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UAE को छोड़ कुवैत पर क्यों टूट पड़ा ईरान? 72 घंटे में 2 हमले, मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव

अमेरिका-ईरान सीजफायर के बावजूद पिछले 72 घंटों में ईरान ने कुवैत पर दो बड़े हमले किए हैं. कुवैत का दावा है कि हमले ड्रोन और मिसाइलों से हुए, जबकि ईरान का कहना है कि उसका निशाना कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने हैं.

UAE को छोड़ कुवैत पर क्यों टूट पड़ा ईरान? 72 घंटे में 2 हमले, मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव
Image Source: Representative Photo Via IANS
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अमेरिका और ईरान के बीच भले ही सीजफायर लागू होने की खबरें सामने आ रही हों, लेकिन जमीनी हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं. दोनों देशों के सख्त रुख ने पूरे मिडिल ईस्ट की चिंता बढ़ा दी है. हालात ऐसे हैं कि क्षेत्र के कई देश संभावित ऊर्जा संकट और सुरक्षा चुनौतियों को लेकर सतर्क हो गए हैं. इसी बीच ईरान ने एक बार फिर अपने कदमों से दुनिया का ध्यान खींचा है.

72 घंटे में कुवैत पर दो बड़े हमले

पिछले 72 घंटों में कुवैत पर हुए दो बड़े हमलों ने खाड़ी क्षेत्र की बेचैनी बढ़ा दी है. कुवैती सेना का दावा है कि ईरान ड्रोन और मिसाइलों के जरिए उसके ठिकानों को निशाना बना रहा है. वहीं ईरान का कहना है कि उसका उद्देश्य कुवैत नहीं, बल्कि वहां मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने हैं. तेहरान का आरोप है कि अमेरिका की गतिविधियों का जवाब देना उसकी रणनीति का हिस्सा है.

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कुवैत क्यों बना ईरान का निशाना?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि ईरान ने इस बार यूएई की बजाय कुवैत को ही क्यों चुना. इसके पीछे कई अहम कारण बताए जा रहे हैं. पहला कारण भौगोलिक स्थिति है. कुवैत फारस की खाड़ी के किनारे स्थित अमेरिका का करीबी सहयोगी देश है. यहां अमेरिका के कई महत्वपूर्ण सैन्य अड्डे मौजूद हैं. कैंप अरिफिजान, कैंप बुहिरिंग और अल सलेम एयरबेस जैसे ठिकानों पर बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिक तैनात हैं. ऐसे में ईरान के लिए यह स्थान रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.

कूटनीतिक कमजोरी भी एक कारण

दूसरा कारण कूटनीतिक समीकरण हैं. जानकारों का मानना है कि यूएई की तुलना में कुवैत की सैन्य और कूटनीतिक ताकत अपेक्षाकृत कम है. कुछ समय पहले ईरान ने कुवैत के एक द्वीप पर प्रभाव बढ़ाने की कोशिश भी की थी, हालांकि उसे सफलता नहीं मिली थी. इसके बावजूद कुवैत तेहरान की रणनीतिक नजरों में बना हुआ है.

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यूएई पर हमला क्यों नहीं कर रहा ईरान?

तीसरा और सबसे अहम कारण जोखिम से बचना माना जा रहा है. यूएई के पास आधुनिक सैन्य क्षमताएं हैं और वह किसी भी बड़े हमले का जवाब देने में सक्षम है. यदि ईरान सीधे यूएई को निशाना बनाता है तो व्यापक खाड़ी संघर्ष भड़क सकता है. यही वजह है कि बातचीत के दौर में ईरान फिलहाल सीमित जोखिम वाली रणनीति अपनाता दिखाई दे रहा है.

अमेरिका भी लगातार कर रहा कार्रवाई

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दूसरी तरफ अमेरिका भी पीछे हटता नजर नहीं आ रहा. हाल के दिनों में अमेरिकी सेना ने ईरान से जुड़े कई ठिकानों और संसाधनों पर कार्रवाई की है. रिपोर्टों के मुताबिक एक द्वीप स्थित सैन्य ठिकाने को भी निशाना बनाया गया है. खास बात यह है कि ये घटनाएं ऐसे समय में हो रही हैं, जब दोनों देशों के बीच समझौते को लेकर बातचीत जारी है.

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बहरहाल, मिडिल ईस्ट में हालात शांत दिखाई जरूर दे रहे हैं, लेकिन तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. कुवैत पर बढ़ते हमले और अमेरिका-ईरान की जारी खींचतान यह संकेत दे रही है कि क्षेत्र में स्थिरता की राह अभी आसान नहीं है.

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