CJI सूर्यकांत को वकील की किस बात पर आया गुस्सा! सीधे CBI से कर दी एक्शन की मांग
CJI SuryaKant: CJI ने साफ कहा कि ऐसे मामलों की जांच होनी चाहिए और जरूरत पड़े तो CBI को भी कार्रवाई करनी चाहिए. उनकी यह टिप्पणी अदालत में दाखिल एक अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान आई, जिसने पूरे कानूनी जगत में चर्चा छेड़ दी.
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CJI SuryaKant: सुप्रीम कोर्ट में हाल ही में हुई सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश Surya Kant ने वकालत पेशे को लेकर बेहद सख्त टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि देश में ऐसे कई लोग हैं जो काला कोट पहनकर वकील तो बन गए हैं, लेकिन उनकी डिग्रियों पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं. CJI ने साफ कहा कि ऐसे मामलों की जांच होनी चाहिए और जरूरत पड़े तो CBI को भी कार्रवाई करनी चाहिए. उनकी यह टिप्पणी अदालत में दाखिल एक अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान आई, जिसने पूरे कानूनी जगत में चर्चा छेड़ दी.
आखिर मामला क्या था?
दरअसल, एक वकील ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. इस याचिका में आरोप लगाया गया कि दिल्ली हाई कोर्ट ने सीनियर एडवोकेट बनाने से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के पुराने निर्देशों को सही तरीके से लागू नहीं किया.वकील का कहना था कि वह तीसरी बार इस मुद्दे को उठा रहे हैं, लेकिन अब तक नियमों का पालन नहीं हुआ.
जब यह मामला कोर्ट में आया, तो मुख्य न्यायाधीश इस बात से काफी नाराज दिखाई दिए. सुनवाई के दौरान उन्होंने याचिकाकर्ता वकील के व्यवहार और उसकी दलीलों पर भी सवाल उठाए.
“हर कोई सीनियर बनने लायक नहीं”
सुनवाई के दौरान CJI ने बेहद तीखे शब्दों में कहा कि सिर्फ वकील होना या काला कोट पहन लेना ही काफी नहीं होता. उन्होंने कहा कि “पूरी दुनिया सीनियर एडवोकेट बनने की पात्र हो सकती है, लेकिन कम से कम आप नहीं.”
कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर किसी व्यक्ति का व्यवहार और पेशे के प्रति रवैया सही नहीं है, तो उसे सीनियर एडवोकेट जैसी जिम्मेदार और सम्मानजनक उपाधि नहीं मिलनी चाहिए. इस दौरान जस्टिस Joymalya Bagchi ने भी सवाल उठाया कि क्या “सीनियर एडवोकेट” का टैग सिर्फ दिखावे के लिए है या फिर न्याय व्यवस्था में जिम्मेदारी निभाने के लिए?
CBI जांच की भी कही बात
सुनवाई के दौरान CJI ने यह भी कहा कि वह ऐसे किसी सही मामले का इंतजार कर रहे हैं, जिसमें कई वकीलों की एलएलबी डिग्री की जांच के आदेश दिए जा सकें. उनका कहना था कि देश में हजारों ऐसे लोग घूम रहे हैं जिनकी डिग्रियों पर शक है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि CBI को ऐसे मामलों में दखल देना चाहिए ताकि न्याय व्यवस्था की साख बनी रहे और फर्जी लोगों पर कार्रवाई हो सके.
सोशल मीडिया की भाषा पर भी जताई नाराजगी
मुख्य न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता वकील के सोशल मीडिया व्यवहार पर भी नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि लोगों को यह देखना चाहिए कि कुछ लोग फेसबुक और सोशल मीडिया पर कैसी भाषा का इस्तेमाल करते हैं. कोर्ट ने कहा कि वकालत सिर्फ कानून जानने का पेशा नहीं, बल्कि अनुशासन और गरिमा बनाए रखने की भी जिम्मेदारी है.
आखिर में वकील ने मांगी माफी
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सख्त टिप्पणियों के बाद याचिकाकर्ता वकील ने अदालत से माफी मांग ली. इसके बाद कोर्ट ने अपने कुछ कड़े आदेश वापस ले लिए. वकील ने कहा कि वह अपने पेशे को गंभीरता से लेते हैं और उनका उद्देश्य केवल न्याय की मांग करना था.
हालांकि, कोर्ट ने साफ कर दिया कि न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखना हर वकील की जिम्मेदारी है और जो लोग इस व्यवस्था का गलत फायदा उठाने की कोशिश करेंगे, उनके खिलाफ सख्त रवैया अपनाया जाएगा.
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