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हिंदू राष्ट्र की मांग को लेकर नेपाल में उबाल, सड़कों पर उतरे हजारों लोग
Nepal: कई इलाकों में लोग सांसदों से मिलकर यह जानना चाहते हैं कि वे हिंदू समुदाय की सुरक्षा और उनकी मांगों पर क्या रुख रखते हैं. लोगों का कहना है कि उन्होंने बदलाव की उम्मीद के साथ अपने नेताओं को चुना था, इसलिए अब वे चाहते हैं कि उनके प्रतिनिधि इस मुद्दे पर खुलकर अपनी बात रखें और संसद में भी उनकी आवाज उठाएं.
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Nepal: नेपाल में एक बार फिर देश को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग तेज होती दिखाई दे रही है. यह मुद्दा अब सिर्फ संगठनों के प्रदर्शन या रैलियों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि आम लोग भी अपने चुने हुए जनप्रतिनिधियों से सीधे सवाल पूछ रहे हैं. कई इलाकों में लोग सांसदों से मिलकर यह जानना चाहते हैं कि वे हिंदू समुदाय की सुरक्षा और उनकी मांगों पर क्या रुख रखते हैं. लोगों का कहना है कि उन्होंने बदलाव की उम्मीद के साथ अपने नेताओं को चुना था, इसलिए अब वे चाहते हैं कि उनके प्रतिनिधि इस मुद्दे पर खुलकर अपनी बात रखें और संसद में भी उनकी आवाज उठाएं.
सांसद बबलू गुप्ता का हुआ विरोध
सिरहा जिले में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के सांसद बबलू गुप्ता को लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा. बड़ी संख्या मे मौजूद लोगों ने उनसे हिंदू राष्ट्र की मांग पर उनका पक्ष पूछा. प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना था कि उन्होंने अपने जनप्रतिनिधियों पर भरोसा इसलिए किया था क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि देश की पहचान और हिंदू समाज से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से काम होगा. लेकिन अब उन्हें लग रहा है कि उनकी उम्मीदों को नजरअंदाज किया जा रहा है. इसी नाराजगी के चलते लोगों ने सांसद से खुलकर जवाब मांगा.
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हिंसा के बाद संगठनों ने सरकार को सौंपा 15 सूत्री मांगपत्र
26 जुलाई की रात नेपाल के कुछ इलाकों में हुई हिंसा के बाद हालात अब काफी हद तक सामान्य हो चुके हैं. हालांकि, इस घटना ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं. इसके बाद हिंदूवादी संगठनों ने सरकार को 15 सूत्री मांगपत्र सौंपा है. इसमे सबसे प्रमुख मांग नेपाल को फिर से हिंदू राष्ट्र घोषित करने के लिए संसद में प्रस्ताव लाने की है. इसके अलावा संगठनों ने सुनसरी जिले के देवानगंज में हुई हिंसा की निष्पक्ष जांच कराने, दोषियों और कथित साजिशकर्ताओं की जल्द गिरफ्तारी करने तथा जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग की है. उनका कहना है कि पूरी घटना की सच्चाई लोगों के सामने आनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.
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शहीद का दर्जा, मुआवजा और सीमा सुरक्षा की भी उठी मांग
मांगपत्र में सिर्फ हिंदू राष्ट्र की बात ही नहीं की गई है, बल्कि हिसा में जान गंवाने वालों को शहीद का दर्जा देने, उनके परिवारों को उचित मुआवजा देने और घायलों का मुफ्त व बेहतर इलाज कराने की भी मांग शामिल है. इसके साथ ही संगठनों ने नेपाल को बौद्ध और किरात परंपराओं का सम्मान करते हुए 'वैदिक सनातन हिंदू राष्ट्र' के रूप में दोबारा स्थापित करने की मांग रखी है. उन्होंने रोहिंग्या, बांग्लादेशी और पाकिस्तानी घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें देश से बाहर भेजने, सीमा सुरक्षा मजबूत करने और वर्ष 1990 के बाद जारी नेपाली नागरिकताओं की जांच कराने की मांग भी सरकार के सामने रखी है.
सरकार ने फिलहाल हिंदू राष्ट्र की मांग को नहीं दिया समर्थन
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रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री बालेन शाह ने इस मुद्दे पर अपनी राय रखते हुए कहा कि हिंदू राष्ट्र की बहाली का सवाल राजशाही की बहाली से भी जुड़ जाता है. उनका मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में ऐसा कोई फैसला लेना सही नहीं होगा. उन्होंने कहा कि सरकार नेपाल की संघीय व्यवस्था के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इसे मजबूत बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है. उनका कहना है कि अगर देश को दोबारा हिंदू राष्ट्र घोषित किया जाता है, तो इससे वर्तमान संघीय व्यवस्था पर असर पड़ सकता है. इसलिए सरकार इस मामले में सोच-समझकर ही आगे बढ़ेगी.