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अमेरिका-ईरान संघर्ष- वार्ता के लिए अमेरिकी उपराष्ट्रपति पाकिस्तान के लिए रवाना हुए, ईरान को दी कड़ी चेतावनी

America-Iran Dialogues: उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान के साथ वार्ता के लिए पाकिस्तान रवाना होते समय स्पष्ट किया कि अमेरिका ईमानदारी का स्वागत करेगा, लेकिन धोखे का नहीं.

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अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शुक्रवार को ईरान के साथ सीजफायर वार्ता के लिए पाकिस्तान रवाना हो गए. रवाना होने से पहले उन्होंने कहा कि अगर ईरान ईमानदारी से बातचीत करता है, तो अमेरिका “खुले दिल से” आगे बढ़ने को तैयार है, लेकिन किसी भी तरह के धोखे को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

जेडी वेंस पाकिस्तान की यात्रा के लिए रवाना हुए

जॉइंट बेस एंड्रयूज से इस्लामाबाद के लिए रवाना होने से पहले वेंस ने कहा, “हम बातचीत को लेकर आशान्वित हैं. मुझे लगता है कि यह सकारात्मक रहेगी”. उन्होंने कहा कि अमेरिका का रुख इस बात पर निर्भर करेगा कि ईरान कितनी रचनात्मकता के साथ वार्ता में शामिल होता है. उन्होंने अपने बयान को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देशों के अनुरूप बताया.

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धोखा देने पर सख्त रूख अपनाएगा ट्रंप प्रशासन

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वेंस ने कहा, “जैसा कि राष्ट्रपति ने कहा है, अगर ईरान ईमानदारी से बातचीत के लिए तैयार है, तो हम भी सकारात्मक पहल के लिए तैयार हैं. लेकिन अगर वे हमें ‘खेलने’ की कोशिश करेंगे, तो हमारी वार्ता टीम उतनी सहज नहीं होगी”. उन्होंने बताया कि प्रशासन एक स्पष्ट रणनीति के साथ बातचीत में शामिल हो रहा है और सकारात्मक परिणाम की उम्मीद कर रहा है.

पाकिस्तान दौरे का विस्तृत कार्यक्रम अब तक गुप्त

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हालांकि, पाकिस्तान दौरे का विस्तृत कार्यक्रम अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, जिससे यात्रा के कई पहलू स्पष्ट नहीं हैं. यह वार्ता ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते का युद्धविराम लागू है. वेंस के बयान से स्पष्ट है कि अमेरिका एक साथ संवाद और दबाव-दोनों रणनीतियों पर काम कर रहा है.

खाड़ी में शांति और तेल आपूर्ति पर भारत की नजर

भारत भी इस घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है, क्योंकि खाड़ी क्षेत्र की स्थिरता और ऊर्जा आपूर्ति पर इसका सीधा असर पड़ सकता है. अमेरिका-ईरान वार्ता में किसी भी तरह की प्रगति या विफलता का असर तेल की कीमतों और क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों पर पड़ सकता है.

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रणनीतिक मतभेदों को सुलझाने की नई कोशिश

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बता दें कि अमेरिका और ईरान के बीच पहले भी कई बार बातचीत की कोशिशें हुई हैं, लेकिन आपसी अविश्वास और रणनीतिक मतभेदों के कारण ठोस नतीजे नहीं निकल पाए हैं. मौजूदा वार्ता को भी इसी दिशा में एक अहम परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है.

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