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राफेल छोड़ो, भारत ने उतारा नया योद्धा 'काल भैरव', 3000 किमी तक मचा देगा तबाही, 30 घंटे की नॉन-स्टॉप उड़ान से दुश्मनों के उड़ा देगा परखच्चे, नहीं कोई काट!

Kaal Bhairav: भारत की AI Warfare Company FWDA ने पुर्तगाल की एडवांस सिमुलेशन टेक्नोलॉजी कंपनी SKETCHPIXEL के साथ मिलकर एक बेहद आधुनिक AI एयरक्राफ्ट (AI AirCraft) 'काल भैरव' बनाने की तैयारी शुरू कर दी है.

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15 May 2026
( Updated: 15 May 2026
09:21 AM )
राफेल छोड़ो, भारत ने उतारा नया योद्धा 'काल भैरव', 3000 किमी तक मचा देगा तबाही, 30 घंटे की नॉन-स्टॉप उड़ान से दुश्मनों के उड़ा देगा परखच्चे, नहीं कोई काट!
Image Source: Canva
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Kaal Bhairav: भारत अब रक्षा तकनीक के उस दौर में प्रवेश कर रहा है, जहां केवल ताकतवर हथियार ही नहीं बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से लैस स्मार्ट सिस्टम भविष्य की लड़ाइयों का फैसला करेंगे. इसी दिशा में भारत की AI Warfare Company FWDA ने पुर्तगाल की एडवांस सिमुलेशन टेक्नोलॉजी कंपनी SKETCHPIXEL के साथ मिलकर एक बेहद आधुनिक AI एयरक्राफ्ट (AI AirCraft) 'काल भैरव' बनाने की तैयारी शुरू कर दी है. यह सिर्फ एक नया विमान नहीं बल्कि भारत की रक्षा शक्ति को तकनीक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.आइए जानते है काल भैरव की क्या है खासियत....

भारत और पुर्तगाल की साझेदारी क्यों खास है?

इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें दो देशों की विशेषज्ञता को एक साथ जोड़ा गया है. पुर्तगाल की कंपनी SKETCHPIXEL पहले से ही एडवांस एयरक्राफ्ट डिजाइन और फाइटर जेट सिमुलेशन सिस्टम बनाने के लिए जानी जाती है. वहीं भारतीय कंपनी FWDA इस विमान के मुख्य ऑटोनोमस सिस्टम यानी बिना मानव नियंत्रण के निर्णय लेने वाली तकनीक और एयरफ्रेम डिजाइन पर काम करेगी.
इस साझेदारी से साफ दिखाई देता है कि आने वाले समय में युद्ध केवल सैनिकों और हथियारों से नहीं बल्कि डेटा, एआई और स्मार्ट मशीनों से लड़े जाएंगे. भारत अब केवल विदेशी तकनीक खरीदने वाला देश नहीं रहना चाहता, बल्कि वह खुद भविष्य की रक्षा तकनीक विकसित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.

बदलते युद्ध का नया चेहरा

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आज की दुनिया में युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है. पहले जहां लड़ाई टैंकों, लड़ाकू विमानों और मिसाइलों तक सीमित थी, वहीं अब ड्रोन, साइबर सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और एआई आधारित हथियार सबसे अहम भूमिका निभा रहे हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध ने पूरी दुनिया को दिखा दिया कि छोटे ड्रोन भी बड़े सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसी तरह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव में भी ड्रोन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल दुनिया ने देखा.
भारत भी अब इस बदलती रणनीति को समझ चुका है. यही वजह है कि एयरफोर्स और नेवी दोनों एआई आधारित युद्ध प्रणाली को प्राथमिकता दे रहे हैं. रक्षा मंत्रालय द्वारा 87 मीडियम एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस यानी MALE ड्रोन खरीदने पर विचार किया जाना भी इसी दिशा का संकेत है.

‘काल भैरव’ की ताकत और क्षमता

“काल भैरव” को केवल एक ड्रोन या एयरक्राफ्ट कहना शायद इसकी क्षमता को कम आंकना होगा. यह एक ऐसा स्मार्ट युद्धक प्लेटफॉर्म होगा जो लंबी दूरी तक उड़ान भरने के साथ-साथ खुद निर्णय लेने की क्षमता भी रखेगा. इस विमान की सबसे प्रभावशाली बात इसकी लगभग 3000 किलोमीटर की रेंज है. यानी यह बेहद दूर तक जाकर मिशन पूरा कर सकता है. इसके अलावा यह लगातार करीब 30 घंटे तक हवा में रह सकता है, जो किसी भी निगरानी या युद्ध मिशन के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है...

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इसमें लगा एआई सिस्टम अपने लक्ष्य की पहचान करने, दुश्मन की गतिविधियों का विश्लेषण करने और मिशन के दौरान सही निर्णय लेने में मदद करेगा. इतना ही नहीं, इसका कोऑर्डिनेशन सिस्टम भी पूरी तरह एआई आधारित होगा, जिससे यह दूसरे ड्रोन या सैन्य सिस्टम के साथ मिलकर काम कर सकेगा.

तकनीकी खूबियां जो इसे खास बनाती है

जानकारी के अनुसार “काल भैरव” की पेलोड क्षमता लगभग 91 किलोग्राम होगी.. इसका मतलब है कि यह हथियार, निगरानी उपकरण या अन्य सैन्य सिस्टम अपने साथ ले जा सकेगा। यह विमान करीब 15 हजार फीट की ऊंचाई पर लंबे समय तक उड़ान भर सकता है..
सामान्य निगरानी मिशन में यह लगभग 25 घंटे तक लगातार उड़ सकता है, जबकि युद्ध जैसी कठिन परिस्थितियों में भी करीब 11 घंटे तक सक्रिय रह सकता है। इसकी क्रूज स्पीड लगभग 42 मीटर प्रति सेकंड बताई जा रही है, जो इसे तेज और प्रभावी बनाती है..

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भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह परियोजना

“काल भैरव” केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं बल्कि भारत की रणनीतिक शक्ति का प्रतीक भी बन सकता है.. दुनिया के कई बड़े देश पहले से ही एआई आधारित हथियार और स्वायत्त ड्रोन विकसित कर रहे हैं.. ऐसे में भारत का इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ना बेहद जरूरी था..
यह परियोजना आने वाले वर्षों में भारतीय सेना को अधिक स्मार्ट, तेज और कम जोखिम वाली युद्ध क्षमता दे सकती है...सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इससे भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में और मजबूत होगा.

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