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मिडिल ईस्ट में फिर बढ़ा तनाव! ईरान बोला- होर्मुज में दखल दिया तो हालात होंगे और गंभीर

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान के नियंत्रण को चुनौती देने की किसी भी कोशिश से क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है. उन्होंने सभी पक्षों से मौजूदा समझौतों का पालन करने की अपील की.

Image Source: IANS
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पिछले 24 घंटे में अमेरिकी सेना द्वारा ईरान पर किए गए हमले पर अब अधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को चेतावनी दी कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान के नियंत्रण को चुनौती देने की किसी भी कोशिश से तनाव और बढ़ेगा. यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य पूर्व में जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए शांति वार्ता चल रही है.

बगदाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान क्या बोले अराघची?

बगदाद दौरे के दौरान एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अराघची ने कहा, "ईरान इस्लामिक गणराज्य द्वारा किए जा रहे मौजूदा प्रबंधों से अलग किसी भी नए या अलग समझौते को अपनाने की कोशिश केवल स्थिति को और जटिल बनाएगी, होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने में देरी करेगी और तनाव बढ़ाएगी, जैसा कि हमने पिछली दो रातों में देखा है." ईरान के शीर्ष राजनयिक ने सभी पक्षों से समझौता ज्ञापन (एमओयू) का पालन करने और यह सुनिश्चित करने की अपील की कि यह अपने तय रास्ते से न भटके.

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अगले 30 दिनों तक होर्मुज पर रहेगा ईरान का नियंत्रण

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समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, अराघची ने कहा कि अगले 30 दिनों तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की पूरी निगरानी और प्रबंधन ईरान के नियंत्रण में रहेगा. चेतावनी दी कि किसी अन्य पक्ष की एकतरफा कार्रवाई से जलमार्ग को दोबारा खोलने में देरी हो सकती है. उन्होंने कहा, 'होर्मुज जलडमरूमध्य अगले 30 दिनों तक पूरी तरह ईरान की निगरानी और प्रबंधन में रहेगा. सभी बाधाएं हटने के बाद जलमार्ग की पूरी क्षमता बहाल कर दी जाएगी.'

खाड़ी देशों के लिए नए सुरक्षा ढांचे की वकालत

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ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों पर ईरानी हमलों के बाद खाड़ी देशों के साथ एक नए ‘सुरक्षा ढांचे’ की स्थापना का आह्वान भी किया. अराघची ने कहा, 'हमें एक ऐसे नए ढांचे तक पहुंचना चाहिए जिसमें क्षेत्र के सभी देश शामिल हों और क्षेत्र के बाहर किसी भी देश की मौजूदगी या हस्तक्षेप न हो.'

इराक ने मध्यस्थता की पेशकश की

वहीं, इराक के विदेश मंत्री फुआद हुसैन ने क्षेत्र में तनाव कम करने और स्थिरता बहाल करने के लिए खाड़ी सहयोग परिषद के आठ देशों, ईरान और इराक के बीच मध्यस्थता की पेशकश की. अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच हुए युद्ध तथा होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने के कारण इराक सबसे अधिक प्रभावित देशों में शामिल रहा है. सैन्य अभियान के दौरान इराक एक तरह से संघर्ष का दूसरा मोर्चा बन गया था.

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बहरीन और कुवैत स्थित अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा

दरअसल, आईआरजीसी ने एक बयान में माना कि उसने बहरीन और कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला किया है. दोनों खाड़ी देशों ने बयान जारी कर हमले की निंदा की और इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करार दिया.

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(INPUT-IANS)

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