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ट्रंप के धुर विरोधी, मोदी के जिगरी दोस्त...लूला डा सिल्वा ने जीता चुनाव, चौथी बार बनेंगे ब्राजील के राष्ट्रपति
ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में बड़ा उलटफेर हो गया है. पहले दौर में फ्लेवियो बोल्सोनारो से पिछड़ने के बाद लूला डा सिल्वा ने दूसरा दौर जीत लिया है. वो चौथी बार 5 जनवरी 2027 को राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे, उन्हें ट्रंप का विरोधी, उनका पीएम मोदी का दोस्त माना जाता है.
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ब्राजील के सुपीरियर इलेक्टोरल कोर्ट की ओर से जारी किए गए नतीजों के अनुसार, सत्ताधारी वर्कर्स पार्टी के उम्मीदवार और ब्राजील के मौजूदा राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा ने रविवार को हुए राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे दौर (रनऑफ) में जीत हासिल की है।
लूला ने जीता ब्राजील के राष्ट्रपति का चुनाव
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 99.89 प्रतिशत वोटों की गिनती पूरी होने पर, लूला को कुल वैध वोटों का 51.78 प्रतिशत हिस्सा मिला। वहीं, लिबरल पार्टी से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार और ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे, फ्लेवियो बोल्सोनारो को 48.23 प्रतिशत वोट मिले। पहले दौर में लूला पिछड़ गए थे, लेकिन इसके बाद उन्होंने शानदार वापसी की।
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पहले दौर में फ्लेवियो बोल्सोनारो से पिछड़ गए थे लूला
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लूला 5 जनवरी 2027 को चार साल के कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे। यह चौथी बार होगा जब वे ब्राजील के राष्ट्रपति बनेंगे। वे पहले दौर में पीछे रह गए थे। उनकी इस जीत ने लैटिन अमेरिका में उस दक्षिणपंथी झुकाव को रोक दिया है, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन हासिल था। लूला 2027 से 2030 तक शासन करेंगे। उनके सामने एक ऐसी कांग्रेस (संसद) होगी, जिसमें बोल्सोनारो की लिबरल पार्टी के पास दशकों में सबसे ज्यादा सीटें हैं।
लूला की जीत के बाद ट्रंप की टेंशन बढ़ी!
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लूला की जीत के बाद ट्रंप की टेंशन भी बढ़ गई है. लैटिन अमेरिकी देशों में एक ओर जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरह नीति अपनाने वाले नेता, समर्थक और दक्षिणपंथी विचारधारा वाले नेता चुनाव जीत रहे हैं, तो वहीं लूला ने बाजी ही पलट दी. पहले दौर में वो राइटविंगर बोल्सनारो से पिछड़ गए थे, लेकिन दूसरे दौर में जीत दर्ज कर ट्रंप के मंसूबों पर पानी ही फेर दिया है. ट्रंप खुद ही मिडटर्म चुनाव में जा रहे हैं. और ब्राजील में लूला का जीतना, ट्रंप की टैरिफ नीतियों की खुलकर विरोध, चुनौती देना उनके लिए मुश्किल ही बढ़ाएगा.
भारत के दोस्त, ट्रंप के धुर विरोधी लूला!
एक ओर जहां दुनिया के कई देशों ने ट्रंप के टैरिफ के सामने घुटने टेक दिए और आनन-फानन में ट्रंप की शर्तें मान लीं, वहीं ब्राजील और भारत दोनों ने इसका मुकाबला किया और ग्लोबल साउथ को लड़ने का मौका दिया उनकी आवाज बने. लूला ट्रंप को सीधी चुनौती देते हैं. वहीं पीएम मोदी और भारत से उनके निकट संबंध हैं. दोनों ही देश संयुक्त राष्ट्र में सुधार की वकालत करते हैं और G-20, ब्रिक्स के जरिए साथ मिलकर इसके पक्ष में आवाज भी उठाते हैं.
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अमेरिका की नाक में दम करेंगे सिल्वा!
आपको बता दें कि लूला की जीत के बाद लैटिन अमेरिका के दो सबसे ज्यादा आबादी वाले देशों, मैक्सिको और ब्राजील में जहां लेफ्ट की सरकार है, वहीं दूसरी जगहों पर राइट की. मैक्सिको से तो अमेरिका की सीमा लगती है, दोनों पड़ोसी हैं. ब्राजील लैटिन अमेरिका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और एक बड़ा देश है. इसकी सालाना GDP 2.6 ट्रिलियन डॉलर है. ऐसे में, ब्राजील के पास ट्रंप की ओर से लगाए गए भारी टैरिफ दबाव के बावजूद अमेरिका पर अपनी निर्भरता कम करने और स्वतंत्र आर्थिक नीति अपनाने का मौका है और लूला के रहते ऐसा ही होने की संभावना है.
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5 जनवरी 2027 को चौथी बार लेंगे राष्ट्रपति पद की शपथ
रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लूला ने लिखा: "एक बार फिर, ब्राजील की जनता ने मुझे दिखाया कि जब हम साथ मिलकर चलते हैं, तो कोई भी सपना बहुत बड़ा नहीं होता। हमने इन दिनों खूब मेहनत की। हर कदम, हर काम और हर मार्च, केवल चुनाव प्रचार के पल नहीं थे। ये सपनों के साक्षात होने का प्रमाण थे, जो ठोस उपलब्धियों में बदल गए, जैसे कि 6x1 कार्यदिवस (सप्ताह में 6 दिन काम) का अंत। लोगों के आगे बढ़े हाथ और उनकी मुस्कान ने मुझे याद दिलाया कि मैंने अपना जीवन इस देश के मजदूरों की लड़ाई के लिए क्यों समर्पित किया है।"
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कैसे रहा था पहले दौर का चुनाव!
उन्होंने आगे कहा, "हम इस सफर से और अधिक मजबूत, एकजुट और बेहतर भविष्य सुनिश्चित करने के लिए तैयार होकर निकले हैं। ब्राजील गले लगाने, हर आंसू, हर मुस्कान और मेरा हाथ कभी न छोड़ने के लिए आपका धन्यवाद। हमारी कहानी के अभी कई खूबसूरत पन्ने लिखे जाने बाकी हैं।"
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4 अक्टूबर को हुए मतदान के पहले दौर में, बोल्सोनारो 47.03 प्रतिशत वैध वोटों के साथ आगे थे, जबकि लूला को 45.16 प्रतिशत वोट मिले थे। इस नतीजे के बाद, लैटिन अमेरिका के सबसे बड़े देश में तीन सप्ताह तक जोरदार चुनाव प्रचार चला।