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ट्रंप का रेसिप्रोकल टैरिफ़ का ऐलान, दुनिया से कहीं पंगा ते नहीं ले गए ट्रंप ?

ट्रंप ने रेसिप्रोकल टैरिफ़ का ऐलान कर दुनिया को एक नई चुनौती दी है…ख़ासकर BRICS देशों पर निशाना साध रहे ट्रंप दुनिया को एक की तराज़ू पर तौलना चाहता है…लेकिन पहले कनाडा, चीन और अब ब्राज़ील के राष्ट्रपति ने ट्रंप को उन्हीं की भाषा में जवाब दिया है

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अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने दुनिया भर में अपने फ़ैसले से टैरिफ़ वॉर का ख़तरा बढ़ा दिया है।ट्रंप ने रेसिप्रोकल टैरिफ़ का ऐलान कर दुनिया को एक नई चुनौती दी है।ख़ासकर BRICS देशों पर निशाना साध रहे ट्रंप दुनिया को एक की तराज़ू पर तौलना चाहता है।लेकिन पहले कनाडा, चीन और अब ब्राज़ील के राष्ट्रपति ने ट्रंप को उन्हीं की भाषा में जवाब दिया है।बीते दिन ट्रंप ने जैसे ही टैरिफ़ लगाने की बात कही ब्राज़ील भड़क उठा ट्रंप के इस फ़ैसले से बेहद नाराज़ ब्राजील के राष्ट्रपति लुइस इनासियो लूला डी सिल्वा ने अमेरिका को सबक़ सिखाने की बात कह दी है।ट्रंप ने स्टील पर 25 फ़ीसदी टैरिफ़ लगाने की बात कही।तो बदले में ब्राजीलियाई राष्ट्रपति डी स‍िल्‍वा ने कहा, 

मैंने सुना है कि वे अब ब्राजीलियाई स्टील पर टैक्‍स लगाने जा रहे हैं. अगर वे ऐसा करते हैं, तो हम वाणिज्यिक रूप से प्रतिक्रिया देंगे, या तो WTO में शिकायत दर्ज करके या उन उत्पादों पर कर लगाएंगे, जो हम इंपोर्ट करते हैं

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अमेरिका में बैठे ट्रंप जहां मैक अमेरिका ग्रेट अगेन के नाम पर अमेरिका का दबदबा उस दौर में क़ायम रखना चाहते हैं जब दुनिया भर के ज़्यादातर देश अमेरिका को सीधे आंख दिखा रहे हैं।एक जैसा टैक्स वसूलने और कई देशों को 100 फ़ीसदी टैक्स लगाने की धमकी देने वाले ट्रंप शायद भूल रहे है कि वो अमेरिका को सीधे चुनौती देने वाले देशों को साधने के चक्कर में कुछ और देशों को अपना दुश्मन बना रहे हैं।दुनिया का सुपर पावर होने का दम भरने वाला अमेरिका चीन को रोकने में अब तक नाकामयाब ही रहा। जहां साउथ चाइना सी में चीन से परेशान और देशों के लिए कुछ ख़ास कर नहीं पाया।चीन जहां अपना प्रभुत्व बढ़ाने के लिए अमेरिका के सामने भी आकर खड़ा हो गया उसका इलाज ढूंढ़ने की बजाए। दुनिया के देशों को परेशानी में अमेरिका ने डाला है।

टैरिफ़ को जानिए 


टैरिफ एक बॉर्डर शुल्क या टैक्स है। विदेश से आने वाले सामानों पर लगाया जाता है। इससे घरेलू मार्केट में विदेशी सामान महंगे हो जाते हैं। टैरिफ से सरकार की इनकम भी बढ़ती है। इसका मकसद घरेलू प्रोडक्शन को बढ़ावा देना और देशी उद्योगों की रक्षा करना है

ट्रंप का कहना है कि वो टैरिफ़ के ज़रिए अमेरिका का व्यापार घाटा कम करना चाहते हैं।अमेरिकी कंपनियों की भलाई और दुनियाभर के देशों से व्यापार असंतुलन को ठीक करने के लिए ट्रंप ये कदम उठा रहे हैं। 2023 की बात करें तो अमेरिका को चीन से 30.2%, मेक्सिको से 19% और कनाडा से 14.5% व्यापार घाटा हुआ

कुल मिलाकर ये तीनों देश 2023 में अमेरिका के 670 अरब डॉलर यानी करीब 40 लाख करोड़ रुपए के व्यापार घाटे के लिए जिम्मेदार हैं। यही वजह है कि ट्रंप ने सबसे पहले इन्हीं देशों पर टैरिफ लगाया। आमतौर पर सभी देश टैरिफ लगाते हैं। किसी देश में इसका रेट कम और किसी में ज्यादा हो सकता है। हालांकि, बाकी देशों से तुलना की जाए तो भारत सबसे ज्यादा टैरिफ लगाने वाले देशों में से एक है। इस बात का ज़िक्र ख़ुद ट्रंप ने भी किया। लेकिन हाल ही में पेश हुए बजट में भारत ने अमेरिका से आने वाले सामान जैसे- 1600 सीसी से कम इंजन की मोटरसाइकिल, सैटेलाइट के लिए ग्राउंड इंस्टॉलेशन और सिंथेटिक फ्लेवरिंग एसेंस जैसे सामानों पर टैक्स घटा दिए हैं।यानी भारत ने साथ चलने की अपनी बात को क़ायम रखा है। अब देखना होगा अमेरिका के इस कदम से दुनिया में और क्या बदलाव आने वाला है।
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