दिशा में भी तेजी से काम कर रहा है. भारत ने साफ संकेत दिए हैं कि सीमा पार आतंकवाद और जल सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर अब उसकी नीति पहले से कहीं ज्यादा सख्त और आक्रामक रहने वाली है. सरकारी सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार बीते करीब एक साल से पश्चिमी नदियों पर जल प्रबंधन व्यवस्था और हाइड्रोपावर परियोजनाओं को मजबूत करने की दिशा में लगातार काम कर रही है. इसके तहत अल्पकालिक, मध्यम अवधि और दीर्घकालिक योजनाएं तैयार की जा रही हैं. इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य भारत को मिलने वाले पानी का बेहतर और अधिकतम उपयोग करना, साथ ही आने वाले समय की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जल भंडारण क्षमता को बढ़ाना है.
सलाल डैम पर शुरू हुआ काम
इसी योजना के तहत सलाल डैम में जमा गाद को हटाने के लिए बड़े स्तर पर डी-सिल्टिंग अभियान शुरू किया गया है. अधिकारियों के मुताबिक, एनएचपीसी ने ड्रेजिंग का काम शुरू कर दिया है और इस वर्ष से व्यापक स्तर पर सिल्ट फ्लशिंग प्रक्रिया भी चलाई जाएगी. बताया जा रहा है कि यह अभियान अगले तीन से चार साल तक जारी रह सकता है. सूत्रों के अनुसार, हर साल लगभग 40 से 50 मिलियन क्यूबिक मीटर गाद निकालने का लक्ष्य तय किया गया है. इससे जलाशय की भंडारण क्षमता बढ़ेगी, पानी के बेहतर प्रबंधन में मदद मिलेगी और बिजली उत्पादन भी अधिक प्रभावी हो सकेगा.
हाइड्रोपावर क्षमता का होगा विस्तार
भारत पश्चिमी नदियों पर अपनी हाइड्रोपावर क्षमता को लगातार विस्तार देने में जुटा हुआ है. फिलहाल एनएचपीसी इन नदियों पर 2,219 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता का संचालन कर रही है, जबकि 3,514 मेगावाट क्षमता वाली कई परियोजनाएं अलग-अलग चरणों में निर्माणाधीन हैं. अधिकारियों के मुताबिक, इन परियोजनाओं का फायदा केवल ऊर्जा उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय लोगों को भी इससे बड़े स्तर पर लाभ मिल रहा है. जिन राज्यों में ये हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट स्थापित किए जाते हैं, उन्हें कुल उत्पादन का 12 प्रतिशत हिस्सा मुफ्त बिजली के रूप में दिया जाता है. साथ ही प्रत्येक बड़ी परियोजना से लगभग लगभग 6000 रोज़गार के अवसर निकलते हैं. इस परियोजना के निर्माण में ज़्यादातर स्थानीय कर्मचारी को लिया गया है.
पूरा हुआ दो सुरंगो का सर्वे
जम्मू-कश्मीर में तैयार हो रही स्वच्छ और हरित ऊर्जा अब केवल स्थानीय जरूरतों तक सीमित नहीं रह गई है. यहां उत्पादित बिजली उत्तर भारत सहित देश के कई राज्यों तक पहुंचाई जा रही है, जिससे राष्ट्रीय पावर ग्रिड को भी मजबूती मिल रही है. सूत्रों के अनुसार, व्यापक जल प्रबंधन योजना के तहत प्रस्तावित दो सुरंग परियोजनाओं का सर्वेक्षण कार्य पूरा कर लिया गया है. फिलहाल इन परियोजनाओं की व्यवहार्यता रिपोर्ट का अध्ययन किया जा रहा है, जिसके आधार पर आगे की रणनीति तय होगी. माना जा रहा है कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत अब आतंकवाद के खिलाफ केवल सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर ही नहीं, बल्कि जल और ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर भी लंबी रणनीतिक बढ़त हासिल करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है.
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बताते चलें कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत अब पाकिस्तान के खिलाफ केवल सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहता. जल, ऊर्जा और रणनीतिक संसाधनों के मोर्चे पर भी भारत अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटा है. आने वाले समय में यह नीति पाकिस्तान के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है.
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