Advertisement
होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह बंद! ट्रंप ने US नेवी को दिए कंप्लीट ब्लॉकेड के आदेश, ईरान ने भीषण परिणाम की दी चेतावनी!
पाकिस्तान के इस्लामाबाद में इस्लामाबाद टॉक्स के फेल होने के बाद होर्मुज संकट और गहरा गया है. दोनों ओर से जुबानी जंग के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज को पूरी तरह ब्लॉक करने का अपनी नेवी को आदेश दिया है.
Advertisement
पाकिस्तान में ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर और युद्ध रोकने को लेकर वार्ता विफल होने के बाद US ने ईरान पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. इसके बाद ईरानी पोर्ट और होर्मुज से आने-जाने वाले जहाजों पर पूरी नाकेबंदी की जाएगी. बीते दिनों अमेरिका और ईरान के बीच न्यूक्लियर प्रोग्राम समेत अन्य जरूरी मुद्दों पर बात नहीं बनी, जिसकी वजह से तनाव और बढ़ गया है. ऐसे में ईरान पर दबाव बनाने के लिए अमेरिका 13 अप्रैल से ईरानी पोर्ट्स में आने-जाने वाले जहाजों पर पूरी तरह से समुद्री नाकाबंदी लागू करना शुरू करेगा.
13 अप्रैल से होर्मुज में कंप्लीट नाकेबंदी!
US सेंट्रल कमांड (सीईएनटीसीओएम) ने यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश के बाद उठाया है और यह ईरानी पोर्ट्स में आने-जाने वाले सभी समुद्री ट्रैफिक को टारगेट करेगा, जिसमें अरब की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के किनारे के पोर्ट्स भी शामिल हैं. सीईएनटीसीओएम ने कहा, "यह ब्लॉकेड सभी देशों के जहाजों के खिलाफ बिना किसी भेदभाव के लागू किया जाएगा. अमेरिकी सेना होर्मुज स्ट्रेट से गैर-ईरानी पोर्ट्स से आने-जाने वाले जहाजों को नहीं रोकेगी." सीईएनटीसीओएम की एक रिलीज के मुताबिक, यह ब्लॉकेड सोमवार को शाम 7.30 बजे आईएसटी से शुरू होगा.
Advertisement
सेलर्स को दी गई चेतावनी!
Advertisement
कमर्शियल नाविकों को सलाह दी गई है कि वे आधिकारिक नेविगेशन चेतावनियों पर नजर रखें और इस इलाके में काम करते समय अमेरिकी नेवी फोर्स के संपर्क में रहें. इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि दूसरे मोर्चों पर प्रोग्रेस के बावजूद, ईरान के साथ बातचीत उसके न्यूक्लियर लक्ष्यों को लेकर रुक गई है. ट्रंप के इस बयान के कुछ घंटे बाद ही सीईएनटीसीओएम का ये रिलीज सामने आया है.
परमाणु हथियार के मुद्दे पर फेल हो गई वार्ता!
Advertisement
ट्रंप ने कहा, "ज्यादातर बातों पर सहमति हो गई थी, लेकिन एकमात्र बात जो सच में मायने रखती थी, वो थी न्यूक्लियर और उस पर कोई सहमति नहीं बनी. यूएस नेवी होर्मुज स्ट्रेट में आने या जाने की कोशिश करने वाले सभी जहाजों को ब्लॉक करने का प्रक्रिया शुरू करेगी."
उन्होंने ईरान पर स्ट्रेट में नेवल माइंस की धमकियों का फायदा उठाकर वर्ल्ड एक्सटॉर्शन करने का आरोप लगाया. बता दें, होर्मुज स्ट्रेट एक जरूरी ग्लोबल एनर्जी कॉरिडोर है. इसे लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, "जो कोई भी गैर-कानूनी टोल देता है, उसे खुले समुद्र में सुरक्षित रास्ता नहीं मिलेगा. अमेरिकी सेना स्ट्रेट्स में ईरानियों द्वारा बिछाई गई माइंस को भी खत्म करना शुरू कर देगी."
होर्मुज ब्लॉकेड को लेकर ईरान ने जारी की चेतावनी
Advertisement
हालांकि, ईरान ने इसका तीखा विरोध किया, जिससे पता चलता है कि ब्लॉकेड की वजह से लगभग आखिरी बातचीत पटरी से उतर गई. ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि तेहरान ने युद्ध खत्म करने के लिए अच्छी नीयत से काम किया था और ब्लॉकेड का सामना करने से पहले वह एक समझौते से बस कुछ इंच दूर था. उन्होंने कहा, “अच्छी नीयत से अच्छी नीयत पैदा होती है. दुश्मनी से दुश्मनी पैदा होती है.” इस झगड़े पर नजर रखने वाले विश्लेषकों का कहना है कि यह झगड़ा ईरान के होर्मुज स्ट्रेट में नेवल माइंस के आस-पास की अनिश्चितता का इस्तेमाल करके ग्लोबल शिपिंग पर दबाव डालने पर है.
होर्मुज में टोल टैक्स पर भयंकर विवाद
इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर के अनुसार, ईरान द्वारा कुछ प्रमुख समुद्री मार्गों को “खतरनाक क्षेत्र” घोषित करने के बाद जहाजों को अपनी सामान्य और सुरक्षित शिपिंग लेन छोड़नी पड़ी. परिणामस्वरूप उन्हें मजबूरन ईरान के नियंत्रण वाले जलक्षेत्र में प्रवेश करना पड़ा. इसके बाद इन जहाजों पर प्रोटेक्शन फीस भी लगाई गई. समूह ने कहा, “यह प्रोटेक्शन फीस समुद्री कानून के तहत गैर-कानूनी है. स्ट्रेट से सटा कोई भी राज्य इंटरनेशनल कन्वेंशन के तहत आने-जाने पर रोक नहीं लगा सकता या फीस नहीं ले सकता.”
Advertisement
होर्मुज संकट के कारण LPG संकट बढ़ा!
विश्लेषकों ने कहा कि माइंस के खतरे ने तेल की कीमतों और शिपिंग इंश्योरेंस की लागत बढ़ा दी है, भले ही सीधे हमले न हुए हों. यूएस नेवी ने उस स्ट्रैटेजी का मुकाबला करने के लिए ऑपरेशन शुरू कर दिए हैं.
यूएसएस फ्रैंक ई. पीटरसन और यूएसएस माइकल मर्फी जैसे डिस्ट्रॉयर ने सेफ पैसेज दिखाने और माइन-क्लियरिंग की कोशिशें शुरू करने के लिए स्ट्रेट को पार किया है. सीईएनटीसीओएम कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा कि सुरक्षित मार्ग को जितनी जल्दी हो सके सिविलियन शिपिंग के साथ शेयर किया जाएगा.
Advertisement
होर्मुज स्ट्रेट पर IRGC की अमेरिका को कड़ी चेतावनी
अमेरिका और इजरायल के साथ तनाव के बीच ईरान की नौसेना ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर कड़ी चेतावनी दी है. ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की नौसेना ने कहा कि होर्मुज में 'दुश्मन' की कोई भी गलत हरकत जानलेवा साबित होगी. नौसेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में यह चेतावनी जारी की. इसके साथ ही, होर्मुज स्ट्रेट में वास्तविक स्थिति का ड्रोन निगरानी फुटेज भी शेयर किया गया.
आईआरजीसी की नौसेना ने कहा कि होर्मुज में होने वाली सभी हलचलें और ठहराव ईरानी सशस्त्र बलों के पूर्ण नियंत्रण में हैं. उसने यह भी कहा कि कोई भी गलत कदम दुश्मन को होर्मुज स्ट्रेट के जानलेवा भंवरों में फंसा देगा.
Advertisement
अमेरिका ने होर्मुज में माइंस क्लियर करना शुरू किया
आईआरजीसी की नौसेना की यह चेतावनी उस समय आई है, जब अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दो दिन पहले कहा कि दो अमेरिकी युद्धपोत होर्मुज स्ट्रेट से गुजरे और खाड़ी में बारूदी सुरंगें हटाने का अभियान शुरू किया. हालांकि, ईरान के मुख्य सैन्य कमान खातम अल-अनबिया केंद्रीय मुख्यालय ने अमेरिकी सेंट्रल कमांड के इस दावे को खारिज किया.
शिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, रविवार को ईरान के सरकारी प्रेस टीवी ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट से दो विध्वंसक जहाजों को गुजारने का अमेरिकी सेना का प्रयास एक असफल प्रचार स्टंट साबित था, जिसे तेहरान-वाशिंगटन वार्ता के साथ जोड़कर समयबद्ध किया गया था.
Advertisement
Iran ने चेतावनी जारी की
प्रेस टीवी ने अमेरिकी विध्वंसक जहाजों की पहचान यूएसएस माइकल मर्फी और यूएसएस फ्रैंक ई. पीटरसन के रूप में की. इसके साथ ही, बयान में कहा गया कि उन्हें ईरानी नौसेना की ओर से पीछे हटने के लिए मजबूर किया गया.
इसके अलावा रविवार को, आईआरजीसी ने एक बयान में कहा कि कोई भी सैन्य जहाज जो किसी भी नाम या बहाने से होर्मुज स्ट्रेट के करीब आने की कोशिश करेगा, उसे संघर्ष विराम का उल्लंघन माना जाएगा और उसके साथ सख्ती से निपटा जाएगा.
Advertisement
यह भी पढ़ें
यह पूरा घटनाक्रम ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता विफल के बाद देखने को मिला है. लगभग महीनेभर के भीषण संघर्ष के बाद ईरान और अमेरिका ने दो हफ्ते के सीजफायर का ऐलान किया है. हालांकि, इस समझौते के तहत रखी गई शर्तों पर दोनों मुल्कों में सहमति नहीं बन सकी है.